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छोटी-छोटी कमियों से फरीदाबाद स्मार्ट सिटी बनने से दो कदम पीछे
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फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद स्मार्ट सिटी बनने में दो कदम पीछे है। यदि अधिकारी छोटी-छोटी कमियों को दूर करें तो एक बेहतर शहर के रूप में विकसित हो सकता है। शहर मुख्य रूप से साफ-सफाई, पार्कों का रखरखाव, पानी व सीवर की समस्या है। वहीं चौक-चौराहे उपेक्षा झेल रहे हैं।
दिल्ली से सटे फरीदाबाद की आबादी करीब 22 लाख है। वहीं शहर में करीब 25 हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां है। केंद्र सरकार ने शहर को मॉडर्न रूप से विकसित करने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के रूप में चुना है। इसके तहत शहर में चयनित क्षेत्र में कई काम चल रहे हैं। लेकिन, शहर में छोटे-छोटे कार्य नहीं हो पा रहे हैं। बाहर से आने वाले लोगों को दिल्ली-मथुरा हाईवे के बाद एनआईटी या सेक्टर में जाने पर अहसास नहीं होता कि वाकई में स्मार्ट सिटी में हैं। टूटी सड़कें, अव्यवस्थित यातायात, गंदगी और जाम की समस्या से लोगों को जूझना पड़ता है।
लोगों का कहना है कि शहर को स्मार्ट सिटी बनाने में अधिकारी गंभीर नहीं हैं। छोटे-छोटे प्रयासों से शहर को सुंदर और बेहतर बनाया जा सकता है। नगर निगम के चीफ इंजीनियर रामजी लाल ने कहा कि सफाई के लिए वार्ड स्तर पर कमेटियां बनाई गई हैं। वार्ड के हिसाब से आयुक्त दौरा कर समस्याओं को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। पार्क समेत अन्य पर ध्यान दिया जा रहा है।
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अतिक्रमण से रहता है जाम
निगम के पूर्व चीफ इंजीनियर एनके कटारा ने कहा कि शहर की कॉलोनियों की बात छोड़ दी जाए तो शहर ठीक है। उनका कहना है कि शहर प्रमुख रुप से तीन पार्ट में है। एनआईटी क्षेत्र सेक्टर्स और ग्रेटर फरीदाबाद है। एनआईटी क्षेत्र की सड़कें काफी चौड़ी हैं। इस क्षेत्र में अतिक्रमण से जाम की समस्या रहती है। दूसरी चौक-चौराहे अनदेखी के शिकार है। नीलम व बाटा चौक पर फव्वारे टूटे हुए हैं। स्ट्रीट लाइट का अभाव है। न्यू रेलवे रोड का चौक और हार्डवेयर चौक भी कमोवेश ऐसा ही है। निगम की अनदेखी से यह स्मार्ट सिटी की छवि को खराब करता है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर का कुछ भाग लिया गया है। लेकिन, संबंधित विभाग छोटे कार्यों पर ध्यान दे तो शहर बेहतर हो सकता है। इसमें एक से पांच लाख तक के कार्य शामिल हैं। शहर के प्रमुख सड़कों व चौक रात में अंधेरा पसरा रहता है। इससे भी लोगों को परेशानी होती है। एके कटारा का कहना है कि प्रमुख जगहों पर भी रात में लाइटें जलती नहीं है। रात को अधिकारी शहर का मुआयना करते तो, उन्हें स्थित की सही जानकारी मिलती।
लचर है सफाई व्यवस्था
शहर में साफ-सफाई की लचर व्यवस्था है। मुख्य सड़कों के साथ कॉलोनियों में लोगों को इससे जूझना पड़ रहा है। वहीं कई जगहों पर डेयरियों के वजह से गंदगी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निगम शहर को साफ-सुथरा रखने में फेल साबित हो रहा है। निगम सफाई, सीवर और पानी की व्यवस्था सही तरीके से कर दे तो ही बेहतर होता। सेक्टर हो या एनआईटी क्षेत्र साफ-सफाई का अभाव है।
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दिल्ली से सटे फरीदाबाद की आबादी करीब 22 लाख है। वहीं शहर में करीब 25 हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां है। केंद्र सरकार ने शहर को मॉडर्न रूप से विकसित करने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के रूप में चुना है। इसके तहत शहर में चयनित क्षेत्र में कई काम चल रहे हैं। लेकिन, शहर में छोटे-छोटे कार्य नहीं हो पा रहे हैं। बाहर से आने वाले लोगों को दिल्ली-मथुरा हाईवे के बाद एनआईटी या सेक्टर में जाने पर अहसास नहीं होता कि वाकई में स्मार्ट सिटी में हैं। टूटी सड़कें, अव्यवस्थित यातायात, गंदगी और जाम की समस्या से लोगों को जूझना पड़ता है।
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लोगों का कहना है कि शहर को स्मार्ट सिटी बनाने में अधिकारी गंभीर नहीं हैं। छोटे-छोटे प्रयासों से शहर को सुंदर और बेहतर बनाया जा सकता है। नगर निगम के चीफ इंजीनियर रामजी लाल ने कहा कि सफाई के लिए वार्ड स्तर पर कमेटियां बनाई गई हैं। वार्ड के हिसाब से आयुक्त दौरा कर समस्याओं को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। पार्क समेत अन्य पर ध्यान दिया जा रहा है।
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अतिक्रमण से रहता है जाम
निगम के पूर्व चीफ इंजीनियर एनके कटारा ने कहा कि शहर की कॉलोनियों की बात छोड़ दी जाए तो शहर ठीक है। उनका कहना है कि शहर प्रमुख रुप से तीन पार्ट में है। एनआईटी क्षेत्र सेक्टर्स और ग्रेटर फरीदाबाद है। एनआईटी क्षेत्र की सड़कें काफी चौड़ी हैं। इस क्षेत्र में अतिक्रमण से जाम की समस्या रहती है। दूसरी चौक-चौराहे अनदेखी के शिकार है। नीलम व बाटा चौक पर फव्वारे टूटे हुए हैं। स्ट्रीट लाइट का अभाव है। न्यू रेलवे रोड का चौक और हार्डवेयर चौक भी कमोवेश ऐसा ही है। निगम की अनदेखी से यह स्मार्ट सिटी की छवि को खराब करता है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर का कुछ भाग लिया गया है। लेकिन, संबंधित विभाग छोटे कार्यों पर ध्यान दे तो शहर बेहतर हो सकता है। इसमें एक से पांच लाख तक के कार्य शामिल हैं। शहर के प्रमुख सड़कों व चौक रात में अंधेरा पसरा रहता है। इससे भी लोगों को परेशानी होती है। एके कटारा का कहना है कि प्रमुख जगहों पर भी रात में लाइटें जलती नहीं है। रात को अधिकारी शहर का मुआयना करते तो, उन्हें स्थित की सही जानकारी मिलती।
लचर है सफाई व्यवस्था
शहर में साफ-सफाई की लचर व्यवस्था है। मुख्य सड़कों के साथ कॉलोनियों में लोगों को इससे जूझना पड़ रहा है। वहीं कई जगहों पर डेयरियों के वजह से गंदगी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निगम शहर को साफ-सुथरा रखने में फेल साबित हो रहा है। निगम सफाई, सीवर और पानी की व्यवस्था सही तरीके से कर दे तो ही बेहतर होता। सेक्टर हो या एनआईटी क्षेत्र साफ-सफाई का अभाव है।