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Faridabad News: पुलिस की लेट-लतीफी इस बार मददगार साबित हुई
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व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल में गिरफ्तार हुई डॉ. शाहीन का पासपोर्ट रिन्यू वेरिफिकेशन लेट-लतीफी के चलते ही रह गया
पुलिस तुरंत काम कर देती तो पासपोर्ट हो जाता रिन्यू
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। अक्सर कहा जाता है कि पुलिस कोई भी कार्रवाई करने में लेट-लतीफी करती है। लेकिन पुलिस की इस बार हुई लेट-लतीफी देश के लिए फायदेमंद साबित हुई है। फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से सामने आए व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल में गिरफ्तार की जा चुकी डॉ. शाहीन अपने यूनिवर्सिटी के पते के आधार पर पासपोर्ट रिन्यू कराना चाह रही थी। फरीदाबाद के धौज थाना पुलिस के पास अक्तूबर महीने के अंतिम सप्ताह में ये फाइल पहुंची। इसके लिए 3 नवंबर को धौज थाना से पुलिस की एक टीम यूनिवर्सिटी परिसर पहुंची भी। लेकिन यहां से आकर रिपोर्ट बनाकर सबमिट करने की बजाय फाइल को थाने में ही डाले रखा।
नियम के तहत पुलिस को वेरिफिकेशन करने के तुरंत बाद डॉ. शाहीन के पासपोर्ट रिन्यू फाइल की वेरिफिकेशन रिपोर्ट बनाकर वापस भेजी देनी थी। यदि 3 नवंबर के एक-दो दिन बाद ही पुलिस ये कर देती तो हो सकता है कि 11 नवंबर को उसकी गिरफ्तारी से पहले ही डॉ. शाहीन का पासपोर्ट रिन्यू होकर उसे मिल जाता। इसी दौरान 11 नवंबर को डॉ. शाहीन गिरफ्तार हुई तो पुलिस के भी होश उड़ गए और राहत की सांस ली, क्योंकि डॉ. शाहीन की पासपोर्ट रिन्यू वेरिफिकेशन की फाइल धौज थाना परिसर में ही पड़ी थी।
पुलिस अधिकारियों की मानें तो यदि रिपोर्ट तैयार भी की जाती तो हमारी ओर से उसमें यही लिखा जाता कि इनके मूल निवास स्थान लखनऊ से वेरिफिकेशन कराई जाए, ये स्थायी पता नहीं है। इसके साथ ही पुलिस अब डॉ. शाहीन के पासपोर्ट वेरिफिकेशन की फाइल को जांच एजेंसी को सौंप रही है ताकि वे पासपोर्ट रद्द कराने की कार्रवाई आगे कर सकें।
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यूनिवर्सिटी परिसर में पसरा सन्नाटा, छात्र हैं भविष्य को लेकर चिंतित
अल फलाह यूनिवर्सिटी परिसर में शनिवार को भी सन्नाटा पसरा रहा। यूनिवर्सिटी परिसर के एक छात्र ने बताया कि इस पूरे मामले से सब डरे हुए हैं। हर दिन पुलिस आकर लोगों से पूछताछ कर रही है। वे भी हैरान हैं कि उनके बीच रह रहे लोगों ने देश को दहलाने की साजिश रची और दिल्ली में जाकर धमाका भी कर दिया। शनिवार को जांच एजेंसियों की कोई टीम यूनिवर्सिटी परिसर में नहीं पहुंची। फरीदाबाद पुलिस की अपराध शाखा की एक टीम पहले की तरह अब भी यहां मौजूद है।
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पुलिस तुरंत काम कर देती तो पासपोर्ट हो जाता रिन्यू
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। अक्सर कहा जाता है कि पुलिस कोई भी कार्रवाई करने में लेट-लतीफी करती है। लेकिन पुलिस की इस बार हुई लेट-लतीफी देश के लिए फायदेमंद साबित हुई है। फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से सामने आए व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल में गिरफ्तार की जा चुकी डॉ. शाहीन अपने यूनिवर्सिटी के पते के आधार पर पासपोर्ट रिन्यू कराना चाह रही थी। फरीदाबाद के धौज थाना पुलिस के पास अक्तूबर महीने के अंतिम सप्ताह में ये फाइल पहुंची। इसके लिए 3 नवंबर को धौज थाना से पुलिस की एक टीम यूनिवर्सिटी परिसर पहुंची भी। लेकिन यहां से आकर रिपोर्ट बनाकर सबमिट करने की बजाय फाइल को थाने में ही डाले रखा।
नियम के तहत पुलिस को वेरिफिकेशन करने के तुरंत बाद डॉ. शाहीन के पासपोर्ट रिन्यू फाइल की वेरिफिकेशन रिपोर्ट बनाकर वापस भेजी देनी थी। यदि 3 नवंबर के एक-दो दिन बाद ही पुलिस ये कर देती तो हो सकता है कि 11 नवंबर को उसकी गिरफ्तारी से पहले ही डॉ. शाहीन का पासपोर्ट रिन्यू होकर उसे मिल जाता। इसी दौरान 11 नवंबर को डॉ. शाहीन गिरफ्तार हुई तो पुलिस के भी होश उड़ गए और राहत की सांस ली, क्योंकि डॉ. शाहीन की पासपोर्ट रिन्यू वेरिफिकेशन की फाइल धौज थाना परिसर में ही पड़ी थी।
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पुलिस अधिकारियों की मानें तो यदि रिपोर्ट तैयार भी की जाती तो हमारी ओर से उसमें यही लिखा जाता कि इनके मूल निवास स्थान लखनऊ से वेरिफिकेशन कराई जाए, ये स्थायी पता नहीं है। इसके साथ ही पुलिस अब डॉ. शाहीन के पासपोर्ट वेरिफिकेशन की फाइल को जांच एजेंसी को सौंप रही है ताकि वे पासपोर्ट रद्द कराने की कार्रवाई आगे कर सकें।
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यूनिवर्सिटी परिसर में पसरा सन्नाटा, छात्र हैं भविष्य को लेकर चिंतित
अल फलाह यूनिवर्सिटी परिसर में शनिवार को भी सन्नाटा पसरा रहा। यूनिवर्सिटी परिसर के एक छात्र ने बताया कि इस पूरे मामले से सब डरे हुए हैं। हर दिन पुलिस आकर लोगों से पूछताछ कर रही है। वे भी हैरान हैं कि उनके बीच रह रहे लोगों ने देश को दहलाने की साजिश रची और दिल्ली में जाकर धमाका भी कर दिया। शनिवार को जांच एजेंसियों की कोई टीम यूनिवर्सिटी परिसर में नहीं पहुंची। फरीदाबाद पुलिस की अपराध शाखा की एक टीम पहले की तरह अब भी यहां मौजूद है।