{"_id":"6ababa199b860a65d50128d9","slug":"sdrf-center-not-set-up-in-faridabad-despite-accidents-people-are-losing-their-lives-faridabad-news-c-26-1-fbd1023-81238-2026-09-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: हादसों के बाद भी फरीदाबाद में नहीं बना एसडीआरएफ केंद्र, जान गंवा रहे लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: हादसों के बाद भी फरीदाबाद में नहीं बना एसडीआरएफ केंद्र, जान गंवा रहे लोग
विज्ञापन
औद्योगिक शहर के लिए गठित एसडीआरएफ का केंद्र नूंह में होने के कारण आपात स्थिति में पहुंचने में लगते हैं दो घंटे
केशव भारद्वाज
फरीदाबाद। औद्योगिक शहर फरीदाबाद में आपदा से निपटने के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। फरीदाबाद के साथ-साथ पलवल के लिए गठित दस्ते का कार्यालय नूंह के टूंडलाका गांव में है जिससे वहां से टीम को आने में दो घंटे लगते हैं। यहां लगातार हो रहे हादसों के बावजूद प्रदेश सरकार यहां पर एसडीआरएफ का केंद्र नहीं बना पा रही है।
टूंडलाका से फरीदाबाद जिला मुख्यालय की दूरी करीब 50 किलोमीटर है। ऐसे में जिले में अचानक कोई बड़ी आपदा आने पर टीम को मौके तक पहुंचने में समय लग जाता है। कई बार गुरुग्राम के भौंडसी स्थित एसडीआरएफ केंद्र से भी टीम को फरीदाबाद बुलाना पड़ता है। वहीं एनडीआरएफ के लिहाज से हरियाणा का जोन बठिंडा है, जबकि एनडीआरएफ की टीम ने अपना कार्यालय रोहतक में बनाया हुआ है। रोहतक भी फरीदाबाद से काफी दूर है। हाल ही में सिही गांव में बोरवेल में बच्ची के गिरने की घटना के दौरान जिला प्रशासन को एनडीआरएफ गाजियाबाद और दिल्ली द्वारका तथा दिल्ली कैंट स्थित सेना की टीम से मदद मांगनी पड़ी। गाजियाबाद एनडीआरएफ और दिल्ली कैंट से सेना की टीम मौके पर पहुंची थी।
हादसों के बाद परिजन करते हैं एसडीआरएफ की मांग
फरीदाबाद में नहरों में लोगों के छलांग लगाने या डूबने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। हादसे के बाद परिजन अक्सर एसडीआरएफ की टीम बुलाने की मांग करते हैं। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित बचाव दल और विशेषज्ञ संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण बाहरी टीम पर निर्भरता रहती है। कई मामलों में टीम के पहुंचने तक डूबे व्यक्ति की मौत हो जाती है। फरीदाबाद में एसडीआरएफ केंद्र बनाने का प्रस्ताव जिला प्रशासन की ओर से रखा गया था, लेकिन यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। इसका खामियाजा आपदा की स्थिति में लोगों को उठाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
यह नाम मात्र की आपदा प्रबंधन की व्यवस्था
जिले में आपदा प्रबंधन के नाम पर करीब 300 आपदा मित्र हैं। इसके अलावा होमगार्ड, रेडक्रॉस सोसाइटी, एनसीसी और स्काउट एंड गाइड से जुड़े स्वयंसेवक उपलब्ध हैं। हालांकि, एसडीआरएफ या एनडीआरएफ की तरह विशेषज्ञ बचाव कार्य के लिए कोई स्थायी केंद्र और टीम जिले में नहीं है।
अग्निशमन विभाग के पास नहीं बहुमंजिला इमारतों में आग बुझाने वाला प्लेटफॉर्म
शहर में करीब 100 बहुमंजिला सोसाइटी हैं। यहां 30 मंजिल से ऊंची सोसाइटी भी हैं। इसके बावजूद यहां पर अग्निशमन विभाग के पास आग बुझाने के लिए प्लेटफॉर्म नहीं है। यदि कभी भीषण आग लगेगी तो इस पर काबू पाना आसान नहीं होगा। प्लेटफॉर्म गाड़ी की व्यवस्था के लिए ग्रेटर फरीदाबाद की आरडब्ल्यूए काफी मुखर रही हैं। इसके बावजूद यहां पर अब तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है।
फरीदाबाद के लिए गठित एसडीआरएफ का केंद्र नूंह के टूंडलाका में है। एसडीआरएफ के साथ यहां पर केंद्र बनाने पर भी चर्चा हुई थी। अभी तक यहां पर केंद्र नहीं बनाया जा सका है
- गुरुकर्ण, परियोजना अधिकारी, जिला आपदा प्रबंधन विभाग
विज्ञापन
केशव भारद्वाज
फरीदाबाद। औद्योगिक शहर फरीदाबाद में आपदा से निपटने के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। फरीदाबाद के साथ-साथ पलवल के लिए गठित दस्ते का कार्यालय नूंह के टूंडलाका गांव में है जिससे वहां से टीम को आने में दो घंटे लगते हैं। यहां लगातार हो रहे हादसों के बावजूद प्रदेश सरकार यहां पर एसडीआरएफ का केंद्र नहीं बना पा रही है।
टूंडलाका से फरीदाबाद जिला मुख्यालय की दूरी करीब 50 किलोमीटर है। ऐसे में जिले में अचानक कोई बड़ी आपदा आने पर टीम को मौके तक पहुंचने में समय लग जाता है। कई बार गुरुग्राम के भौंडसी स्थित एसडीआरएफ केंद्र से भी टीम को फरीदाबाद बुलाना पड़ता है। वहीं एनडीआरएफ के लिहाज से हरियाणा का जोन बठिंडा है, जबकि एनडीआरएफ की टीम ने अपना कार्यालय रोहतक में बनाया हुआ है। रोहतक भी फरीदाबाद से काफी दूर है। हाल ही में सिही गांव में बोरवेल में बच्ची के गिरने की घटना के दौरान जिला प्रशासन को एनडीआरएफ गाजियाबाद और दिल्ली द्वारका तथा दिल्ली कैंट स्थित सेना की टीम से मदद मांगनी पड़ी। गाजियाबाद एनडीआरएफ और दिल्ली कैंट से सेना की टीम मौके पर पहुंची थी।
विज्ञापन
हादसों के बाद परिजन करते हैं एसडीआरएफ की मांग
फरीदाबाद में नहरों में लोगों के छलांग लगाने या डूबने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। हादसे के बाद परिजन अक्सर एसडीआरएफ की टीम बुलाने की मांग करते हैं। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित बचाव दल और विशेषज्ञ संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण बाहरी टीम पर निर्भरता रहती है। कई मामलों में टीम के पहुंचने तक डूबे व्यक्ति की मौत हो जाती है। फरीदाबाद में एसडीआरएफ केंद्र बनाने का प्रस्ताव जिला प्रशासन की ओर से रखा गया था, लेकिन यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। इसका खामियाजा आपदा की स्थिति में लोगों को उठाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
यह नाम मात्र की आपदा प्रबंधन की व्यवस्था
जिले में आपदा प्रबंधन के नाम पर करीब 300 आपदा मित्र हैं। इसके अलावा होमगार्ड, रेडक्रॉस सोसाइटी, एनसीसी और स्काउट एंड गाइड से जुड़े स्वयंसेवक उपलब्ध हैं। हालांकि, एसडीआरएफ या एनडीआरएफ की तरह विशेषज्ञ बचाव कार्य के लिए कोई स्थायी केंद्र और टीम जिले में नहीं है।
अग्निशमन विभाग के पास नहीं बहुमंजिला इमारतों में आग बुझाने वाला प्लेटफॉर्म
शहर में करीब 100 बहुमंजिला सोसाइटी हैं। यहां 30 मंजिल से ऊंची सोसाइटी भी हैं। इसके बावजूद यहां पर अग्निशमन विभाग के पास आग बुझाने के लिए प्लेटफॉर्म नहीं है। यदि कभी भीषण आग लगेगी तो इस पर काबू पाना आसान नहीं होगा। प्लेटफॉर्म गाड़ी की व्यवस्था के लिए ग्रेटर फरीदाबाद की आरडब्ल्यूए काफी मुखर रही हैं। इसके बावजूद यहां पर अब तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है।
फरीदाबाद के लिए गठित एसडीआरएफ का केंद्र नूंह के टूंडलाका में है। एसडीआरएफ के साथ यहां पर केंद्र बनाने पर भी चर्चा हुई थी। अभी तक यहां पर केंद्र नहीं बनाया जा सका है
- गुरुकर्ण, परियोजना अधिकारी, जिला आपदा प्रबंधन विभाग