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Faridabad News: एसटीपी से शोधित पानी का सिंचाई में होगा उपयोग
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सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग हरियाणा और सूक्ष्म इकाई एवं कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने बनाई योजना
संदीप वर्मा
फरीदाबाद। शहर से निकलने वाले गंदे पानी को 4 एसटीपी से शोधित कर 250 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) पानी का उपयोग सिंचाई और अन्य जरूरत के लिए की जाने की योजना है। सूक्ष्म इकाई एवं कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमआई एंड सीएडीए) और सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग हरियाणा (आईडब्ल्यूआरडी) ने आने वाले समय में एसटीपी से शोधित पानी के उपयोग की योजना लाने जा रहा है। इसमें करीब 550 करोड़ रुपये खर्च होंगे। फरीदाबाद में वर्तमान में दो एसटीपी सुचारू हैं।
फरीदाबाद में वर्तमान में दो एसटीपी के माध्यम से गंदे पानी का शोधन किया जा रहा है। इसमें एक 45 एमएलडी क्षमता का एसटीपी नगर निगम की ओर से कार्य कर रहा है। इसके अलावा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की ओर से बनाए गए 30 एमएलडी क्षमता के एसटीपी से गंदे पानी का शोधन किया जाता है। इनकी देखरेख एफएमडी कर रही है। वर्तमान में दो एसटीपी के माध्यम से करीब 25 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता का ही दोबारा उपयोग किया जा पा रहा है। इनमें से सेक्टर-21ए वाले एसटीपी से 10 एमएलडी शोधित पानी को बड़खल झील को प्रतिदिन भरने के लिए भेजा जा रहा है। इसके अलावा बादशाहपुर स्थित एसटीपी से 15 एमएलडी शोधित पानी को सिंचाई के लिए दिया जा रहा है।
वर्तमान में नगर निगम की ओर से 180 एमएलडी क्षमता के दो एसटीपी बनकर तैयार हो गए हैं। प्रतापगढ़ स्थित एसटीपी 100 एमएलडी क्षमता का एसटीपी है। इसके अलावा 80 एमएलडी क्षमता का मिर्जापुर गांव में एसटीपी तैयार है। दोनों ही एसटीपी से गंदे पानी शोधन का ट्रायल चल रहा है। अनुमान है कि अप्रैल माह के अंत तक दोनों एसटीपी सुचारू हो जाएंगे। दोनों ही एसटीपी लगभग एक वर्ष में अपनी पूरी क्षमता से जल शोधन कर सकेंगे। ऐसे में चारों एसटीपी से करीब 255 एमएलडी गंदे पानी का शोधन हो सकेगा। एफएमडीए ने इस पानी के उपयोग के लिए योजना बनाने को दोनों ही विभागों को पत्र लिखा था।
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चारों एसटीपी से शोधित पानी का होगा उपयोग
250 एमएलडी शोधित पानी को दोबारा उपयोग के लिए सूक्ष्म इकाई एवं कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण और सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग हरियाणा को योजना बनाने के लिए कहा गया था। सूक्ष्म इकाई एवं कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण की ओर से फरवरी माह के अंत तक प्रतापगढ़ एसटीपी से शोधित होने वाले 100 एमएलडी पानी की योजना पेश करेगा। इसके बाद मार्च माह में मिर्जापुर और बादशाहपुर स्थित एसटीपी से शोधित होने वाले पानी के उपयोग की योजना भेजी जाएगी। इस सिंचाई योजना में कुल 550 करोड़ रुपये का खर्च आने की संभावना है।
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एसटीपी का पानी नहरों और उप नहरों के जरिए सिंचाई को ले जाएंगे
सभी एसटीपी का पानी अलग-अलग नहरों, उप नहरों और माइनर से निकाला जाएगा। प्रतापगढ़ एसटीपी से निकलने वाले पानी को हरिनंदपुरी नहर से ले जाया जाएगा। इसके अलावा अन्य एसटीपी को फतेहपुर उप नहर, सीकरी नहर आदि के माध्यम से ले जाया जाएगा।
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एक एकड़ में बने तालाब से होगी 200 एकड़ खेतों की सिंचाई
नहरों और उप नहरों के माध्यम से पानी को खेतों तक ले जाया जाएगा। योजना के अनुसार पंचायती भूमि पर तालाब बनाए जाएंगे। इन तालाबों से सोलर पंप के जरिए खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जाएगा। किसानों को अपने खेतों तक पानी ले जाने के लिए योजना के तहत 85 प्रतिशत छूट प्रदान की गई है। ऐसे में किसान अपने खेतों तक यहां से सिंचाई के लिए पानी ले जा सकेंगे।
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एफएमडीए की ओर से 250 एमएलडी शोधित पानी के उपयोग के लिए पत्र लिखा गया था। प्रतापगढ़ एसटीपी, मिर्जापुर एसटीपी और बादशाहपुर एसटीपी के लिए योजना बनाई जा रही है। फरवरी माह तक प्रतापगढ़ और मार्च तक अन्य दोनों एसटीपी के लिए योजना बनाकर भेजी जाएगी। इसमें करीब 550 करोड़ की लागत आ सकती है। योजना पर स्वीकृति मिलने के बाद इसके पूरा होने में एक वर्ष का समय लग सकता है।
कुलजीत, कार्यकारी अभियंता सूक्ष्म इकाई एवं कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण
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संदीप वर्मा
फरीदाबाद। शहर से निकलने वाले गंदे पानी को 4 एसटीपी से शोधित कर 250 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) पानी का उपयोग सिंचाई और अन्य जरूरत के लिए की जाने की योजना है। सूक्ष्म इकाई एवं कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमआई एंड सीएडीए) और सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग हरियाणा (आईडब्ल्यूआरडी) ने आने वाले समय में एसटीपी से शोधित पानी के उपयोग की योजना लाने जा रहा है। इसमें करीब 550 करोड़ रुपये खर्च होंगे। फरीदाबाद में वर्तमान में दो एसटीपी सुचारू हैं।
फरीदाबाद में वर्तमान में दो एसटीपी के माध्यम से गंदे पानी का शोधन किया जा रहा है। इसमें एक 45 एमएलडी क्षमता का एसटीपी नगर निगम की ओर से कार्य कर रहा है। इसके अलावा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की ओर से बनाए गए 30 एमएलडी क्षमता के एसटीपी से गंदे पानी का शोधन किया जाता है। इनकी देखरेख एफएमडी कर रही है। वर्तमान में दो एसटीपी के माध्यम से करीब 25 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता का ही दोबारा उपयोग किया जा पा रहा है। इनमें से सेक्टर-21ए वाले एसटीपी से 10 एमएलडी शोधित पानी को बड़खल झील को प्रतिदिन भरने के लिए भेजा जा रहा है। इसके अलावा बादशाहपुर स्थित एसटीपी से 15 एमएलडी शोधित पानी को सिंचाई के लिए दिया जा रहा है।
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वर्तमान में नगर निगम की ओर से 180 एमएलडी क्षमता के दो एसटीपी बनकर तैयार हो गए हैं। प्रतापगढ़ स्थित एसटीपी 100 एमएलडी क्षमता का एसटीपी है। इसके अलावा 80 एमएलडी क्षमता का मिर्जापुर गांव में एसटीपी तैयार है। दोनों ही एसटीपी से गंदे पानी शोधन का ट्रायल चल रहा है। अनुमान है कि अप्रैल माह के अंत तक दोनों एसटीपी सुचारू हो जाएंगे। दोनों ही एसटीपी लगभग एक वर्ष में अपनी पूरी क्षमता से जल शोधन कर सकेंगे। ऐसे में चारों एसटीपी से करीब 255 एमएलडी गंदे पानी का शोधन हो सकेगा। एफएमडीए ने इस पानी के उपयोग के लिए योजना बनाने को दोनों ही विभागों को पत्र लिखा था।
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चारों एसटीपी से शोधित पानी का होगा उपयोग
250 एमएलडी शोधित पानी को दोबारा उपयोग के लिए सूक्ष्म इकाई एवं कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण और सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग हरियाणा को योजना बनाने के लिए कहा गया था। सूक्ष्म इकाई एवं कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण की ओर से फरवरी माह के अंत तक प्रतापगढ़ एसटीपी से शोधित होने वाले 100 एमएलडी पानी की योजना पेश करेगा। इसके बाद मार्च माह में मिर्जापुर और बादशाहपुर स्थित एसटीपी से शोधित होने वाले पानी के उपयोग की योजना भेजी जाएगी। इस सिंचाई योजना में कुल 550 करोड़ रुपये का खर्च आने की संभावना है।
एसटीपी का पानी नहरों और उप नहरों के जरिए सिंचाई को ले जाएंगे
सभी एसटीपी का पानी अलग-अलग नहरों, उप नहरों और माइनर से निकाला जाएगा। प्रतापगढ़ एसटीपी से निकलने वाले पानी को हरिनंदपुरी नहर से ले जाया जाएगा। इसके अलावा अन्य एसटीपी को फतेहपुर उप नहर, सीकरी नहर आदि के माध्यम से ले जाया जाएगा।
एक एकड़ में बने तालाब से होगी 200 एकड़ खेतों की सिंचाई
नहरों और उप नहरों के माध्यम से पानी को खेतों तक ले जाया जाएगा। योजना के अनुसार पंचायती भूमि पर तालाब बनाए जाएंगे। इन तालाबों से सोलर पंप के जरिए खेतों तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचाया जाएगा। किसानों को अपने खेतों तक पानी ले जाने के लिए योजना के तहत 85 प्रतिशत छूट प्रदान की गई है। ऐसे में किसान अपने खेतों तक यहां से सिंचाई के लिए पानी ले जा सकेंगे।
एफएमडीए की ओर से 250 एमएलडी शोधित पानी के उपयोग के लिए पत्र लिखा गया था। प्रतापगढ़ एसटीपी, मिर्जापुर एसटीपी और बादशाहपुर एसटीपी के लिए योजना बनाई जा रही है। फरवरी माह तक प्रतापगढ़ और मार्च तक अन्य दोनों एसटीपी के लिए योजना बनाकर भेजी जाएगी। इसमें करीब 550 करोड़ की लागत आ सकती है। योजना पर स्वीकृति मिलने के बाद इसके पूरा होने में एक वर्ष का समय लग सकता है।
कुलजीत, कार्यकारी अभियंता सूक्ष्म इकाई एवं कमान क्षेत्र विकास प्राधिकरण