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Faridabad News: मास्टर ट्रेनर्स के रूप में अध्यापकों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिले के राजकीय विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के तहत अध्यापकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक खंड से 4-5 अध्यापकों का चयन कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड डे मील में स्वच्छता और पोषण के मानकों को बेहतर बनाना है।
शिक्षा विभाग के अनुसार जिले के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में मिड डे मील योजना के तहत कुक कम हेल्पर पहले से ही कार्यरत हैं। इन कुक कम हेल्पर को समय-समय पर प्रशिक्षण देना जरूरी होता है, ताकि भोजन की गुणवत्ता बनी रहे।
प्रशिक्षण प्राप्त अध्यापक कुक कम हेल्पर को भोजन बनाने की सही विधि, साफ-सफाई के नियम और पोषण से जुड़ी जरूरी जानकारी देंगे। साथ ही वे यह भी सुनिश्चित करेंगे कि भोजन तय मानकों के अनुसार ही तैयार हो। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से मिड डे मील योजना की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को बेहतर व सुरक्षित भोजन मिल सकेगा। इससे बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
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विद्यालयों में दिए जाने वाले मिड डे मील की गुणवत्ता को जांचने के लिए अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि छात्रों के स्वास्थ्य से कोई खिलवाड़ न हो। -सतीश, खंड शिक्षा अधिकारी, बल्लभगढ़
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फरीदाबाद। जिले के राजकीय विद्यालयों में पीएम पोषण योजना के तहत अध्यापकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक खंड से 4-5 अध्यापकों का चयन कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड डे मील में स्वच्छता और पोषण के मानकों को बेहतर बनाना है।
शिक्षा विभाग के अनुसार जिले के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में मिड डे मील योजना के तहत कुक कम हेल्पर पहले से ही कार्यरत हैं। इन कुक कम हेल्पर को समय-समय पर प्रशिक्षण देना जरूरी होता है, ताकि भोजन की गुणवत्ता बनी रहे।
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प्रशिक्षण प्राप्त अध्यापक कुक कम हेल्पर को भोजन बनाने की सही विधि, साफ-सफाई के नियम और पोषण से जुड़ी जरूरी जानकारी देंगे। साथ ही वे यह भी सुनिश्चित करेंगे कि भोजन तय मानकों के अनुसार ही तैयार हो। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस पहल से मिड डे मील योजना की गुणवत्ता में सुधार होगा और छात्रों को बेहतर व सुरक्षित भोजन मिल सकेगा। इससे बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
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विद्यालयों में दिए जाने वाले मिड डे मील की गुणवत्ता को जांचने के लिए अध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि छात्रों के स्वास्थ्य से कोई खिलवाड़ न हो। -सतीश, खंड शिक्षा अधिकारी, बल्लभगढ़