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Faridabad News: एक लड़की के दो जन्म प्रमाण पत्र का मामला पहुंचा डीसी दरबार
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-उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग को दिए प्रमाणपत्रों की जांच करने के निर्देश
-शिकायतकर्ता ने लगाया नाबालिग को बालिग दिखाने का आरोप
-पीड़िता का हुआ था अपहरण, स्वास्थ्यकर्मियों की मिलीभगत से बना नया प्रमाणपत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
पिनगवां। क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़की के दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने का आरोप लगा है। यह गंभीर मामला डीसी दरबार तक पहुंच गया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि लड़की को बालिग दिखाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों ने आरोपी पक्ष से सांठगांठ कर दूसरा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किया।
पीडित ने उपायुक्त को दी शिकायत में बताया कि 26 जनवरी को उसकी नाबालिग भतीजी का अपहरण हो गया था। इस संबंध में थाना पिनगवां में लिखित शिकायत दी गई थी, जिस पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर जब स्थानीय पुलिस ने लडकी का जन्म रिकॉर्ड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिनगवां से मांगा तो सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा दूसरा जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। पीड़ित के अनुसार, इस दूसरे प्रमाण पत्र में लडकी का जन्म वर्ष 2007 दर्शाया गया है, जिससे उसे बालिग साबित करने की कोशिश की गई। जबकि पीड़ित पक्ष के पास पहले से ही लडकी का जन्म प्रमाण पत्र मौजूद है, जिसमें उसकी जन्म तिथि 31 जुलाई 2008 दर्ज है, जो उसका सही जन्म प्रमाण पत्र है।
आरोप है कि जब उन्होंने वर्ष 2008 का जन्म रिकॉर्ड मांगा, तो अस्पताल कर्मचारियों ने उस रिकॉर्ड को गायब बताया। पीड़ित का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के लापरवाह कर्मचारियों ने आरोपी पक्ष को बचाने के उद्देश्य से जानबूझकर दूसरा जन्म प्रमाण पत्र जारी किया है, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। शिकायत मिलने के बाद उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के आदेश दिए हैं। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिनगवां के डॉक्टरों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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-शिकायतकर्ता ने लगाया नाबालिग को बालिग दिखाने का आरोप
-पीड़िता का हुआ था अपहरण, स्वास्थ्यकर्मियों की मिलीभगत से बना नया प्रमाणपत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
पिनगवां। क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़की के दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने का आरोप लगा है। यह गंभीर मामला डीसी दरबार तक पहुंच गया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि लड़की को बालिग दिखाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों ने आरोपी पक्ष से सांठगांठ कर दूसरा फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किया।
पीडित ने उपायुक्त को दी शिकायत में बताया कि 26 जनवरी को उसकी नाबालिग भतीजी का अपहरण हो गया था। इस संबंध में थाना पिनगवां में लिखित शिकायत दी गई थी, जिस पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। बाद में हाईकोर्ट के निर्देश पर जब स्थानीय पुलिस ने लडकी का जन्म रिकॉर्ड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिनगवां से मांगा तो सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा दूसरा जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। पीड़ित के अनुसार, इस दूसरे प्रमाण पत्र में लडकी का जन्म वर्ष 2007 दर्शाया गया है, जिससे उसे बालिग साबित करने की कोशिश की गई। जबकि पीड़ित पक्ष के पास पहले से ही लडकी का जन्म प्रमाण पत्र मौजूद है, जिसमें उसकी जन्म तिथि 31 जुलाई 2008 दर्ज है, जो उसका सही जन्म प्रमाण पत्र है।
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आरोप है कि जब उन्होंने वर्ष 2008 का जन्म रिकॉर्ड मांगा, तो अस्पताल कर्मचारियों ने उस रिकॉर्ड को गायब बताया। पीड़ित का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के लापरवाह कर्मचारियों ने आरोपी पक्ष को बचाने के उद्देश्य से जानबूझकर दूसरा जन्म प्रमाण पत्र जारी किया है, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। शिकायत मिलने के बाद उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के आदेश दिए हैं। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिनगवां के डॉक्टरों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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