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Faridabad News: यमुना के उफान ने तोड़ी किसानों की उम्मीदें

Wed, 27 Aug 2025 05:07 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 27 Aug 2025 05:07 PM IST
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The flood in Yamuna has destroyed the hopes of farmers
पहाड़ों की बारिश और यमुना का जलस्तर बढ़ने से फसलों के साथ किसानों की मेहनत भी डूबी
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समय पर बुवाई न होने से गेंहू की पैदावर पर भी पड़ेगा असर
1500 एकड़ जमीन पर मंडराया खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। यमुना नदी का बढ़ता जलस्तर और पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश ने जिले के किसानों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। नतीजन, खादर क्षेत्र के किसानों की हजारों एकड़ जमीन पर खड़ी धान, सब्जी और अन्य फसल पूरी तरह से जलमग्न होकर बर्बाद हो गई हैं। खरीफ की फसल बर्बाद होने के बाद अब रबी की फसल की बुवाई भी खतरे में पड़ गई है। खेतों में अभी तक पानी भरा हुआ है, जिससे गेंहू, चना और अन्य रबी फसलों की बुवाई समय पर नहीं हो पाएगी।
खासकर यमुना क्षेत्र के गांवों - थथंरी, बलई, मोहाली, हसनपुर, सतुआगढ़ी, लहरपुर, फाटनगर, सोरू का नांगला, काशीपुर अठवा, इंद्रानगर, गढ़ीपट्टी और गुरवाड़ी और उसके आसपास के इलाकों में स्थिति सबसे गंभीर बनी हुई है। यहां खेतों में जलभराव अभी भी जारी है और किसान खेतों में नहीं जा पा रहे हैं। जलभराव के कारण खेतों की नमी पर भी प्रभाव पड़ रहा है, जिससे आने वाली फसल पर सीधा असर पड़ने की आशंका है। इन गांवों की करीब 1500 एकड़ जमीन ऐसी है, जहां एक माह बाद गेहूं की बुवाई होगी
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हसनपुर क्षेत्र के करीब 2000 एकड़ फसल पहले ही नष्ट हो चुकी

हसनपुर क्षेत्र के गांव फाटनगर, बली मोहम्मदपुर, मुर्तजाबाद, बिलोचपुर, इंद्रानगर, काशीपुर, अच्छेजा और सोरू का नांगला समेत कई इलाकों की करीब 2000 एकड़ फसल पहले ही नष्ट हो चुकी है। सब्जियां, धान और अन्य फसलें पूरी तरह से बह गई हैं। किसान हाथ पर हाथ धरे खड़े हैं क्योंकि मेहनत और पूंजी एक ही झटके में पानी में बह गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला उपायुक्त डॉ. हरिश कुमार वशिष्ठ ने प्रशासन को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। नायब तहसीलदार मोहम्मद खान की अगुवाई में राजस्व विभाग की टीम लगातार प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही है। बिजली निगम के कर्मचारियों को भी ड्यूटी पर लगाया गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्टीमर और नावों की व्यवस्था की गई है, ताकि आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। यमुना बांध के अंदर खेतों में रह रहे किसानों व मजदूरों को बाहर निकालकर बिजली कनेक्शन काट दिए गए हैं।
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किसानों पर पड़ रही दोहरी मार

किसानों का कहना है कि उनकी जमीन और फसल दोनों संकट में हैं। अगर जल्द पानी कम नहीं हुआ तो अगली गेहूं की फसल की बुवाई असंभव हो जाएगी। वहीं, उपायुक्त डॉ. हरिश कुमार वशिष्ठ का कहना है कि सरकार प्रभावित किसानों की हर संभव मदद करेगी। उन्होंने बताया कि जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, वे ई-क्षति पोर्टल पर 31 अगस्त तक आवेदन कर सकते हैं। प्रशासन उनकी रिपोर्ट बनाकर मुआवजा सुनिश्चित करेगा। उनका कहना है कि यमुना का बढ़ता जलस्तर सिर्फ फसलों को ही नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका, गांव की अर्थव्यवस्था और पूरे क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है। हर सीजन में आने वाला यह संकट अब स्थायी समाधान की मांग करता है।
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कर्ज चुकाना मुश्किल है

पानी ने पूरी फसल बहा दी, अब गेहूं बोने की जमीन भी एक माह में मुश्किल सूखेगी। - धरमचंद किसान

किसानों की पूरे साल की मेहनत चौपट हो गई, अब कर्ज चुकाना मुश्किल है। -राज कुमार

पानी घटा नहीं तो अगली गेहूं की फसल भी हाथ से निकल जाएगी। -रामवीर

पानी जल्दी नहीं घटा तो करीब 1500 एकड़ जमीन पर गेहूं की बुवाई ही नहीं हो पाएगी। -महेंद्र सिंह चौहान
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किसान मोर्चा ने मांगा 50,000 प्रति एकड़
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। जिले के किसानों पर इस बार की भारी बारिश और लगातार जलभराव कहर बनकर टूटा है। दर्जनों गांवों में कपास, बाजरा, ज्वार, धान, मूंग और सब्जियों की फसलें चौपट हो गई है। किसानों का कहना है कि पहले ही महंगाई और खेती की लागत बढ़ने से उनकी कमर टूटी हुई थी, ऊपर से फसलें पूरी तरह डूब जाने से अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। गांवों के हालात इतने गंभीर हैं कि कई खेतों में लगातार वर्षों से पानी भराव की समस्या बनी हुई है। विशेषकर अलिका और कारना जैसे गांवों में किसानों की जमीन साल-दर-साल जलमग्न होती जा रही है। इसी तरह धतीर, घुघेरा, महेशपुर, मंडकोला, मंडोरी, मंढनाका, मठेपुर, छायंसा, सारौली, राखोता, रजौलाका, लालवा, यादूपुर, जनौली, मांदकौल, गहलब, फिरोजपुर राजपूत, रीनडका, मलोखरा, मीरपुर, कलसाडा, टीकरी ब्राह्मण, भमरोला, जैनपुर, रीवड, कानौली, जीता खेड़ली और जनाचौली जैसे गांव भी इस बार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
संयुक्त किसान मोर्चा पलवल के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को उपायुक्त हरीशचंद्र वशिष्ठ से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि जिले की करीब पांच हजार एकड़ जमीन पर प्रभावित फसलों की विशेष गिरदावरी कराई जाए और किसानों को 50,000 प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। प्रतिनिधिमंडल में किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, सोहनपाल चौहान, उदय सिंह सरपंच, धर्मचंद घुघेरा, रूपराम तेवतिया, ताराचंद प्रधान और हुकम सिंह चौहान शामिल रहे। ज्ञापन में शुगर मिल पलवल के निदेशक मंडल के चुनाव कराने और एजीएम बुलाने की मांग भी दोहराई गई।उपायुक्त वशिष्ठ ने किसानों को आश्वासन दिया कि प्रशासन पूरी गंभीरता से मामले को देख रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि विशेषकर अलिका और कारना गांवों के खेतों से तुरंत पानी निकासी की व्यवस्था की जाए। साथ ही किसानों से अपील की कि वे अपनी फसल को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ और ‘फसल क्षतिपूर्ति पोर्टल’ पर पंजीकृत कराएं ताकि नुकसान का सही आकलन कर मुआवजा दिलवाया जा सके।
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