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Faridabad News: पांच माह की बच्ची की मौत का मामला सीएम तक पहुंचा, जांच की मांग तेज
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। डबुआ कॉलोनी निवासी जितेंद्र यादव और बबली देवी की पांच माह की बेटी की मौत का मामला अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तक पहुंच गया है। बच्ची की रविवार को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि समय पर उचित उपचार नहीं मिलने के कारण बच्ची की जान गई। मामले को लेकर सामाजिक संगठनों और प्रवासी संगठनों ने भी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं।
जानकारी के अनुसार बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर माता-पिता उसे पहले ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां से बच्ची को जिला नागरिक अस्पताल भेज दिया गया। नागरिक अस्पताल में हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही बच्ची की मौत हो गई।
मामले के बाद शहर के कई सामाजिक संगठन सक्रिय हो गए हैं। शहीद भगत सिंह सदन के अध्यक्ष सलीम अहमद, नवप्रयास सेवा संगठन के अध्यक्ष सुनील यादव और सदस्य इरफान अहमद ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. जयंत से मुलाकात कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग उठाई। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित इलाज मिलता तो बच्ची की जान बच सकती थी।
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वहीं प्रवासी कल्याण एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष संतोष यादव ने अपने साथियों के साथ ईएसआईसी अस्पताल प्रशासन से मुलाकात कर नाराजगी जताई। उन्होंने अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग करते हुए कहा कि गंभीर मरीजों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए।
ईएसआईसी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. संदीप कुमार ने बताया कि बच्ची का काफी देर तक इलाज किया गया था, लेकिन अस्पताल में वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे रेफर करना पड़ा।
इधर बच्ची के माता-पिता ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और जिला उपायुक्त को शिकायत पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
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फरीदाबाद। डबुआ कॉलोनी निवासी जितेंद्र यादव और बबली देवी की पांच माह की बेटी की मौत का मामला अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तक पहुंच गया है। बच्ची की रविवार को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों का आरोप है कि समय पर उचित उपचार नहीं मिलने के कारण बच्ची की जान गई। मामले को लेकर सामाजिक संगठनों और प्रवासी संगठनों ने भी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए हैं।
जानकारी के अनुसार बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर माता-पिता उसे पहले ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां से बच्ची को जिला नागरिक अस्पताल भेज दिया गया। नागरिक अस्पताल में हालत गंभीर होने पर उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही बच्ची की मौत हो गई।
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मामले के बाद शहर के कई सामाजिक संगठन सक्रिय हो गए हैं। शहीद भगत सिंह सदन के अध्यक्ष सलीम अहमद, नवप्रयास सेवा संगठन के अध्यक्ष सुनील यादव और सदस्य इरफान अहमद ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. जयंत से मुलाकात कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग उठाई। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित इलाज मिलता तो बच्ची की जान बच सकती थी।
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वहीं प्रवासी कल्याण एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष संतोष यादव ने अपने साथियों के साथ ईएसआईसी अस्पताल प्रशासन से मुलाकात कर नाराजगी जताई। उन्होंने अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग करते हुए कहा कि गंभीर मरीजों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए।
ईएसआईसी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. संदीप कुमार ने बताया कि बच्ची का काफी देर तक इलाज किया गया था, लेकिन अस्पताल में वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे रेफर करना पड़ा।
इधर बच्ची के माता-पिता ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और जिला उपायुक्त को शिकायत पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।