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Faridabad News: मेडिकल कॉलेज में आठ महीने में नहीं बन पाए दो ऑपरेशन थियेटर
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ऑपरेशन के लिए पहुंच रहे मरीजों को हो रही परेशानी, निजी अस्पतालों के काटने पड़ते हैं चक्कर
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बन रहे दो ऑपरेशन थियेटरों का निर्माण आठ महीनों बाद भी पूरा नहीं हो सका है। कछुआ गति से चल रहे काम के कारण ऑपरेशन के लिए आ रहे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में रोजाना फरीदाबाद समेत, पलवल, होडल, हथीन, रेवाड़ी, पानीपत, गुरुग्राम, दिल्ली, नोएडा आदि जिलों से रोजाना 4500 मरीज इलाज के लिए आते हैं। शुरुआत में अस्पताल में 13 ऑपरेशन कक्ष बनाने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन अभी 10 ही संचालित हैं। यहां रोजाना करीब 60 से 70 मरीजों के ऑपरेशन किए जाते हैं। एक ऑपरेशन कक्ष के स्थान पर कैथलैब बना दी गई। वहीं, दो ऑपरेशन थियेटर बनाने का काम केंद्रीय लोक निर्माण ने करीब आठ माह पहले शुरू किया था। इन्हें चार से पांच माह में बन जाना चाहिए था लेकिन धीमी गति से चल रहे काम के कारण अब तक काम पूरा नहीं हो सका है, जिससे मरीजों को काफी दिक्कत होती है।
मरीजों को करना पड़ता है रेफर
अस्पताल में ऑपरेशन थियेटरों की संख्या कम होने की वजह से अभी मरीजों को निजी अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। कई बार दस्तावेज पूरे नहीं होने पर मरीजों को बार-बार दो अस्पतालों के बीच चक्कर काटने पड़ते हैं।
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ऑपरेशन थियेटरों के निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग अधिकारियों को कहा गया है, जिससे ऑपरेशन प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। - डॉ. अनिल पांडे, डीन, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बन रहे दो ऑपरेशन थियेटरों का निर्माण आठ महीनों बाद भी पूरा नहीं हो सका है। कछुआ गति से चल रहे काम के कारण ऑपरेशन के लिए आ रहे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में रोजाना फरीदाबाद समेत, पलवल, होडल, हथीन, रेवाड़ी, पानीपत, गुरुग्राम, दिल्ली, नोएडा आदि जिलों से रोजाना 4500 मरीज इलाज के लिए आते हैं। शुरुआत में अस्पताल में 13 ऑपरेशन कक्ष बनाने की योजना तैयार की गई थी, लेकिन अभी 10 ही संचालित हैं। यहां रोजाना करीब 60 से 70 मरीजों के ऑपरेशन किए जाते हैं। एक ऑपरेशन कक्ष के स्थान पर कैथलैब बना दी गई। वहीं, दो ऑपरेशन थियेटर बनाने का काम केंद्रीय लोक निर्माण ने करीब आठ माह पहले शुरू किया था। इन्हें चार से पांच माह में बन जाना चाहिए था लेकिन धीमी गति से चल रहे काम के कारण अब तक काम पूरा नहीं हो सका है, जिससे मरीजों को काफी दिक्कत होती है।
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मरीजों को करना पड़ता है रेफर
अस्पताल में ऑपरेशन थियेटरों की संख्या कम होने की वजह से अभी मरीजों को निजी अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। कई बार दस्तावेज पूरे नहीं होने पर मरीजों को बार-बार दो अस्पतालों के बीच चक्कर काटने पड़ते हैं।
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ऑपरेशन थियेटरों के निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग अधिकारियों को कहा गया है, जिससे ऑपरेशन प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। - डॉ. अनिल पांडे, डीन, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल