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Faridabad News: आय से ज्यादा टैक्स दे रहीं सूरजकुंड जाने वाली रोडवेज बसें

Thu, 08 Feb 2024 10:47 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 08 Feb 2024 10:47 PM IST
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Roadways buses going to Surajkund paying more tax than their income
बल्लभगढ़। 37वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले के लिए रोडवेज की ओर से 15 से ज्यादा बसों का संचालन हर रोज किया जा रहा है। इन बसों में सवारियों की संख्या कम होने के कारण रोडवेज को काफी नुकसान हो रहा है। रोडवेज बस के परिचालक का कहना है कि कई बार वह आय से ज्यादा बदरपुर बॉर्डर का टोल देते हैं। अगर इन बसों को अन्य लोकल रूटों पर चलाया जाता, तो रोडवेज की आय में बढ़ोतरी होती।
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बल्लभगढ़ डिपो से हर रोज 15 से ज्यादा बसें सूरजकुंड मेले के लिए चलाई जा रही हैं। जिसमें से कुछ बसें एनआईटी डिपो और बदरपुर बॉर्डर से होकर गुजरती हैं। मेले को शुरू हुए एक सप्ताह हो चुका है लेकिन यात्रियों की संख्या में इजाफा नहीं हुआ है। हर रोज प्रति बस मात्र एक हजार से 1200 रुपये राजस्व लेकर आ रही है। जिसमें से कुछ बसों को बदरपुर बॉर्डर का टोल भी देना पड़ता है। आय कम होने के कारण रोडवेज को काफी नुकसान हो रहा है। परिचालकों ने बताया कि सुबह के समय जाते वक्त और शाम को आते वक्त यात्रियों की संख्या काफी होती है, लेकिन दोपहर के समय कई बसें खाली जाती व आती हैं। बदरपुर बॉर्डर रूट पर चलने वाले परिचालकों ने बताया कि डिपो वाया बदरपुर बॉर्डर से मेले के लिए बसों का संचालन किया जाता है। उन बसों को बाॅर्डर क्रॉस करने के लिए टोल देना पड़ता है जोकि करीब 200 रुपये का होता है। परिचालक ने बताया कि दोपहर के समय उनकी बस मात्र 150 रुपये राजस्व लेकर आती है।
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इन रूटों से काटी गईं बसें
सूरजकुंड मेले में चलाने के लिए बसों को लोकल रूट जैसे पलवल, गुरुग्राम व होडल से काटा गया है। अगर कोई बस डिपो से पलवल का चक्कर लगाती है, तो वह ढाई हजार रुपये की राजस्व लेकर आती है। वहीं गुरुग्राम रूट पर जाने वाली बस करीब 7 हजार रुपये लेकर आती है। अब इन रूटों से बसों को हटाकर मेले में लगा दिया है। जिसके चलते किलोमीटर के साथ-साथ राजस्व में भी नुकसान हो रहा है।
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वर्जन
सूरजकुंड मेले को जाने वाली बसों में यात्रियों की संख्या काफी कम है। जिससे राजस्व में नुकसान हो रहा है। - हरि सिंह, ड्यूटी इंचार्ज, रोडवेज डिपो
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