{"_id":"68e2be8f69587c357e06f877","slug":"the-date-of-ultrasound-is-being-given-after-one-and-a-half-months-in-the-medical-college-faridabad-news-c-26-1-fbd1020-52881-2025-10-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: मेडिकल कॉलेज में डेढ़ महीने बाद की मिल रही अल्ट्रासाउंड की तारीख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: मेडिकल कॉलेज में डेढ़ महीने बाद की मिल रही अल्ट्रासाउंड की तारीख
विज्ञापन
मरीजों को करना पड़ रहा है परेशानी का सामना, निजी सेंटरों का कर रहे रुख
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। एनआईटी-3 नंबर स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए डेढ़ से दो महीने बाद का समय दिया जा रहा है। जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण कुछ मरीज निजी सेंटरों पर जाकर अल्ट्रासाउंड करवाकर उपचार ले रहे हैं।
अस्पताल में रोजाना करीब 3000 से अधिक मरीज आते हैं। जिनमें सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं व बुजुर्ग की होती है। उन मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बाद कई बार अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दी जाती है लेकिन अस्पताल में तीन रेडियोलॉजी होने के बावजूद मरीजों को डेढ़ से दो महीने बाद की तारीख दी जा रही है।
नवंबर में होंगे अल्ट्रासाउंड
एनआईटी एक नंबर की रहने वाली पूजा ने बताया कि वह शनिवार को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मेडिकल कॉलेज गई थी। उनके पेट में काफी समय से दर्द हो रहा था। जस पर महिला डॉक्टर ने जांच के बाद अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दी है। जब वह अल्ट्रासाउंड विभाग में पहुंची तो उनको बताया गया कि उनकी अल्ट्रासाउंड की तारीख 15 नवंबर की है। जिस पर महिला बिना अल्ट्रासाउंड करवाए बिना ही वापस चली गई। वहीं निशा ने बताया कि उनके पेट में इंफेक्शन होने की वजह से दर्द हो रहा है। वह काफी समय से दवा ले रही है लेकिन ठीक नहीं हुई। जिस पर डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा। अस्पताल में एक महीने बाद की तारीख दी गई तो उन्होंने निजी सेंटर पर जाकर अल्ट्रासाउंड करवाया। जिसके बाद डॉक्टर की ओर से उपचार शुरू किया गया।
विज्ञापन
4 मशीनें होने के बावजूद होती है परेशानी
अस्पताल परिसर के अंदर तीन मशीनें रेडियोलॉजी विभाग में और एक मशीन गायनी ओपीडी में लगी हुई है। रेडियोलॉजी विभाग में सामान्य मरीजों के अलावा भर्ती मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। वहीं गायनी ओपीडी में लगी मशीन में गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। डीन डॉ. चव्हाण कालिदास दत्तात्रेय ने बताया कि अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को जो परेशानी हो रही है उसके लिए योजना बनाई जा रही है ताकि मरीजों का जल्द से जल्द अल्ट्रासाउंड हो सकें।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। एनआईटी-3 नंबर स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए डेढ़ से दो महीने बाद का समय दिया जा रहा है। जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण कुछ मरीज निजी सेंटरों पर जाकर अल्ट्रासाउंड करवाकर उपचार ले रहे हैं।
अस्पताल में रोजाना करीब 3000 से अधिक मरीज आते हैं। जिनमें सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं व बुजुर्ग की होती है। उन मरीजों को डॉक्टर की सलाह के बाद कई बार अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दी जाती है लेकिन अस्पताल में तीन रेडियोलॉजी होने के बावजूद मरीजों को डेढ़ से दो महीने बाद की तारीख दी जा रही है।
विज्ञापन
नवंबर में होंगे अल्ट्रासाउंड
एनआईटी एक नंबर की रहने वाली पूजा ने बताया कि वह शनिवार को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मेडिकल कॉलेज गई थी। उनके पेट में काफी समय से दर्द हो रहा था। जस पर महिला डॉक्टर ने जांच के बाद अल्ट्रासाउंड करवाने की सलाह दी है। जब वह अल्ट्रासाउंड विभाग में पहुंची तो उनको बताया गया कि उनकी अल्ट्रासाउंड की तारीख 15 नवंबर की है। जिस पर महिला बिना अल्ट्रासाउंड करवाए बिना ही वापस चली गई। वहीं निशा ने बताया कि उनके पेट में इंफेक्शन होने की वजह से दर्द हो रहा है। वह काफी समय से दवा ले रही है लेकिन ठीक नहीं हुई। जिस पर डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा। अस्पताल में एक महीने बाद की तारीख दी गई तो उन्होंने निजी सेंटर पर जाकर अल्ट्रासाउंड करवाया। जिसके बाद डॉक्टर की ओर से उपचार शुरू किया गया।
विज्ञापन
4 मशीनें होने के बावजूद होती है परेशानी
अस्पताल परिसर के अंदर तीन मशीनें रेडियोलॉजी विभाग में और एक मशीन गायनी ओपीडी में लगी हुई है। रेडियोलॉजी विभाग में सामान्य मरीजों के अलावा भर्ती मरीजों के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। वहीं गायनी ओपीडी में लगी मशीन में गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। डीन डॉ. चव्हाण कालिदास दत्तात्रेय ने बताया कि अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को जो परेशानी हो रही है उसके लिए योजना बनाई जा रही है ताकि मरीजों का जल्द से जल्द अल्ट्रासाउंड हो सकें।