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Faridabad News: जेसी बोस यूनिवर्सिटी में नहीं है छात्रों के लिए हॉस्टल

Thu, 10 Sep 2026 12:42 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:42 AM IST
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There is no hostel for students at JC Bose University.
पीजी और किराये के कमरों में रहने को मजबूर करीब ढाई हजार छात्र
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संवाद न्यूज एजेंसी

फरीदाबाद। जेसी बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए में पढ़ने वाले हजारों छात्रों के सामने रहने की समस्या बनी हुई है। विश्वविद्यालय में वर्तमान में छात्रों के लिए कोई बॉयज हॉस्टल उपलब्ध नहीं है।

ऐसे में करीब ढाई हजार छात्रों को पीजी, किराये के कमरों और अन्य निजी आवासों में रहना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय में स्नातक और परास्नातक मेें 6 हजार से अधिक छात्र हैं। इनमें करीब ढाई हजार छात्र दूसरे जिलों और राज्यों के रहने वाले हैं। करीब तीन साल पहले तक विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के रहने के लिए हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध थी। वर्ष 2021 में हॉस्टल की पुरानी बिल्डिंग को जर्जर घोषित कर दिया गया था। इसके बाद इसे ध्वस्त करने के आदेश जारी किए गए। हालांकि, उस समय हॉस्टल में रह रहे छात्रों को कुछ समय तक इसी बिल्डिंग में रहने की सुविधा दी गई। बाद में वर्ष 2023-24 के दौरान इस बिल्डिंग को ध्वस्त कर दिया गया। इसके बाद से छात्रों के लिए परिसर में बॉयज हॉस्टल की सुविधा नहीं है।
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नई बिल्डिंग में 600 छात्रों के रहने की होगी क्षमता
विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से छात्रों की समस्या को देखते हुए नई मल्टी स्टोरी हॉस्टल बिल्डिंग प्रस्तावित की गई है। पीआरओ जितेंद्र ने बताया कि इसके निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। हालांकि प्रस्तावित बिल्डिंग की क्षमता करीब 600 छात्रों की ही होगी। ऐसे में यदि यह हॉस्टल बन भी जाता है तो करीब ढाई हजार छात्रों की जरूरत के मुकाबले केवल 600 विद्यार्थियों को ही परिसर में रहने की सुविधा मिल सकेगी। इससे लगभग दो हजार छात्रों को पीजी या किराये के कमरों में ही रहना पड़ सकता है।
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छात्राओं के लिए भी सीमित है हॉस्टल सुविधा
विश्वविद्यालय में छात्राओं के लिए दो हॉस्टल बिल्डिंग उपलब्ध हैं। दोनों की क्षमता करीब 300-300 छात्राओं की है। यानी कुल 600 छात्राओं के रहने की व्यवस्था है। इसके मुकाबले विश्वविद्यालय में छात्राओं की संख्या करीब छह हजार बताई जा रही है। इनमें करीब दो हजार से अधिक छात्राएं दूसरे जिलों और राज्यों से आती हैं। इन छात्राओं में से भी बड़ी संख्या को हॉस्टल में जगह नहीं मिलने के कारण विश्वविद्यालय के बाहर पीजी या किराये के कमरों में रहना पड़ता है।

बाहर रहने से बढ़ रहा आर्थिक बोझ
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में हॉस्टल की सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें पढ़ाई के साथ रहने और आने-जाने का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। कई विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय के आसपास महंगे पीजी या कमरे लेने पड़ते हैं। छात्रों की मांग है कि प्रस्तावित हॉस्टल की क्षमता बढ़ाई जाए, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को परिसर में रहने की सुविधा मिल सके।
छात्रों से बातचीत
हॉस्टल नहीं होने से हर महीने पीजी का किराया देना पड़ता है। इससे पढ़ाई के खर्च के साथ परिवार पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। -शुभम, छात्र
दूसरे जिलों और राज्यों के छात्रों के लिए हॉस्टल जरूरी है। अगर हम कॉलेज से दूर पीजी लेते हैं, तो कॉलेज पहुंचने में परेशानी होती है। -मानव, छात्र

कैंपस में हॉस्टल की सुविधा नहीं होने से रोज आने-जाने में समय और पैसा दोनों खर्च होता है। इससे पढ़ाई भी प्रभावित होती है। -निखिल, छात्र

अगर नए हॉस्टल में सिर्फ 600 छात्रों के रहने की व्यवस्था होगी तो समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। इसकी क्षमता और बढ़ाई जानी चाहिए। -अनुज, छात्र
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