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Faridabad News: बिजली की दर बढ़ने से उद्यमियों की चिंता बढ़ी
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निर्धारित मासिक शुल्क में 76 प्रतिशत की वृद्धि, व्यापार पर भी पड़ेगा असर
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। हरियाणा विद्युत नियामक आयोग की ओर से बिजली की दरों में बढ़ोतरी की गई है। इससे जिले के छोटे और मझोले उद्योगपतियों की चिंता बढ़ गई है। अब 11 किलोवाट की श्रेणी में आने वाले उपभोक्ताओं को 6.65 रुपये प्रति किलो वॉल्ट एम्पियर घंटा से बढ़ाकर 6.95 रुपये कर दिया गया है। वहीं, निर्धारित मासिक शुल्क में करीब 76 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है।
यानी 165 प्रति किलोवॉल्ट-एम्पियर से बढ़ाकर 290 प्रति कर दिया गया है। इससे औद्योगिक बिजली खपतकर्ताओं को प्रति महीने करीब 15,500 रुपये से 40,000 रुपये प्रति महीने तक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। इससे जिले के एमएसएमई (माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज) वर्ग को परेशानी झेलनी पड़ेगी। प्रदेश सकरार की ओर से अब इस श्रेणी में सब्सिडी में भी फेर बदल किया गया। इससे उद्योगपतियों को और बड़ा झटका लगा है। पहले तक इस दर में मिलने वाली छूट से छोटे उद्योगों को राहत मिलती थी, लेकिन अब सीधा असर उनके मासिक बिजली बिल पर पड़ेगा।
उद्योगपतियों का कहना है कि लघु उद्योग पहले से कच्चे माल की कीमतें, मजदूर, परिवहन और टैक्स के बढ़ते बोझ से जूझ रहे हैं। अब बिजली दरों में वृद्धि उनके लिए आर्थिक संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो गया है। जाजरू स्थित एक नामचीन उद्योगपति ने बताया कि कंपनी में प्रति महीने करीब 60-70 हजार रुपये का बिजली बिल भरते हैं। बढ़ोतरी के बाद बिजली बिल का खर्च 80-85 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। बिजली दर बढ़ने से हमारे उत्पाद की लागत बढ़ेगी, इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा।
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फरीदाबाद लघु उद्योग संघ के एक वरिष्ठ सदस्य का कहना है कि सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। छोटे उद्योग ही राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, अगर यह उद्योग बिजली के बढ़े दरों की वजह से बंद होते हैं तो रोजगार का संकट बढ़ जाएगा।
वहीं, एनआईटी एक स्थित बिजली विभाग के सीए गुलशन कुमार का कहना है कि बढ़ी हुई दरें नियामक आयोग की सिफारिशों के अनुरूप तय की गई हैं। इसका उद्देश्य राज्य की बिजली वितरण निगम को घाटे से उबारने में अहम भूमिका निभाएगा। उधर, उद्योगपतियों का कहना है कि राज्य की आर्थिक मजबूती तभी संभव है जब उत्पादन बढ़े और उद्योगों को बढ़ावा मिले।
वर्जन
बिजली की दर बढ़ने से छोटे व मझोले फैक्टरियों पर सीधा असर पड़ेगा। बिजली दर में वृद्धि होने से आर्थिक दर तो बढ़ेगा ही साथ में प्रतिस्पर्धात्मक पर भी सीधा असर पड़ेगा। - अशोक कुमार चौधरी, बल्लभगढ़, लघु उद्योग भारती प्रधान
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। हरियाणा विद्युत नियामक आयोग की ओर से बिजली की दरों में बढ़ोतरी की गई है। इससे जिले के छोटे और मझोले उद्योगपतियों की चिंता बढ़ गई है। अब 11 किलोवाट की श्रेणी में आने वाले उपभोक्ताओं को 6.65 रुपये प्रति किलो वॉल्ट एम्पियर घंटा से बढ़ाकर 6.95 रुपये कर दिया गया है। वहीं, निर्धारित मासिक शुल्क में करीब 76 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है।
यानी 165 प्रति किलोवॉल्ट-एम्पियर से बढ़ाकर 290 प्रति कर दिया गया है। इससे औद्योगिक बिजली खपतकर्ताओं को प्रति महीने करीब 15,500 रुपये से 40,000 रुपये प्रति महीने तक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। इससे जिले के एमएसएमई (माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज) वर्ग को परेशानी झेलनी पड़ेगी। प्रदेश सकरार की ओर से अब इस श्रेणी में सब्सिडी में भी फेर बदल किया गया। इससे उद्योगपतियों को और बड़ा झटका लगा है। पहले तक इस दर में मिलने वाली छूट से छोटे उद्योगों को राहत मिलती थी, लेकिन अब सीधा असर उनके मासिक बिजली बिल पर पड़ेगा।
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उद्योगपतियों का कहना है कि लघु उद्योग पहले से कच्चे माल की कीमतें, मजदूर, परिवहन और टैक्स के बढ़ते बोझ से जूझ रहे हैं। अब बिजली दरों में वृद्धि उनके लिए आर्थिक संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो गया है। जाजरू स्थित एक नामचीन उद्योगपति ने बताया कि कंपनी में प्रति महीने करीब 60-70 हजार रुपये का बिजली बिल भरते हैं। बढ़ोतरी के बाद बिजली बिल का खर्च 80-85 हजार रुपये तक पहुंच सकता है। बिजली दर बढ़ने से हमारे उत्पाद की लागत बढ़ेगी, इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा।
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फरीदाबाद लघु उद्योग संघ के एक वरिष्ठ सदस्य का कहना है कि सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए। छोटे उद्योग ही राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, अगर यह उद्योग बिजली के बढ़े दरों की वजह से बंद होते हैं तो रोजगार का संकट बढ़ जाएगा।
वहीं, एनआईटी एक स्थित बिजली विभाग के सीए गुलशन कुमार का कहना है कि बढ़ी हुई दरें नियामक आयोग की सिफारिशों के अनुरूप तय की गई हैं। इसका उद्देश्य राज्य की बिजली वितरण निगम को घाटे से उबारने में अहम भूमिका निभाएगा। उधर, उद्योगपतियों का कहना है कि राज्य की आर्थिक मजबूती तभी संभव है जब उत्पादन बढ़े और उद्योगों को बढ़ावा मिले।
वर्जन
बिजली की दर बढ़ने से छोटे व मझोले फैक्टरियों पर सीधा असर पड़ेगा। बिजली दर में वृद्धि होने से आर्थिक दर तो बढ़ेगा ही साथ में प्रतिस्पर्धात्मक पर भी सीधा असर पड़ेगा। - अशोक कुमार चौधरी, बल्लभगढ़, लघु उद्योग भारती प्रधान