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Faridabad News: आज लगेगा सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे का प्रतीक पंखा मेला
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ओल्ड फरीदाबाद के पथवारी मंदिर में किया जाएगा आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। ओल्ड फरीदाबाद का ऐतिहासिक पंखा मेला शनिवार को मां पथवारी देवी मंदिर में शुरू होगा। यह मेला तीन दिनों तक चलता है। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा दंगल का भी आयोजन किया जाता है। मेले की मान्यता है कि मंदिर में पंखा चढ़ाने से शहर में कोई आपदा नहीं आती है। सैनी समाज के प्रधान मुकेश सैनी बताते हैं कि गांव की रक्षा के लिए बाहर खेड़ा देवता विराजमान होते हैं।
बताया जाता है कि कई सो साल पहले फरीदाबाद में रक्षा के लिए मां पथवारी की मूर्ति स्थापित की गई थी। उस समय फरीदाबाद में महामारी फैल गई थी, जिससे लोगों की अकाल मौत होने लगी। महामारी को रोकने के लिए किसी भक्त ने मां पथवारी के समक्ष प्रार्थना करते हुए पंखा चढ़ाने की अरदास की। मां ने उस भक्त की गुहार सुनी, जिसके चलते फरीदाबाद के सभी वर्ग के लोगों ने मिलकर मां पथवारी की मूर्ति पर पंखा चढ़ाया। तब से आज तक पंखा चढ़ाने की परंपरा चलती आ रही है।
आज भी सभी वर्ग के लोग सौहार्द की भावना को कायम रखते हुए एक साथ मिलकर पंखा मेले का आयोजन रक्षाबंधन के अवसर पर करते हैं। हर साल रक्षा बंधन के दिन पंखा मेले की झांकियां निकलती हैं। जिसमें दिल्ली, नोएडा, गुड़गांव, जेवर, अलीगढ़ व मथुरा के अलावा अन्य शहरों से कलाकार व झांकियां आकर्षण का केंद्र होती हैं। झांकियां और बैंड-बाजों की धुन पर पंखा मेला शहर की गलियों से निकलता है और इसके बाद पंखे को मां के दरबार में चढ़ाया जाता है।
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पहले दिन पंखा मेले की शुरुआत होते हुए झांकियां निकाली जाती हैं। उसी रात को स्वांग होता है। दूसरे दिन दंगल और रात को ओल्ड फरीदाबाद की पुरानी अनाज मंडी में स्वांग होता है। तीसरे दिन इनाम वितरण किया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। ओल्ड फरीदाबाद का ऐतिहासिक पंखा मेला शनिवार को मां पथवारी देवी मंदिर में शुरू होगा। यह मेला तीन दिनों तक चलता है। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा दंगल का भी आयोजन किया जाता है। मेले की मान्यता है कि मंदिर में पंखा चढ़ाने से शहर में कोई आपदा नहीं आती है। सैनी समाज के प्रधान मुकेश सैनी बताते हैं कि गांव की रक्षा के लिए बाहर खेड़ा देवता विराजमान होते हैं।
बताया जाता है कि कई सो साल पहले फरीदाबाद में रक्षा के लिए मां पथवारी की मूर्ति स्थापित की गई थी। उस समय फरीदाबाद में महामारी फैल गई थी, जिससे लोगों की अकाल मौत होने लगी। महामारी को रोकने के लिए किसी भक्त ने मां पथवारी के समक्ष प्रार्थना करते हुए पंखा चढ़ाने की अरदास की। मां ने उस भक्त की गुहार सुनी, जिसके चलते फरीदाबाद के सभी वर्ग के लोगों ने मिलकर मां पथवारी की मूर्ति पर पंखा चढ़ाया। तब से आज तक पंखा चढ़ाने की परंपरा चलती आ रही है।
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आज भी सभी वर्ग के लोग सौहार्द की भावना को कायम रखते हुए एक साथ मिलकर पंखा मेले का आयोजन रक्षाबंधन के अवसर पर करते हैं। हर साल रक्षा बंधन के दिन पंखा मेले की झांकियां निकलती हैं। जिसमें दिल्ली, नोएडा, गुड़गांव, जेवर, अलीगढ़ व मथुरा के अलावा अन्य शहरों से कलाकार व झांकियां आकर्षण का केंद्र होती हैं। झांकियां और बैंड-बाजों की धुन पर पंखा मेला शहर की गलियों से निकलता है और इसके बाद पंखे को मां के दरबार में चढ़ाया जाता है।
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पहले दिन पंखा मेले की शुरुआत होते हुए झांकियां निकाली जाती हैं। उसी रात को स्वांग होता है। दूसरे दिन दंगल और रात को ओल्ड फरीदाबाद की पुरानी अनाज मंडी में स्वांग होता है। तीसरे दिन इनाम वितरण किया जाता है।