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लोकल से ग्लोबल की अवधारणा हुई साकार : राज्यपाल

Sun, 15 Feb 2026 11:23 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 15 Feb 2026 11:23 PM IST
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The concept of local to global has come true: Governor
39वें सूरजकुंड मेले के भव्य समापन, 20 लाख लोगों ने किया मेले का भ्रमण
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सूरजकुंड मेला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन को जमीन पर उतारने वाला सशक्त और जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। यह आयोजन लोकल से ग्लोबल की अवधारणा को मूर्त रूप देने वाला है। यह बातें हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने 39वें सूरजकुंड मेले के भव्य समापन समारोह में कहीं।
राज्यपाल ने कहा कि पिछले पंद्रह दिनों में देश और विदेश से आए कारीगरों, बुनकरों और लोक कलाकारों ने अपने कौशल और रचनात्मकता से यह साबित किया है कि भारतीय शिल्प परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत और प्रभावशाली है। उनके अनुसार इस मंच ने स्थानीय शिल्पकारों को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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समापन समारोह से पूर्व राज्यपाल ने पर्यटन एवं सहकारिता मंत्री डा. अरविंद कुमार शर्मा, राजस्व मंत्री विपुल गोयल और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ मेले का अवलोकन किया। अपना घर परिसर में पारंपरिक हरियाणवी अंदाज में उनका स्वागत किया गया। इस दौरान विभिन्न राज्यों और देशों से आए शिल्पकारों को उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।
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राज्यपाल ने कहा कि यह मेला केवल व्यापार या प्रदर्शन का माध्यम नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भरता की सामूहिक अभिव्यक्ति है। विविधता में एकता का संदेश देने वाला यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक सहयोग को भी मजबूती देता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मिस्र ने चौथी बार पार्टनर नेशन के रूप में भागीदारी की जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध और प्रगाढ़ हुए।

इस बार थीम स्टेट उत्तर प्रदेश और मेघालय रहे जिन्होंने अपनी लोक परंपराओं, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को आकर्षित किया। आयोजन में 50 से अधिक देशों के करीब 800 कलाकारों और कारीगरों ने हिस्सा लिया जो मेले के बढ़ते वैश्विक महत्व को दर्शाता है।


लोकल उत्पादों को वैश्विक पहचान दिला रहा है मेला : अरविंद शर्मा

पर्यटन एवं सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि सूरजकुंड मेला भारत की सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। यहां प्रदर्शित हर कलाकृति अपने साथ किसी कारीगर की पीढ़ियों पुरानी परंपरा, मेहनत और सपनों की कहानी लेकर आती है। उन्होंने बताया कि शनिवार तक 17 लाख 88 हजार से अधिक लोग मेले का भ्रमण कर चुके थे जबकि रविवार को लगभग तीन लाख आगंतुक पहुंचे। इस तरह कुल संख्या 20 लाख के करीब पहुंच गई।


उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता, निर्यात संभावनाओं और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच से जोड़ने में यह मेला अहम कड़ी बन चुका है। सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कारीगरों को कौशल विकास, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिनका सकारात्मक असर यहां स्पष्ट दिखाई दिया। मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन और संस्कृति को रोजगार व आर्थिक विकास से जोड़ने की दिशा में लगातार काम कर रही है। सूरजकुंड मेला इसी सोच का प्रतीक है, जिसने फरीदाबाद को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्र पर अलग पहचान दिलाई है। समापन समारोह में पुलिस आयुक्त सतेंद्र कुमार गुप्ता, हरियाणा पर्यटन निगम के प्रबंध निदेशक पार्थ गुप्ता, उपायुक्त आयुष सिन्हा सहित अनेक अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
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