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Faridabad News: कोलकाता के संजीव कुमार जूट से गढ़ रहे सुंदर आकृतियां
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राज्य सरकार से किए जा चुके हैं सम्मानित
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में कोलकाता से आए संजीव कुमार अपनी कला से सभी को आकर्षित कर रहे हैं। इलेक्ट्रिकल कंपनी में इंजीनियर रहे संजीव कुमार दास ने करीब 12 वर्ष पहले नौकरी छोड़कर हस्तशिल्प के क्षेत्र में कदम रखा।
अब वह जूट से आकर्षक सजावटी वस्तुएं बनाकर न केवल अपनी पहचान बना चुके हैं, बल्कि प्रदेश सरकार के कौशल विकास केंद्र में युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर भी बना रहे हैं। संजीव कुमार दास ने बताया कि वह कोलकाता की एक इलेक्ट्रिकल कंपनी में कार्यरत थे लेकिन उन्हें नौकरी पसंद नहीं आई। उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। घर आकर पत्नी से सलाह-मशवरा किया और पास के एक कौशल प्रशिक्षण केंद्र में शाम के समय जूट से सजावटी सामान बनाने की कला सीखनी शुरू कर दी। दो वर्षों तक प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देकर अपना काम शुरू कर दिया।
करीब 55 वर्षीय संजीव के परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। बेटा बीए की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी इंजीनियर है। उनकी पत्नी भी हस्तशिल्प कलाकार हैं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य करती हैं। संजीव कुमार ने जूट से मां दुर्गा की एक प्रतिमा तैयार की, जिसके लिए उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। उनके बनाए उत्पादों की सराहना केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी कर चुके हैं और उनके हस्तनिर्मित सामान अपने घर में सजा चुके हैं।
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संजीव ने बताया कि वह जुट की सूत और गोंद की मदद से घरेलू सजावटी वस्तुएं तैयार करते हैं। हर उत्पाद को बड़ी बारीकी से बनाया जाता है और एक वस्तु तैयार करने में लगभग 10 से 12 दिन का समय लगता है। सूरजकुंड मेले में उनके उत्पादों की कीमत 400 से 600 रुपये तक है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सूरजकुंड मेले में कोलकाता से आए संजीव कुमार अपनी कला से सभी को आकर्षित कर रहे हैं। इलेक्ट्रिकल कंपनी में इंजीनियर रहे संजीव कुमार दास ने करीब 12 वर्ष पहले नौकरी छोड़कर हस्तशिल्प के क्षेत्र में कदम रखा।
अब वह जूट से आकर्षक सजावटी वस्तुएं बनाकर न केवल अपनी पहचान बना चुके हैं, बल्कि प्रदेश सरकार के कौशल विकास केंद्र में युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर भी बना रहे हैं। संजीव कुमार दास ने बताया कि वह कोलकाता की एक इलेक्ट्रिकल कंपनी में कार्यरत थे लेकिन उन्हें नौकरी पसंद नहीं आई। उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। घर आकर पत्नी से सलाह-मशवरा किया और पास के एक कौशल प्रशिक्षण केंद्र में शाम के समय जूट से सजावटी सामान बनाने की कला सीखनी शुरू कर दी। दो वर्षों तक प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देकर अपना काम शुरू कर दिया।
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करीब 55 वर्षीय संजीव के परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। बेटा बीए की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी इंजीनियर है। उनकी पत्नी भी हस्तशिल्प कलाकार हैं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कार्य करती हैं। संजीव कुमार ने जूट से मां दुर्गा की एक प्रतिमा तैयार की, जिसके लिए उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। उनके बनाए उत्पादों की सराहना केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी कर चुके हैं और उनके हस्तनिर्मित सामान अपने घर में सजा चुके हैं।
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संजीव ने बताया कि वह जुट की सूत और गोंद की मदद से घरेलू सजावटी वस्तुएं तैयार करते हैं। हर उत्पाद को बड़ी बारीकी से बनाया जाता है और एक वस्तु तैयार करने में लगभग 10 से 12 दिन का समय लगता है। सूरजकुंड मेले में उनके उत्पादों की कीमत 400 से 600 रुपये तक है।