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Faridabad News: तिगांव में छतरी वाले कुआं का होगा कायाकल्प, ग्राम पंचायत ने शुरू कराया पुनर्निर्माण कार्य
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करीब 7 लाख रुपये की लागत से क्षेत्रीय धरोहर को दिया जाएगा नया रूप
संवाद न्यूज एजेंसी
तिगांव। गांव तिगांव में वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान माने जाने वाले छतरी वाले कुआं का पुनर्निर्माण कार्य ग्राम पंचायत द्वारा शुरू करा दिया गया है। करीब 7 लाख रुपये की लागत से किए जा रहे इस कार्य से न केवल ऐतिहासिक धरोहर को नया जीवन मिलेगा, बल्कि गांव की परंपराओं को भी मजबूती मिलेगी।
ग्रामीणों के अनुसार यह कुआं लंबे समय से शादी-ब्याह और कुआं पूजन जैसी पारंपरिक रस्मों का केंद्र रहा है। पुराने समय से चली आ रही परंपरा के तहत विवाह से पहले यहां पूजा-अर्चना की जाती रही है। हालांकि समय के साथ देखरेख के अभाव में कुएं की स्थिति जर्जर हो गई थी और यह सामान्य उपयोग के लायक भी नहीं रहा था। इसके चलते ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत से इसके जीर्णोद्धार की मांग की थी। जानकारी अनुसार कुएं को ‘छतरी वाला कुआं’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि पुराने समय में बुजुर्गों ने इसकी साफ-सफाई और संरक्षण के उद्देश्य से इसके ऊपर छतरी बनवाई थी। इससे कुएं में गंदगी कम जाती थी और पानी सुरक्षित रहता था। समय के साथ यह छतरी ही इसकी पहचान बन गई और लोग इसे इसी नाम से पुकारने लगे।
वर्जन
‘छतरी वाला कुआं’ गांव की ऐतिहासिक पहचान है और इसे संरक्षित करना पंचायत की प्राथमिकता है। करीब 7 लाख रुपये की लागत से कुएं की मरम्मत, सौंदर्यीकरण और आसपास साफ-सफाई की व्यवस्था की जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस धरोहर से जुड़ी रहें।
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- विक्रम प्रताप सिंह, सरपंच तिगांव
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संवाद न्यूज एजेंसी
तिगांव। गांव तिगांव में वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान माने जाने वाले छतरी वाले कुआं का पुनर्निर्माण कार्य ग्राम पंचायत द्वारा शुरू करा दिया गया है। करीब 7 लाख रुपये की लागत से किए जा रहे इस कार्य से न केवल ऐतिहासिक धरोहर को नया जीवन मिलेगा, बल्कि गांव की परंपराओं को भी मजबूती मिलेगी।
ग्रामीणों के अनुसार यह कुआं लंबे समय से शादी-ब्याह और कुआं पूजन जैसी पारंपरिक रस्मों का केंद्र रहा है। पुराने समय से चली आ रही परंपरा के तहत विवाह से पहले यहां पूजा-अर्चना की जाती रही है। हालांकि समय के साथ देखरेख के अभाव में कुएं की स्थिति जर्जर हो गई थी और यह सामान्य उपयोग के लायक भी नहीं रहा था। इसके चलते ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत से इसके जीर्णोद्धार की मांग की थी। जानकारी अनुसार कुएं को ‘छतरी वाला कुआं’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि पुराने समय में बुजुर्गों ने इसकी साफ-सफाई और संरक्षण के उद्देश्य से इसके ऊपर छतरी बनवाई थी। इससे कुएं में गंदगी कम जाती थी और पानी सुरक्षित रहता था। समय के साथ यह छतरी ही इसकी पहचान बन गई और लोग इसे इसी नाम से पुकारने लगे।
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‘छतरी वाला कुआं’ गांव की ऐतिहासिक पहचान है और इसे संरक्षित करना पंचायत की प्राथमिकता है। करीब 7 लाख रुपये की लागत से कुएं की मरम्मत, सौंदर्यीकरण और आसपास साफ-सफाई की व्यवस्था की जा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस धरोहर से जुड़ी रहें।
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- विक्रम प्रताप सिंह, सरपंच तिगांव