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रविवार रात को ही टूट गया था किसानों का हौंसला

Mon, 07 Dec 2020 10:50 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 07 Dec 2020 10:50 PM IST
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The intention to reach the goal was slow on Sunday night
फरीदाबाद (कैलाश गठवाल)। पलवल से तीन दिसंबर को कृषि कानूनों के विरोध में पैदल मार्च के लिए भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले निकले किसानों का बदरपुर बॉर्डर तक जाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। आंदोलन को सही दिशा न मिलना और कृषकों का दो धड़ों में बंट जाना इसका मुख्य कारण रहा। करीब 40 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर चुके किसान बड़खल चौक पर आकर थोड़ा सुस्त पड़ गए।
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दरअसल, किसानों का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने ग्यारह सदस्यों की जो कमेटी बनाई, उसमें सभी सदस्य पलवल से ही बना दिए गए। बल्लभगढ़ और फरीदाबाद के किसानों में अंदरखाने इस बात को लेकर रोष था। इसके अलावा समिति के सभी सदस्य एक ही जाति विशेष से थे, जिससे बाकी इलाके के किसान असहज महसूस करने लगे। किसानों के साथ चल रहे युवाओं ने जब देखा कि संगठन के पदाधिकारी आंदोलन को तेजी से आगे ले जाने की बजाय गिरफ्तारी देने की तरफ बात को आगे ला रहे हैं तो युवा वर्ग भी आंदोलन से हट गया।
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धीरे-धीरे वापस होने लगे थे किसान
किसानों को उम्मीद थी कि जब तक वे बॉर्डर के पास पहुंचेंगे, तब तक केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच कोई फैसला हो जाएगा और उनकी पैदल यात्रा सफल हो जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पांच दिन होने पर धीरे-धीरे किसानों की संख्या कम हो गई। भीड़ बढ़ाने के लिए किसान नेताओं ने फरीदाबाद और बल्लभगढ़ के साथियों से अपील करनी शुरू की लेकिन यहां से समिति में कोई पदाधिकारी शामिल नहीं करने के कारण भीड़ नहीं जुटी। रविवार रात को फरीदाबाद, बल्लभगढ़ के किसान व समर्थक अपने घरों की तरफ चले गए। पलवल के युवा पहले ही मध्यप्रदेश के किसान संगठनों में शामिल होने जा चुके थे। ऐसे में बॉर्डर पर जाने का ख्याल किसान नेता रात को ही त्याग चुके थे।
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पुलिस और किसानों के बीच चलता रहा आंख मिचौली का खेल
बड़खल चौक पर रात्रि ठहराव के बाद एकाएक किसान चले गए। उनके जाने के बाद पुलिस और किसानों के बीच आंख-मिचौली का खेल चलता दिखाई दिया। कभी किसानों के आने की सूचना होती तो कभी कहीं। दिनभर पुलिस किसानों के बारे में जानकारी जुटाती रही। दूसरी तरफ किसान इधर-उधर बैठकर अपने आकाओं के आदेश का इंतजार करते रहे। करीब तीन बजे किसान नेता बबलू हुड्डा दयालपुर व संदीप बहादरपुर अपने दो अन्य साथियों के साथ बड़खल पहुंचे, जिन्होंने यहां पत्रकारों व पुलिस अधिकारियों से बातचीत की।
पुलिस ने किया आराम
सोमवार को सराय टोल पर जब दोपहर 12 बजे तक किसान नहीं पहुंचे तो पुलिस नेे राहत की सांस ली और यहां एक पार्क में खाना खाकर आराम करते नजर आएं। देर शाम तक यहां पुलिस बल तैनात रहा।

सुरक्षा की दृष्टि से वाहनों की जांच
पुलिस ने शक के आधार पर गाड़ियों की जांच भी की, लेकिन किसी भी गाड़ी में किसानों की मौजूदगी का पता नहीं चला। देर शाम तक पुलिस वाहनों की जांच जारी रखी। पुलिस की जांच में पलवल नंबर की गाड़ियों के दो से अधिक सवारी वाले वाहनों पर रही।
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