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स्वच्छता सर्वेक्षण : तीन अंकों की गिरावट के साथ 41वें स्थान पर शहर
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फरीदाबाद। स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 में नगर निगम फरीदाबाद 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में 41वें स्थान पर रहा है। पिछले साल फरीदाबाद शहर 38वें स्थान पर था। ऐसे में इस साल स्वच्छता रैंकिंग में तीन अंकों की गिरावट आई है।
केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 का परिणाम शनिवार को घोषित कर दिया। इसमें दस लाख से अधिक आबादी वाले 48 शहरों की सूची में फरीदाबाद 41वें स्थान पर जा पहुंचा। नगर निगम की रैंकिंग में सुधार न आने का प्रमुख कारण नगर निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था प्रमुख है। शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। कई जगहों पर नगर निगम नियमित सफाई तक नहीं करा पा रहा है। इस साल जनवरी से स्वच्छ सर्वेक्षण शुरू हुआ था। इसे लेकर नगर निगम ने तैयारी की थी जिससे कि स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छी रैंक आ सके लेकिन शनिवार को जारी रैंकिंग में ऐसा नहीं हो सका। शहर की रैंकिंग में सुधार होने के बजाय गिरावट दर्ज की गई है। इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण छह हजार अंकों का था। इसमें से 3139 नंबर मिले हैं। जानकारों की मानें तो शहर को कम अंक मिलने के दो-तीन कारण प्रमुख हैं। इनमें घर-घर कूड़ा कलेक्शन शत-प्रतिशत न हो पाना, कूड़ा उठाने के लिए पर्याप्त संसाधन न होना, सूखा व गीला कूड़ा अलग-अलग न हो पाना और कूड़ा निस्तारण के लिए पर्याप्त व्यवस्था न होना आदि है।
रैंकिंग में उतार-चढ़ाव
रिपोर्ट के अनुसार, स्वच्छता के मामले में स्मार्ट सिटी फरीदाबाद की रैंकिंग में उतार-चढ़ाव चल रहा है। साल 2017 में फरीदाबाद देशभर में 88वें स्थान पर था, जबकि साल 2018 में इसकी रैंकिंग पिछड़ कर 216 पर पहुंच गई थी। इसके बावजूद नगर निगम ने इसमें सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए और वर्ष 2019 में 227वें स्थान पर था। इस बार नियमों में हुए बदलाव के कारण 10 से अधिक आबादी वाले शहरों में फरीदाबाद 47 में से 38वें पायदान पर रहा। साल 2021 में 41वें स्थान पर है।
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6000 में 3139 अंक मिले
शहरी विकास मंत्रालय ने स्वच्छता सर्वेक्षण में तीन प्रकार के मापदंड रखे थे, जिनमें शहर को अंक अर्जित करने थे। इनमें सर्विस लेवल प्रोग्रेस (एसएलपी), सिटीजन वाइस और सर्टिफिकेशन शामिल हैं। एसएलपी में कूड़ा सेग्रिगेसन, कूड़ा कलेक्शन, प्रोसेसिंग और डिस्पोजल शामिल है। इसमें 2400 अंक थे। सिटीजन वाइस में फीडबैक, सहभागिता और शहरवासियों का अनुभव में 1800 अंक निर्धारित थे। सर्टिफिकेशन में ओडीएफ, ओडीएफ प्लस और पानी के लिए भी 1800 अंक शामिल थे। कुल 6000 अंक होते हैं। जारी परिणाम में अपने शहर को सर्विस लेवल प्रोग्रेस (एसएलपी) के लिए 2400 में से 1754.49 अंक मिले हैं। सिटीजन वाइस में 1800 में 1085.05 अंक और सर्टिफिकेशन में 1800 में से महज 300 अंक ही मिले हैं। कुल मिलाकर 6000 अंकों में से शहर को 3139.54 अंक मिले हैं।
नगर निगम सफाई को लेकर गंभीर नहीं है। शहर के कई जगहों पर कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। इससे आम लोगों को परेशानी होती है। ऐसे लगता नहीं कि साफ-सफाई को लेकर काम हो रहा है।
- श्याम कौशिक, निवासी, ग्रेटर फरीदाबाद
नगर निगम के पास संसाधनों की कमी है। कूड़ा निस्तारण पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। ऐसे में स्वच्छता सर्वे में अच्छी रैंकिंग की बात करना ही गलत है। अभी लोगों घरों से कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है।
- गोविंद गर्ग, निवासी, ओल्ड फरीदाबाद
शहर की स्वच्छता में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इसमें वार्ड कमेटियों का गठन किया गया है। इसके अलावा डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने के लिए 100 नए वाहनों को शामिल किया गया है। इसकी संख्या और बढ़ाई जा रही है।
-यशपाल, आयुक्त नगर निगम
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केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 का परिणाम शनिवार को घोषित कर दिया। इसमें दस लाख से अधिक आबादी वाले 48 शहरों की सूची में फरीदाबाद 41वें स्थान पर जा पहुंचा। नगर निगम की रैंकिंग में सुधार न आने का प्रमुख कारण नगर निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था प्रमुख है। शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। कई जगहों पर नगर निगम नियमित सफाई तक नहीं करा पा रहा है। इस साल जनवरी से स्वच्छ सर्वेक्षण शुरू हुआ था। इसे लेकर नगर निगम ने तैयारी की थी जिससे कि स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छी रैंक आ सके लेकिन शनिवार को जारी रैंकिंग में ऐसा नहीं हो सका। शहर की रैंकिंग में सुधार होने के बजाय गिरावट दर्ज की गई है। इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण छह हजार अंकों का था। इसमें से 3139 नंबर मिले हैं। जानकारों की मानें तो शहर को कम अंक मिलने के दो-तीन कारण प्रमुख हैं। इनमें घर-घर कूड़ा कलेक्शन शत-प्रतिशत न हो पाना, कूड़ा उठाने के लिए पर्याप्त संसाधन न होना, सूखा व गीला कूड़ा अलग-अलग न हो पाना और कूड़ा निस्तारण के लिए पर्याप्त व्यवस्था न होना आदि है।
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रैंकिंग में उतार-चढ़ाव
रिपोर्ट के अनुसार, स्वच्छता के मामले में स्मार्ट सिटी फरीदाबाद की रैंकिंग में उतार-चढ़ाव चल रहा है। साल 2017 में फरीदाबाद देशभर में 88वें स्थान पर था, जबकि साल 2018 में इसकी रैंकिंग पिछड़ कर 216 पर पहुंच गई थी। इसके बावजूद नगर निगम ने इसमें सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए और वर्ष 2019 में 227वें स्थान पर था। इस बार नियमों में हुए बदलाव के कारण 10 से अधिक आबादी वाले शहरों में फरीदाबाद 47 में से 38वें पायदान पर रहा। साल 2021 में 41वें स्थान पर है।
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6000 में 3139 अंक मिले
शहरी विकास मंत्रालय ने स्वच्छता सर्वेक्षण में तीन प्रकार के मापदंड रखे थे, जिनमें शहर को अंक अर्जित करने थे। इनमें सर्विस लेवल प्रोग्रेस (एसएलपी), सिटीजन वाइस और सर्टिफिकेशन शामिल हैं। एसएलपी में कूड़ा सेग्रिगेसन, कूड़ा कलेक्शन, प्रोसेसिंग और डिस्पोजल शामिल है। इसमें 2400 अंक थे। सिटीजन वाइस में फीडबैक, सहभागिता और शहरवासियों का अनुभव में 1800 अंक निर्धारित थे। सर्टिफिकेशन में ओडीएफ, ओडीएफ प्लस और पानी के लिए भी 1800 अंक शामिल थे। कुल 6000 अंक होते हैं। जारी परिणाम में अपने शहर को सर्विस लेवल प्रोग्रेस (एसएलपी) के लिए 2400 में से 1754.49 अंक मिले हैं। सिटीजन वाइस में 1800 में 1085.05 अंक और सर्टिफिकेशन में 1800 में से महज 300 अंक ही मिले हैं। कुल मिलाकर 6000 अंकों में से शहर को 3139.54 अंक मिले हैं।
नगर निगम सफाई को लेकर गंभीर नहीं है। शहर के कई जगहों पर कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। इससे आम लोगों को परेशानी होती है। ऐसे लगता नहीं कि साफ-सफाई को लेकर काम हो रहा है।
- श्याम कौशिक, निवासी, ग्रेटर फरीदाबाद
नगर निगम के पास संसाधनों की कमी है। कूड़ा निस्तारण पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। ऐसे में स्वच्छता सर्वे में अच्छी रैंकिंग की बात करना ही गलत है। अभी लोगों घरों से कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है।
- गोविंद गर्ग, निवासी, ओल्ड फरीदाबाद
शहर की स्वच्छता में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इसमें वार्ड कमेटियों का गठन किया गया है। इसके अलावा डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने के लिए 100 नए वाहनों को शामिल किया गया है। इसकी संख्या और बढ़ाई जा रही है।
-यशपाल, आयुक्त नगर निगम