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Faridabad News: शुगर मिल के संचालन में देरी से गन्ना किसान बेहाल

Sun, 09 Nov 2025 12:27 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 09 Nov 2025 12:27 AM IST
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Sugarcane farmers suffer due to delay in operation of sugar mill
गेहूं की बिजाई पर संकट, 12 नवंबर से आंदोलन की चेतावनी
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मिल की देर से शुरुआत से किसानों को लाखों का नुकसान होने की आशंका

सचिन कुमार
पलवल। जिले के गन्ना किसानों के लिए इस वर्ष एक बार फिर मुश्किलों का दौर शुरू हो गया है। शुगर मिल के संचालन में हो रही देरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस समय गन्ने का भाव 400 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है, जबकि अक्तूबर-नवंबर का समय गेहूं की बिजाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है लेकिन मिल बंद रहने के कारण किसान गन्ना नहीं काट पा रहे हैं, जिससे उनकी अगली फसल पर भी संकट गहराने लगा है। संयुक्त किसान मोर्चा पलवल के प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी है कि यदि 10 नवंबर तक मिल का संचालन शुरू नहीं हुआ तो 12 नवंबर से शुगर मिल पलवल पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
गन्ने की फसल आम तौर पर नौ माह में तैयार हो जाती है। यदि मिल समय पर चालू होती, तो किसान अपनी लगभग 40 प्रतिशत भूमि गेहूं की बिजाई के लिए खाली कर पाते। जिले में ज्यादातर किसान पट्टे (लीज) पर खेती करते हैं। एक एकड़ भूमि का पट्टा 50 से 65 हजार रुपये तक है। एक एकड़ में गन्ना उगाने में करीब 50 हजार रुपये का खर्च आता है, जिससे पट्टे की जमीन पर कुल लागत 1.25 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। ऐसे में हर दिन की देरी किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है।
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पिछले साल पलवल की शुगर मिल में करीब 21 लाख क्विंटल गन्ना आया था, जबकि इस बार 5 लाख क्विंटल अधिक गन्ने की संभावना जताई जा रही है। अगर मिल जल्द शुरू नहीं हुई तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। जिले के करीब 20 हजार गन्ना किसान इस देरी से सीधे प्रभावित हो रहे हैं।
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मिल बंद रहने से घटेगा गन्ने का वजन और बढ़ेगी लागत
किसानों का कहना है कि अगर मिल अप्रैल तक चली तो खेतों में खड़ा गन्ना धीरे-धीरे अपना वजन खो देगा, जिससे उपज कम हो जाएगी और भुगतान भी घट जाएगा। देरी होने से मजदूरों की मजदूरी दर 60 रुपये से बढ़कर 100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच जाएगी। इससे खेती की लागत और बढ़ेगी। अप्रैल तक गन्ने की शर्करा (चीनी) मात्रा भी घट जाती है, जिससे चीनी की रिकवरी में कमी आती है। इसका असर न केवल किसानों की आमदनी पर पड़ेगा, बल्कि शुगर मिल की उत्पादन क्षमता और मुनाफे पर भी पड़ेगा। किसानों का यह भी कहना है कि जब मिल देर से शुरू होती है तो गेहूं की बिजाई का समय निकल जाता है। दूसरी ओर, फसल कटाई के समय मजदूरों की कमी भी रहती है क्योंकि वे गेहूं की कटाई में लग जाते हैं।

बाढ़ और जलभराव से पहले ही आधी फसल बर्बाद
इस वर्ष पलवल जिले की लगभग 1.25 लाख एकड़ फसल बाढ़ और जलभराव से प्रभावित हुई है, जो कुल फसल का करीब 52 प्रतिशत हिस्सा है। भारी बारिश के कारण करीब 40 हजार एकड़ भूमि में बिजाई नहीं हो सकी। अब मिल की देरी के चलते किसानों की करीब 40 प्रतिशत जमीन पर गेहूं की बिजाई भी रुक सकती है। किसानों का कहना है कि यह दोहरा झटका है। एक ओर प्राकृतिक आपदा, दूसरी ओर प्रशासनिक लापरवाही।


किसानों की दो बार अपील, फिर भी नहीं शुरू हुई मिल
आमतौर पर शुगर मिल अक्तूबर से मार्च तक संचालित होती है और किसानों को पर्ची के माध्यम से गन्ना देने का समय तय किया जाता है। इस बार किसानों ने जुलाई में ही शुगर मिल के प्रबंध निदेशक को 25 अक्तूबर तक मिल शुरू करने का मांग पत्र सौंपा था। अक्तूबर में दोबारा आग्रह किया गया। संयुक्त किसान मोर्चा पलवल के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को अतिरिक्त उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर 10 नवंबर तक शुगर मिल चालू करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 10 नवंबर तक मिल का संचालन शुरू नहीं हुआ तो 12 नवंबर से शुगर मिल पलवल पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा। प्रतिनिधि मंडल में मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, धर्मचंद घुघेरा, उदय सिंह सरपंच, रूपराम तेवतिया और ताराचंद प्रधान शामिल थे। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों से किसानों को हर बार यही समस्या झेलनी पड़ रही है। सितंबर और अक्तूबर में दो दौर की बैठक के बावजूद मिल प्रबंधन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। किसानों ने जलभराव से नष्ट हुई फसलों का मुआवजा देने की भी मांग रखी। ज्ञापन सौंपने के दौरान बाबू डायरेक्टर, गिर्राज शर्मा, विजय रावत, मनवीर, धर्मेंद्र मानपुर, उदय चंद डायरेक्टर, सूबे कौंडल, लाला डायरेक्टर, वीरेंद्र चौहान, सुरेंद्र चौहान और सिकंदर कौंडल समेत कई प्रमुख किसान मौजूद रहे।
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