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Faridabad News: उप स्वास्थ्य केंद्र और स्टेडियम को बनाने के लिए निगम को नहीं मिल रहीं कंपनियां

Tue, 22 Sep 2026 01:09 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 01:09 AM IST
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The corporation is unable to find companies to construct the sub-health center and stadium.
गत वर्ष से कंपनी की तलाश में जुटा है नगर निगम प्रशासन
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नगर निगम प्रशासन नचौली गांव में स्टेडियम और नीमका उप स्वास्थ्य केंद्र बनाने की मंजूरी दे चुका है, लेकिन दोनों परियोजनाओं का काम शुरू करने के लिए नगर निगम प्रशासन को कंपनियां ही नहीं मिल रहीं है। विभाग गत वर्ष से ही कंपनियों की तलाश में जुटा हुआ है।
नगर निगम प्रशासन की ओर से वार्ड-44 के अंतर्गत नीमका गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए निगम प्रशासन ने 41.53 लाख रुपये का बजट मंजूर किया है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद गांव के लोगों को प्राथमिक स्तर की स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी। नगर निगम प्रशासन ने एक बार कंपनी का चयन करने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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इस उप स्वास्थ्य केंद्र के बनने से नीमका और आस-पास की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा। उधर, नगर निगम प्रशासन की ओर से ग्रेटर फरीदाबाद के नचौली गांव में सामुदायिक केंद्र और स्टेडियम विकसित करने के लिए भी कंपनी नहीं मिल पा रही है। निगम प्रशासन गत वर्ष से ही इस परियोजना के लिए कंपनी की तलाश में जुटा हुआ है। इसके लिए निगम की ओर से छह करोड़ 76 लाख रुपये का बजट मंजूर किया गया है।
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निगम की ओर से इस परियोजना के लिए एक बार 19 सितंबर को टेंडर लगाया गया है। पांच अक्तूबर को निविदाएं खोली जाएंगी। चयनित कंपनी को इस कार्य को एक वर्ष के अंदर पूरा करना होगा। नगर निगम के कार्यकारी अभियंंता अजय पंघाल ने बताया कि दोनों परियोजनाएं ग्रेटर फरीदाबाद के निवासियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन दोनों परियोजनाओं का काम शुरू करने के लिए फिर से टेंडर लगाकर कंपनियों की तलाश शुरू कर दी गई। उम्मीद है कि इस बार कंपनियां इन दोनों परियोजनाओं का काम करने के लिए रूचि लेंगी।

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भुगतान में देरी की वजह से बचती हैं कंपनियां
निगम सूत्रों का कहना है कि भुगतान में देरी की वजह से काफी कंपनियां निगम की परियोजना का काम लेने से बचती हैं। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद कंपनी संचालकों को भुगतान के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे कंपनियां संचालक परेशान होते हैं। कई बार अपनी अटकी राशि के लिए कंपनी संचालकों को सिफारिश भी करवानी पड़ती है।
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