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शुक्र है गर्मी की छुट्टियां थीं
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फरीदाबाद डबुआ कालोनी एएनडी कान्वेंट स्कूल में लगी आग ।
- फोटो : Faridabad
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अमित भाटिया
फरीदाबाद। शुक्र है कि गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं, अगर स्कूल खुला होता तो हादसा कितना बड़ा होता, इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। गारमेंट शोरूम के ऊपर चल रहे स्कूल में आने जाने के लिए एक संकरी सीढ़ी है। ऐसे में बच्चों को वहां से निकालना भी मुश्किल हो जाता। शिक्षा विभाग ने इस तरह बिना मानकों के स्कूल संचालित करने की जांच की बात कही है।
डबुआ कॉलोनी 33 फुट रोड पर जिस गारमेंट शोरूम में आग लगी, उसके ऊपर ही एएनडी कॉन्वेंट स्कूल की प्राइमरी विंग का संचालन हो रहा था। भवन के ग्राउंड फ्लोर पर तीन तीन शट लगे हुए हैं। इनमें दो शटर तो शोरूम के हैं और एक अन्य दुकान का है। उसके साथ से छोटा सा गेट लगा हुआ है, जिससे सीढ़ियां ऊपर जा रही हैं।
स्कूल में आने जाने के लिए केवल वही एक रास्ता है। ऐसे में यदि स्कूल चल रहा होता तो हादसे काफी भयावह होता। रास्ता संकरा और एक ही होने के कारण आग लगने पर बच्चों को वहां से निकालने में काफी परेशानी होती। मौके पर मौजूद लोग भी भगवान का शुक्र अदा कर रहे थे कि स्कूल की छुट्टियां चल रही हैं नहीं तो बच्चों को निकालना मुश्किल हो जाता। शिक्षा विभाग ने भी कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया। अब विभाग इसकी जांच करवाने की बात कह रहा है।
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सूरत हादसे से भी नहीं लिया सबक
सूरत में पिछले दिनों एक कोचिंग सेंटर में लगी आग से 20 से अधिक छात्रों की मौत हो गई थी। सूरत की घटना से हर कोई स्तब्ध था। उस हादसे के बाद प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन ने यहां भी कोचिंग सेंटरों की जांच की बात कही थी। इसके बावजूद किसी ने शहर में इस तरह तंग गलियों और नियम कायदों की अवहेलना करके चल रहे स्कूलों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। यदि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इनकी भी जांच करवाता तो शायद इस हादसे को टाला जा सकता था।
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फरीदाबाद। शुक्र है कि गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं, अगर स्कूल खुला होता तो हादसा कितना बड़ा होता, इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। गारमेंट शोरूम के ऊपर चल रहे स्कूल में आने जाने के लिए एक संकरी सीढ़ी है। ऐसे में बच्चों को वहां से निकालना भी मुश्किल हो जाता। शिक्षा विभाग ने इस तरह बिना मानकों के स्कूल संचालित करने की जांच की बात कही है।
डबुआ कॉलोनी 33 फुट रोड पर जिस गारमेंट शोरूम में आग लगी, उसके ऊपर ही एएनडी कॉन्वेंट स्कूल की प्राइमरी विंग का संचालन हो रहा था। भवन के ग्राउंड फ्लोर पर तीन तीन शट लगे हुए हैं। इनमें दो शटर तो शोरूम के हैं और एक अन्य दुकान का है। उसके साथ से छोटा सा गेट लगा हुआ है, जिससे सीढ़ियां ऊपर जा रही हैं।
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स्कूल में आने जाने के लिए केवल वही एक रास्ता है। ऐसे में यदि स्कूल चल रहा होता तो हादसे काफी भयावह होता। रास्ता संकरा और एक ही होने के कारण आग लगने पर बच्चों को वहां से निकालने में काफी परेशानी होती। मौके पर मौजूद लोग भी भगवान का शुक्र अदा कर रहे थे कि स्कूल की छुट्टियां चल रही हैं नहीं तो बच्चों को निकालना मुश्किल हो जाता। शिक्षा विभाग ने भी कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया। अब विभाग इसकी जांच करवाने की बात कह रहा है।
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सूरत हादसे से भी नहीं लिया सबक
सूरत में पिछले दिनों एक कोचिंग सेंटर में लगी आग से 20 से अधिक छात्रों की मौत हो गई थी। सूरत की घटना से हर कोई स्तब्ध था। उस हादसे के बाद प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन ने यहां भी कोचिंग सेंटरों की जांच की बात कही थी। इसके बावजूद किसी ने शहर में इस तरह तंग गलियों और नियम कायदों की अवहेलना करके चल रहे स्कूलों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। यदि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इनकी भी जांच करवाता तो शायद इस हादसे को टाला जा सकता था।