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बमबारी के बीच बर्फ को गर्म कर पानी से बुझाई प्यास, 12 दिन बंकर में छिपकर बचाई जान, यूक्रेन से सकुशल स्वदेश लौटने पर एमबीबीएस छात्र दिपेश ने सुनाई आपबीती

Sat, 12 Mar 2022 10:44 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 12 Mar 2022 10:44 PM IST
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Thirst quenched with water by heating ice amid bombing, saved life by hiding in a bunker for 12 days, MBBS student Dipesh narrated his ordeal after returning home safely from Ukraine
यूक्रेन के सूमी से लौटे दीपेश। - फोटो : Faridabad
फरीदाबाद। केंद्र सरकार द्वारा यूक्रेन में भीषण युद्ध के बीच फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जा रहा है। इसी कड़ी में शुक्रवार को गांव मिर्जापुर निवासी दिपेश गौड़ काफी समस्याओं का सामना करने के बाद यूक्रेन के सूमी से सुरक्षित स्वदेश लौटे। गाजियाबाद हिंडन एयरपोर्ट पर उनकी मां की आंखें बेटे को देखते ही नम हो गईं और बेटे को गले लगाकर फूट-फूटकर रोने लगीं। दिपेश ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि बमबारी के बीच उन्होंने 12 दिन बंकर में छिपकर बर्फ को गर्म कर पानी पिया और किसी तरह जान बचाई। परिजनों से मिलकर अब वह काफी खुश हैं। इसके लिए उन्होंने भारत सरकार का आभार व्यक्त किया।
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बल्लभगढ़ के गांव मिर्जापुर निवासी महेश गौड़ ने बताया कि उनका भाई दिपेश गौड़ एमबीबीएस अंतिम सत्र का छात्र है। एक साल पहले वह यूक्रेन गया। पिछले कुछ दिनों से यूक्रेन-रूस के बीच चल रहे भीषण युद्ध के कारण परिवार को उसकी काफी चिंता सता रही थी कि वह किस हालात में रह रहा होगा। पिछले करीब 12 दिनों से दिपेश सूमी में फंसा हुआ था और इस दौरान भाई से बात भी नहीं हो पा रही थी। दिपेश ने बताया कि वह सूमी के एक कॉलेज में हॉस्टल में रहते थे। सूमी में हालात बेहद खराब हैं। रूस की ओर से लगातार हो रही बमबारी और मिसाइल हमले से सूमी में पेयजल सप्लाई की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थी। इससे शहर में भीषण पेयजल संकट पैदा हो गया था। पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त होने से उनके सामने पीने के पानी की भारी समस्या उत्पन्न हो गई थी। बूंद-बूंद पानी के लिए लोग तरस रहे थे। ऐसे में वह बाहर बैंच और खुले में पड़ी बर्फ को पॉलिथिन में भर लेते थे और उसे गर्म कर पानी बना कर पीते थे। वहीं बमबारी के बीच उन्हें 12 दिन बंकर में ही छिपकर रहना पड़ा।
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खाद्य सामग्री के संकट के कारण दो दिन भूखे गुजारनी पड़ी रात
दिपेश ने बताया कि युद्ध के कारण सूमी में खाद्य पदार्थों का संकट है। कर्फ्यू के बीच लोगों को सीमित समय के लिए ही बंकरों से बाहर निकलने की अनुमति मिलती है। ऐसे में बंकर से बाहर निकलकर दोस्तों के साथ जब मार्केट जाते थे तो सब्जी और खाने का सामान नहीं मिलता था, अगर मिलता भी था तो वह बेहद कम। इस कारण उन्हें दो से तीन दिन भूखे रहना पड़ा। तीन दिन पहले रूस की ओर से बमबारी कम होने पर वह किसी प्रकार दोस्तों के साथ बस से पोलतबा पहुंचा। सूमी से यह क्षेत्र मात्र दो घंटे की दूरी पर है, लेकिन युद्ध के कारण उन्हें 13 घंटे लगे। पोलतबा से ट्रेन पकड़ कर 13 घंटे में लीव पहुंचे। बस और ट्रेन में भीड़ होने के कारण उन्हें 26 घंटे खड़े होकर ही सफर करना पड़ा। लीव से पोलैंड पहुंचे। जहां से सकुशल स्वदेश वापसी हुई।
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