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Faridabad News: प्रतापगढ़ डंपिंग यार्ड के खिलाफ आरडब्ल्यूए ने बनाई आंदोलन की रणनीति
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प्रतापगढ़ डंपिंग यार्ड के विरोध में बैठक करते आरडब्ल्यूए पदाधिकारी फोटो स्थानीय लोग
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। प्रतापगढ़ डंपिंग यार्ड में लगातार बढ़ रही कूड़े की मात्रा को लेकर आसपास के क्षेत्रों के लोगों का विरोध तेज होने लगा है। इसी मुद्दे पर स्थानीय आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने सेक्टर-56 स्थित कम्युनिटी सेंटर में बैठक आयोजित कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जाएगा।
बैठक में आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों ने कहा कि प्रतापगढ़ डंपिंग यार्ड में पिछले कुछ दिनों से पहले की तुलना में काफी अधिक कूड़ा डाला जा रहा है। पहले यहां प्रतिदिन करीब 350 टन कूड़ा पहुंचता था, जबकि अब यह मात्रा बढ़कर लगभग 600 टन प्रतिदिन हो गई है। इससे आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
बैठक में मौजूद लोगों का कहना था कि डंपिंग यार्ड से उठने वाली दुर्गंध, मक्खियों की बढ़ती संख्या और प्रदूषण के कारण लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने कहा कि जिले के अन्य क्षेत्रों में भी स्थानीय लोगों ने संगठित होकर विरोध किया, जिसके बाद वहां डंपिंग यार्ड बंद कराए गए। ऐसे में प्रतापगढ़ क्षेत्र के लोगों को भी एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। बैठक में जल्द ही जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मुलाकात करने तथा आवश्यकता पड़ने पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई।
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फरीदाबाद। प्रतापगढ़ डंपिंग यार्ड में लगातार बढ़ रही कूड़े की मात्रा को लेकर आसपास के क्षेत्रों के लोगों का विरोध तेज होने लगा है। इसी मुद्दे पर स्थानीय आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने सेक्टर-56 स्थित कम्युनिटी सेंटर में बैठक आयोजित कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जाएगा।
बैठक में आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों ने कहा कि प्रतापगढ़ डंपिंग यार्ड में पिछले कुछ दिनों से पहले की तुलना में काफी अधिक कूड़ा डाला जा रहा है। पहले यहां प्रतिदिन करीब 350 टन कूड़ा पहुंचता था, जबकि अब यह मात्रा बढ़कर लगभग 600 टन प्रतिदिन हो गई है। इससे आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
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बैठक में मौजूद लोगों का कहना था कि डंपिंग यार्ड से उठने वाली दुर्गंध, मक्खियों की बढ़ती संख्या और प्रदूषण के कारण लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने कहा कि जिले के अन्य क्षेत्रों में भी स्थानीय लोगों ने संगठित होकर विरोध किया, जिसके बाद वहां डंपिंग यार्ड बंद कराए गए। ऐसे में प्रतापगढ़ क्षेत्र के लोगों को भी एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। बैठक में जल्द ही जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से मुलाकात करने तथा आवश्यकता पड़ने पर बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की रूपरेखा पर भी चर्चा की गई।