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छात्रों की उकेरी रूस-यूक्रेन युद्ध की विभीषिका
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फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में मंगलवार को छोटी चौपाल पर 11 स्कूलों से आए 181 छात्रों ने रंगोंली प्रतियोगिता में भाग लिया। इस दौरान छात्रों ने रंगोंली के माध्यम से रूस-यूक्रेन युद्ध की त्रासदी को भी उकेरा। अपनी चित्रकारिता से छात्रों ने बताया कि दो देशों के बीच चल रहे युद्ध से आम लोगों को कितनी परेशानी उठानी पड़ रही है।
मेला प्रबंधन के अनुसार, रंगोंली प्रतियोगिता के अलावा चार स्कूलों से आए 47 छात्रों ने नृत्य कला का प्रदर्शन किया। कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने रंगों के माध्यम से पर्यटकों को कई संदेश दिए। स्कूली बच्चों ने छोटी चौपाल प्रांगण में अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले की पूरी तस्वीर रंगोंली के माध्यम से धरती पर उतार दी। इसमें मेले में लगे झूलों से लेकर विभिन्न स्टालों का प्रदर्शन भी दिखाया गया। जबकि दूसरी स्कूल की टीम ने यूक्रेन और रूसी सेना के बीच चल रहे युद्ध की विभीषिका को रंगोली के माध्यम से दिखाया है। इसमें लिखा है कि तीसरा विश्वयुद्ध नहीं, बातचीत ही समाधान। इसमें युद्ध के बाद होने वाली मानवीय त्रासदी को भी बखूबी दिखाया गया है।
छात्रों ने दी मनमोहक प्रस्तुति
मेले में मंगलवार को सांस्कृतिक एवं समाजोत्थान के विभिन्न आयाम देखने को मिले। छात्र-छात्राओं ने इससे संबंधित कई मनमोहक प्रस्तुतियां पेश की। शिक्षा विभाग व हरियाणा राज्य सेवा विधिक प्राधिकरण की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में छोटी चौपाल पर फरीदाबाद के मंचों पर प्रतिदिन संचालित की जा रही हैं। जिला शिक्षा अधिकारी रितू चौधरी व संयोजिका प्रधानाचार्य मंदीप कौर ने बताया कि मंगलवार को राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एनआईटी-दो की छात्राओं द्वारा लोक नृत्य, भरत नाट्यम व शिव तांडव प्रस्तुत किया गया। इसी विद्यालय के दूसरे समूह द्वारा लघु नागरिक दिव्यांग शिक्षा की उपयोगिता का बड़ा ही मार्मिक मंचन किया गया। इस नाटक के माध्यम से समाज को संदेश दिया गया कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं है।
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यूगांडा के स्टॉल पर खूब पहुंच रहे सैलानी
अखबारों से तैयार की गई ट्रे और यूगांडा की संस्कृति को दर्शाता मुखौटा मेले में आने वालों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यूगांडा देश से आए यूगांडा आर्ट एंड क्राफ्ट एसोसिएशन के सदस्य मेले में अपनी संस्कृति व वन्य जीवों से संबंधित शिल्पकला का सामान लेकर आए हैं। सूरजकुंड मेले में नेशनल आर्ट एंड कल्चर क्राफ्टस एसोसिएशन ऑफ यूगांडा की संस्कृति और वन्य जीवन को दर्शाते मनमोहक सजावटी व घरेलू उपयोग की वस्तुओं से भरपूर स्टॉल लोगों का मन मोह रही है। मेला परिसर के जोन पांच में स्टॉल नंबर 945 पर यूगांडा से आई एलीनडा जोसलीन ने बताया कि वे इस मेले में लगातार तीसरी बार आई हैं। उनकी स्टाल पर यूगांडा के वन्य जीवन से संबंधित अनेक प्रकार के सजावटी वस्तुएं हैं, जो लकड़ी, जूट इत्यादि से हाथों से तैयार की गई हैं।
उज्जबेकिस्तान के कपड़ों की हो रही तारीफ
बड़ी चौपाल के सामने मुख्य मार्ग पर कंट्री पार्टनर उज्जबेकिस्तान के सुई धागे से बनी कपड़ों पर की गई कारीगरी सैलानियों का मन मोह रही है। तासकंद की नीलोफर व गुलमीरा ने बताया कि वे उज्जबेकिस्तान के कपड़ों पर सुई धागे से कारीगरी के सामान को सूरजकुंड मेले में लाई हैं। इनमें मुख्यरूप से पर्श, लैपटाप बैग, टेबल कवर, तकिए के कवर, कुर्ते सहित अन्य घरेलू सामान हैं।
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मेला प्रबंधन के अनुसार, रंगोंली प्रतियोगिता के अलावा चार स्कूलों से आए 47 छात्रों ने नृत्य कला का प्रदर्शन किया। कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने रंगों के माध्यम से पर्यटकों को कई संदेश दिए। स्कूली बच्चों ने छोटी चौपाल प्रांगण में अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले की पूरी तस्वीर रंगोंली के माध्यम से धरती पर उतार दी। इसमें मेले में लगे झूलों से लेकर विभिन्न स्टालों का प्रदर्शन भी दिखाया गया। जबकि दूसरी स्कूल की टीम ने यूक्रेन और रूसी सेना के बीच चल रहे युद्ध की विभीषिका को रंगोली के माध्यम से दिखाया है। इसमें लिखा है कि तीसरा विश्वयुद्ध नहीं, बातचीत ही समाधान। इसमें युद्ध के बाद होने वाली मानवीय त्रासदी को भी बखूबी दिखाया गया है।
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छात्रों ने दी मनमोहक प्रस्तुति
मेले में मंगलवार को सांस्कृतिक एवं समाजोत्थान के विभिन्न आयाम देखने को मिले। छात्र-छात्राओं ने इससे संबंधित कई मनमोहक प्रस्तुतियां पेश की। शिक्षा विभाग व हरियाणा राज्य सेवा विधिक प्राधिकरण की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में छोटी चौपाल पर फरीदाबाद के मंचों पर प्रतिदिन संचालित की जा रही हैं। जिला शिक्षा अधिकारी रितू चौधरी व संयोजिका प्रधानाचार्य मंदीप कौर ने बताया कि मंगलवार को राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एनआईटी-दो की छात्राओं द्वारा लोक नृत्य, भरत नाट्यम व शिव तांडव प्रस्तुत किया गया। इसी विद्यालय के दूसरे समूह द्वारा लघु नागरिक दिव्यांग शिक्षा की उपयोगिता का बड़ा ही मार्मिक मंचन किया गया। इस नाटक के माध्यम से समाज को संदेश दिया गया कि दिव्यांगता कोई अभिशाप नहीं है।
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यूगांडा के स्टॉल पर खूब पहुंच रहे सैलानी
अखबारों से तैयार की गई ट्रे और यूगांडा की संस्कृति को दर्शाता मुखौटा मेले में आने वालों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। यूगांडा देश से आए यूगांडा आर्ट एंड क्राफ्ट एसोसिएशन के सदस्य मेले में अपनी संस्कृति व वन्य जीवों से संबंधित शिल्पकला का सामान लेकर आए हैं। सूरजकुंड मेले में नेशनल आर्ट एंड कल्चर क्राफ्टस एसोसिएशन ऑफ यूगांडा की संस्कृति और वन्य जीवन को दर्शाते मनमोहक सजावटी व घरेलू उपयोग की वस्तुओं से भरपूर स्टॉल लोगों का मन मोह रही है। मेला परिसर के जोन पांच में स्टॉल नंबर 945 पर यूगांडा से आई एलीनडा जोसलीन ने बताया कि वे इस मेले में लगातार तीसरी बार आई हैं। उनकी स्टाल पर यूगांडा के वन्य जीवन से संबंधित अनेक प्रकार के सजावटी वस्तुएं हैं, जो लकड़ी, जूट इत्यादि से हाथों से तैयार की गई हैं।
उज्जबेकिस्तान के कपड़ों की हो रही तारीफ
बड़ी चौपाल के सामने मुख्य मार्ग पर कंट्री पार्टनर उज्जबेकिस्तान के सुई धागे से बनी कपड़ों पर की गई कारीगरी सैलानियों का मन मोह रही है। तासकंद की नीलोफर व गुलमीरा ने बताया कि वे उज्जबेकिस्तान के कपड़ों पर सुई धागे से कारीगरी के सामान को सूरजकुंड मेले में लाई हैं। इनमें मुख्यरूप से पर्श, लैपटाप बैग, टेबल कवर, तकिए के कवर, कुर्ते सहित अन्य घरेलू सामान हैं।