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Faridabad News: फुटपाथ का अधिकार मिल गया लेकिन सुविधा नहीं मिल रही
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फुटपाथ का अधिकार मिल गया लेकिन सुविधा कब मिलेगी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फरीदाबाद के फुटपाथों पर उठे सवाल
नीलम-बाटा रोड से अजरौंदा चौक तक पैदल चलना चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पैदल चलने और सुरक्षित फुटपाथ के उपयोग को नागरिकों का मौलिक अधिकार घोषित किए जाने के बाद फरीदाबाद के फुटपाथों की बदहाल स्थिति को लेकर लोगों का कहना है कि अधिकार मिल गया है लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के कारण सुविधा नहीं मिल पा रही है। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर फुटपाथ या तो गायब हैं या फिर अतिक्रमण और अव्यवस्था के कारण पैदल यात्रियों के लिए अनुपयोगी बने हुए हैं।
नीलम-बाटा रोड पर कई स्थानों पर फुटपाथ सीधे नाले के ऊपर बने हैं, जबकि कई हिस्सों में फुटपाथ पूरी तरह खत्म हो जाता है। ऐसे में लोगों को सड़क पर चलना पड़ता है जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। जिस स्थान पर फुटपाथ नहीं है वाला सीधा नाला है अंधेरे में कोई इसमें गिर भी सकता है। अजरौंदा चौक पर फुटपाथ पर अवैध पार्किंग, स्लैब और अन्य सामान रखे होने से पैदल चलना मुश्किल हो गया है। वहीं बाटा मेट्रो स्टेशन के आसपास भी फुटपाथ की खराब स्थिति रोजाना हजारों यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है।
मैं रोज नीलम-बाटा रोड से पैदल निकलता हूं। कई जगह फुटपाथ ही नहीं है, इसलिए सड़क पर चलना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने अधिकार दिया है तो अब प्रशासन को भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। विपिन सिंह
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अजरौंदा चौक पर फुटपाथ पर गाड़ियां खड़ी रहती हैं और जगह-जगह स्लैब रखे हैं। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यहां पैदल चलना बेहद कठिन है। दविंद्र सिंह
बाटा मेट्रो स्टेशन के पास रोज हजारों लोग उतरते हैं, लेकिन फुटपाथ टूटा हुआ है। थोड़ी सी लापरवाही बड़ा हादसा करा सकती है। महावीर
अगर पैदल चलना मौलिक अधिकार है तो शहर में हर सड़क पर सुरक्षित और बाधारहित फुटपाथ होना चाहिए। अभी हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। जगमोहन
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फरीदाबाद के फुटपाथों पर उठे सवाल
नीलम-बाटा रोड से अजरौंदा चौक तक पैदल चलना चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पैदल चलने और सुरक्षित फुटपाथ के उपयोग को नागरिकों का मौलिक अधिकार घोषित किए जाने के बाद फरीदाबाद के फुटपाथों की बदहाल स्थिति को लेकर लोगों का कहना है कि अधिकार मिल गया है लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के कारण सुविधा नहीं मिल पा रही है। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर फुटपाथ या तो गायब हैं या फिर अतिक्रमण और अव्यवस्था के कारण पैदल यात्रियों के लिए अनुपयोगी बने हुए हैं।
नीलम-बाटा रोड पर कई स्थानों पर फुटपाथ सीधे नाले के ऊपर बने हैं, जबकि कई हिस्सों में फुटपाथ पूरी तरह खत्म हो जाता है। ऐसे में लोगों को सड़क पर चलना पड़ता है जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। जिस स्थान पर फुटपाथ नहीं है वाला सीधा नाला है अंधेरे में कोई इसमें गिर भी सकता है। अजरौंदा चौक पर फुटपाथ पर अवैध पार्किंग, स्लैब और अन्य सामान रखे होने से पैदल चलना मुश्किल हो गया है। वहीं बाटा मेट्रो स्टेशन के आसपास भी फुटपाथ की खराब स्थिति रोजाना हजारों यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है।
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मैं रोज नीलम-बाटा रोड से पैदल निकलता हूं। कई जगह फुटपाथ ही नहीं है, इसलिए सड़क पर चलना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने अधिकार दिया है तो अब प्रशासन को भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। विपिन सिंह
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अजरौंदा चौक पर फुटपाथ पर गाड़ियां खड़ी रहती हैं और जगह-जगह स्लैब रखे हैं। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यहां पैदल चलना बेहद कठिन है। दविंद्र सिंह
बाटा मेट्रो स्टेशन के पास रोज हजारों लोग उतरते हैं, लेकिन फुटपाथ टूटा हुआ है। थोड़ी सी लापरवाही बड़ा हादसा करा सकती है। महावीर
अगर पैदल चलना मौलिक अधिकार है तो शहर में हर सड़क पर सुरक्षित और बाधारहित फुटपाथ होना चाहिए। अभी हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। जगमोहन