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एसबीआर टेक्नोलॉजी से साफ होगा दूषित पानी, मिर्जापुर और प्रतापगढ़ गांव में बनाए जा रहे एसटीपी

Tue, 04 Jan 2022 11:06 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 04 Jan 2022 11:06 PM IST
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SBR technology will clean contaminated water, STPs being built in Mirzapur and Pratapgarh villages
SBR technology will clean contaminated water, STPs being built in Mirzapur and Pratapgarh villages
फरीदाबाद। मिर्जापुर व प्रतापगढ़ गांव में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का काम दोबारा से तेजी से शुरू हो गया है। नगर निगम इस प्लांट को एसबीआर तकनीक पर बनवा रहा है। ऐसे में इससे निकले पानी का प्रयोग सिंचाई कार्यों में लाया जाएगा।
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शहर में सीवर ओवरफ्लो होने की गंभीर समस्या है। इससे लोगों को परेशानी होती है और निगम कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। सीवर की समस्या का मामला मुख्यमंत्री के सामने भी उठा चुका है। इस पर मुख्यमंत्री ने दो एसटीपी बनवाने की घोषणा की थी। इस पर नगर निगम ने मिर्जापुर गांव में 80 एमलएडी और प्रतापगढ़ गांव 100 एमएलडी का सीवर ट्रीटमेंट प्लांट पर काम पिछले साल शुरू कराया गया था। काम तेजी से चल रहा था लेकिन बीच में प्रदूषण के कारण ग्रेप के नियम लागू हो गए थे। ऐसे में प्रोजेक्ट का काम प्रभावित हुआ था। अब एक सप्ताह से दोबारा से सीवर प्लांट पर काम शुरू हो गया है। निगम की योजना है कि इस कार्य को तय समय में पूरा किया जा सके। इसके जरिये ओल्ड फरीदाबाद, ग्रेटर फरीदाबाद व तिगांव के सीवरों का पानी शोधित किया जाएगा। दूसरी यमुना नदी में भी गंदा पानी नहीं जा सकेगा।
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एसबीआर तकनीक का होगा प्रयोग
नगर निगम के कार्यकारी अभियंता नितिन कादियान ने बताया कि दोनों गांव में एसबीआर (स्केवेंशियल बैच रिएक्टर) टेक्नोलॉजी के जरिये पानी को साफ किया जाएगा। दोनों प्रोजेक्ट पर 240 करोड़ रुपये खर्च आएगा। साफ पानी को सिंचाई समेत अन्य कार्यों में प्रयोग में लाया जा सकता है। सीवर के पानी की बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीडेशन डिमांड) 300 तक होती है। इस टेक्नोलॉजी की मदद से यह मात्रा 10 बीओडी तक पहुंच जाएगी। सिंचाई के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी की बीओडी 30 तक होनी चाहिए। एसटीपी की एक और खासियत होगा कि यह कंप्यूटराइज्ड होगा। इससे एसटीपी आई खराबी को तुरंत ठीक किया जा सकेगा।
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