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Faridabad News: लावारिस पशु सड़काें पर, पकड़ने वाली गाड़ियां यार्ड में

Thu, 10 Sep 2026 12:41 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:41 AM IST
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Stray animals on the streets; animal-catching vehicles in the yard.
चालकों के अभाव में दम तोड़ रही है पशुओं को पकड़ने की व्यवस्था
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4 गाड़ी खड़ी हैं नगर निगम के यार्ड में
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर की सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए नगर निगम की ओर से की गई व्यवस्था चालकों के अभाव में दम तोड़ रही है। करीब छह माह पहले नगर निगम प्रशासन ने पशुओं को पकड़ने के लिए पांच नई गाड़ियां खरीदी थीं, लेकिन इन वाहनों को चलाने के लिए पर्याप्त चालक नहीं होने के कारण चार गाड़ियां निगम के यार्ड में खड़ी धूल फांक रही हैं। ऐसे में लावारिस पशुओं को पकड़ने का अभियान प्रभावित हो रहा है।
मौजूदा समय में नगर निगम के पास पशुओं को पकड़ने के लिए मात्र तीन गाड़ियां ही संचालित हो रही हैं। इनमें एक नई और दो पुरानी हैं। मौजूदा समय में हड़ताल की वजह से भी पशु पकड़ने का काम प्रभावित हो रहा है। शहर का क्षेत्रफल लगातार बढ़ने और अलग-अलग इलाकों में सड़कों पर बड़ी संख्या में पशुओं के घूमने के कारण इन तीन गाड़ियों से काम चलाना मुश्किल हो रहा है। अधिकारियों के सामने एक साथ कई क्षेत्रों में शिकायत मिलने पर कार्रवाई करने की चुनौती बनी रहती है। नगर निगम के पास शहर में घूम रहे लावारिस पशुओं की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। हालांकि, निगम से जुड़े अधिकारियों और उपलब्ध स्थानीय आंकड़ों के आधार पर अनुमान है कि करीब 10 हजार लावारिस पशु शहर की सड़कों पर घूम रहे हैं।
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यातायात व्यवस्था के लिए लावारिस पशु बने चुनौती
सड़कों पर बैठे और घूमते पशु यातायात व्यवस्था के लिए भी परेशानी का कारण बन रहे हैं। विशेषकर रात के समय वाहन चालकों को इनसे टकराने का खतरा बना रहता है। कई प्रमुख सड़कों और रिहायशी क्षेत्रों में पशुओं के झुंड दिखाई देते हैं। कई बार पशुओं के हमले में लोग घायल भी हो चुके हैं। नगर निगम की ओर से पशुओं को पकड़ने के लिए गाड़ियों की व्यवस्था किए जाने के बावजूद उनका उपयोग नहीं हो पाना व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। यदि सभी गाड़ियों के लिए चालक उपलब्ध हो जाएं तो पशु पकड़ने के अभियान को गति मिल सकती है और शहरवासियों को सड़कों पर घूमते लावारिस पशुओं से काफी हद तक राहत मिलेगी। उधर, निगम के व्हीकल इंस्पेक्टर परसराम अधाना ने बताया कि चालकों की कमी को दूर करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द मंजूरी मिलेगी।
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लावारिस पशुओं की वजह से हुए हादसे
24 अप्रैल 2026: बाजार जा रही महिला और उनकी दो बेटियां आवारा पशुओं की चपेट में आकर घायल।
6 अगस्त 2026: सेक्टर-18 ओल्ड रोड पर सड़क पर बैठी गायों से ट्रक टकराया।
12 अगस्त 2026: स्कूटी सवार कारोबारी की सड़क पर बैठी गाय से टक्कर में मौत।
6 अगस्त 2025: दयालबाग में गोवंश से बचने के दौरान महिला को कार ने मारी टक्कर।
2 अगस्त 2024: भारत कॉलोनी में सांड की टक्कर से प्रॉपर्टी डीलर की मौत।
7 अप्रैल 2024: सेक्टर-3 में गोवंश की चपेट में आने से मां-बेटा घायल।
5 अप्रैल 2024: सेक्टर-3 में गोवंश की चपेट में आने से बुजुर्ग घायल।
1 नवंबर 2021: खेड़ी गांव में गोवंश की चपेट में आने से बुजुर्ग महिला की मौत।
13 अगस्त 2017: फरीदपुर-खेड़ी कलां रोड पर गोवंश की चपेट में आने से युवक की मौत।
13 अगस्त 2017: फरीदाबाद-गुरुग्राम मार्ग पर सांड की टक्कर से युवक की मौत।
20 मई 2017: बड़खल में सांड की टक्कर से सैनिक कॉलोनी निवासी महिला की मौत।
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गोशालाओं में क्षमता से अधिक पशु
मवई, ऊंचागांव और गोपाल गोशालाएं अपनी क्षमता से अधिक भर चुकी हैं। इनमें नए पशुओं को रखने की जगह नहीं बची है। इसके चलते नगर निगम सड़कों से पकड़े गए पशुओं को नूंह जिले की बड़ी गोशालाओं में भेज रहा है। वहीं भूपानी क्षेत्र में नई गोशाला बनाने का काम चल रहा है।
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