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मुफ्त हो सकता है सराय टोल प्लाजा
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फरीदाबाद। दिल्ली-फरीदाबाद टोल प्रबंधन नगर निगम में संपत्ति कर जमा कराने में आनाकानी कर रहा है। टोल प्रबंधन की ओर से निगम के नोटिस के बावजूद मालिकाना हक, नक्शा व अन्य दस्तावेज नहीं जमा कराए गए हैं। टोल प्रबंधन ने निगम के नोटिस के जवाब में इतना बताया कि उन्होंने यह जमीन भारत सरकार से अनुबंध के आधार पर ली है और उसका कोई संपत्ति कर नहीं बनता है। इस पर निगम ने एक बार फिर टोल प्रबंधन को नोटिस जारी कर दस्तावेज दिखाने को कहा है। यदि इस बार टोल प्रबंधन दस्तावेज नहीं उपलब्ध करवाता है तो निगम टोल प्रबंधन कार्यालय व बूथों को सील करने की कार्रवाई करेगा।
दिल्ली-फरीदाबाद फ्लाईओवर (सराय टोल प्लाजा) की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी और तभी से यहां टोल की वसूली की जा रही है। पिछले 9 साल में टोल प्रबंधन की ओर से निगम में कोई संपत्ति कर जमा नहीं कराया गया है। नगर निगम की कराधान शाखा के अनुसार निगम टोल प्रबंधन को पिछले तीन साल से नोटिस देकर वहां का क्षेत्रफल, नक्शा, मालिकाना हक व अन्य दस्तावेज मांग रहा है, मगर उसने कोई जवाब नहीं दिया।
निगम ने सितंबर 2019 में फिर से नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए कहा था। इस बार टोल प्रबंधन ने जवाब दिया कि फ्लाईओवर के लिए उसने यह जमीन भारत सरकार से अनुबंध के आधार पर ली है। ऐसे में इस जगह पर कोई संपत्ति कर जमा कराने के हकदार नहीं हैं।
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उधर, नगर निगम ओल्ड फरीदाबाद जोन के कराधान अधिकारी अनिल रखेजा ने बताया कि इस दौरान सभी कर्मचारी चुनाव कार्य में व्यस्त हो गए थे। अब विगत 7 नवंबर को एक बार फिर निगम ने टोल प्रबंधन को पत्र लिखकर अनुबंध की प्रति उपलब्ध करवाने को कहा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही वे अपने टीम के साथ मौके पर जाकर उससे दस्तावेज उपलब्ध करवाने के लिए कहेंगे। यदि प्रबंधन दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराता है तो टोल बूथों व प्रबंधन कार्यालय को सील करने की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में आला अधिकारियों को भी जानकारी दे दी गई है।
जहां शेड डल गया वहां वसूल सकते हैं संपत्तिकर
नगर निगम कराधान विभाग के अधिकारी अनिल रखेजा के अनुसार टोल प्रबंधन ने भारत सरकार से अनुबंध के आधार पर जमीन ली है। खाली जमीन का कोई टैक्स नहीं बनता, मगर जिस भी जमीन पर शेड डल गया, चाहे वह घर है, ऑफिस है या फिर टोल बूथ है तो वहां नगर निगम संपत्ति कर वसूलने का हकदार हो जाता है। टोल प्रबंधन ने उस जमीन पर अपना कार्यालय और टोल बूथ बना रखे हैं। ऐसे में उसे उसका संपत्ति कर जमा कराना ही होगा।
बूथ सील हुए तो नहीं हो सकेगी टोल पर वसूली
अगर नगर निगम ने टोल प्लाजा पर टोल वसूली के लिए बनाए गए बूथों को सील कर दिया, तो वसूली रुक जाएगी। ऐसे में मजबूरन टोल प्रबंधन को टोल फ्री करना होगा, नहीं तो जाम लगने के कारण वाहनों की कतारें लग जाएंगी।
नियमानुसार जवाब दिया
एनएचएआई के उपमहाप्रबंधक सचिन कुमार ने बताया कि संपत्ति कर को लेकर कोई विवाद नहीं है। नगर निगम की ही नियमावली के अनुसार केंद्र सरकार के अधीन परियोजनाएं और उनकी इमारत संपत्ति कर के दायरे से बाहर रहती हैं। नगर निगम का नोटिस आया था। इस पर हमने नियमानुसार जवाब दे दिया है।
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दिल्ली-फरीदाबाद फ्लाईओवर (सराय टोल प्लाजा) की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी और तभी से यहां टोल की वसूली की जा रही है। पिछले 9 साल में टोल प्रबंधन की ओर से निगम में कोई संपत्ति कर जमा नहीं कराया गया है। नगर निगम की कराधान शाखा के अनुसार निगम टोल प्रबंधन को पिछले तीन साल से नोटिस देकर वहां का क्षेत्रफल, नक्शा, मालिकाना हक व अन्य दस्तावेज मांग रहा है, मगर उसने कोई जवाब नहीं दिया।
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निगम ने सितंबर 2019 में फिर से नोटिस जारी कर जवाब देने के लिए कहा था। इस बार टोल प्रबंधन ने जवाब दिया कि फ्लाईओवर के लिए उसने यह जमीन भारत सरकार से अनुबंध के आधार पर ली है। ऐसे में इस जगह पर कोई संपत्ति कर जमा कराने के हकदार नहीं हैं।
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उधर, नगर निगम ओल्ड फरीदाबाद जोन के कराधान अधिकारी अनिल रखेजा ने बताया कि इस दौरान सभी कर्मचारी चुनाव कार्य में व्यस्त हो गए थे। अब विगत 7 नवंबर को एक बार फिर निगम ने टोल प्रबंधन को पत्र लिखकर अनुबंध की प्रति उपलब्ध करवाने को कहा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही वे अपने टीम के साथ मौके पर जाकर उससे दस्तावेज उपलब्ध करवाने के लिए कहेंगे। यदि प्रबंधन दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराता है तो टोल बूथों व प्रबंधन कार्यालय को सील करने की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में आला अधिकारियों को भी जानकारी दे दी गई है।
जहां शेड डल गया वहां वसूल सकते हैं संपत्तिकर
नगर निगम कराधान विभाग के अधिकारी अनिल रखेजा के अनुसार टोल प्रबंधन ने भारत सरकार से अनुबंध के आधार पर जमीन ली है। खाली जमीन का कोई टैक्स नहीं बनता, मगर जिस भी जमीन पर शेड डल गया, चाहे वह घर है, ऑफिस है या फिर टोल बूथ है तो वहां नगर निगम संपत्ति कर वसूलने का हकदार हो जाता है। टोल प्रबंधन ने उस जमीन पर अपना कार्यालय और टोल बूथ बना रखे हैं। ऐसे में उसे उसका संपत्ति कर जमा कराना ही होगा।
बूथ सील हुए तो नहीं हो सकेगी टोल पर वसूली
अगर नगर निगम ने टोल प्लाजा पर टोल वसूली के लिए बनाए गए बूथों को सील कर दिया, तो वसूली रुक जाएगी। ऐसे में मजबूरन टोल प्रबंधन को टोल फ्री करना होगा, नहीं तो जाम लगने के कारण वाहनों की कतारें लग जाएंगी।
नियमानुसार जवाब दिया
एनएचएआई के उपमहाप्रबंधक सचिन कुमार ने बताया कि संपत्ति कर को लेकर कोई विवाद नहीं है। नगर निगम की ही नियमावली के अनुसार केंद्र सरकार के अधीन परियोजनाएं और उनकी इमारत संपत्ति कर के दायरे से बाहर रहती हैं। नगर निगम का नोटिस आया था। इस पर हमने नियमानुसार जवाब दे दिया है।