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नवरात्र में नारी शक्ति का संकल्प : नशामुक्त समाज की ओर बढ़ते कदम

Mon, 23 Mar 2026 12:26 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 23 Mar 2026 12:26 AM IST
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Resolution of women's power in Navratri: steps towards drug-free society
संवाद न्यूज एजेंसी
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फरीदाबाद। नवरात्र के पावन दिनों में जहां हर घर में देवी शक्ति की आराधना हो रही है, वहीं जिले की महिलाएं उसी शक्ति का साकार रूप बनकर समाज को एक नई दिशा दे रही हैं। नशे जैसी गंभीर सामाजिक समस्या के खिलाफ अब यह जंग केवल कानून या प्रशासन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें नारी शक्ति अग्रिम पंक्ति में खड़ी नजर आ रही है। कोई पुलिस वर्दी में तस्करों पर सख्ती बरत रही है, तो कोई मनोवैज्ञानिक परामर्श के जरिये युवाओं को नई जिंदगी दे रही है। वहीं, कुछ महिलाएं समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक पहुंचकर बच्चों और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए जागरूकता की अलख जगा रही हैं। इन सभी के सामूहिक प्रयास से नशामुक्त समाज का सपना अब एक सशक्त अभियान का रूप लेता दिख रहा है।


मनोवैज्ञानिक परामर्श से बदल रहीं जिंदगी



नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. प्रीति नशामुक्त फरीदाबाद अभियान की मजबूत स्तंभ बनकर उभरी हैं। स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर वह लगातार ऐसे युवाओं और परिवारों तक पहुंच रही हैं, जो नशे की समस्या से जूझ रहे हैं। डॉ. प्रीति न केवल व्यक्तिगत काउंसलिंग करती हैं, बल्कि बड़े स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन भी करती हैं। अब तक वह हजारों कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को नशे के मानसिक, सामाजिक और पारिवारिक दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक कर चुकी हैं। उनके प्रयासों से कई युवा नशे की गिरफ्त से बाहर निकलकर फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटे हैं।
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बच्चों को नशे से बचाने का संकल्प



सामाजिक कार्यकर्ता चंदा ने समाज के उस हिस्से में काम करने का बीड़ा उठाया, जहां अक्सर समस्याएं अनदेखी रह जाती हैं। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों के बीच काम करते हुए उन्होंने पाया कि कम उम्र में ही कई बच्चे गलत संगत और नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इस स्थिति को बदलने के लिए उन्होंने सबसे पहले बच्चों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना शुरू किया। खेल, संवाद और छोटे-छोटे कार्यक्रमों के माध्यम से वह बच्चों को सही और गलत के बीच अंतर समझाने लगीं। इसी दौरान उन्हें बच्चों की गुमशुदगी और शिक्षा से वंचित रहने की गंभीर समस्या का भी एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने चाइल्ड राइट्स एंड यू संस्था से जुड़कर बच्चों को स्कूल से जोड़ने और उनके अधिकारों के लिए काम शुरू किया। इस अभियान के जरिए वह हर साल करीब 5 हजार लोगों को जागरूक कर रही हैं।
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सख्ती और जागरूकता का संतुलन

एसएचओ इंस्पेक्टर सुनीता नशे के खिलाफ चल रही इस लड़ाई में कानून की मजबूत आवाज हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान हजारों नशा तस्करों के मंसूबों को नाकाम किया है और लगातार सख्त कार्रवाई के जरिए अपराधियों में भय का माहौल बनाया है। लेकिन उनकी भूमिका केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है। इंस्पेक्टर सुनीता समाज को जागरूक करने में भी उतनी ही सक्रिय हैं। पिछले 11 महीनों में उन्होंने 500 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिनमें स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संस्थाएं शामिल हैं। हाल ही में सूरजकुंड मेले जैसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन के दौरान भी उन्होंने 70 से अधिक नशामुक्ति कार्यक्रम संचालित किए।


परिवार को जागरूक करने पर जोर


ग्रेटर फरीदाबाद की अर्चना नशामुक्ति अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में जुटी हैं। वह नियमित रूप से विभिन्न कॉलोनियों और सोसाइटियों में जाकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करती हैं। उनका मुख्य फोकस अभिभावकों को जागरूक करना है। अर्चना का मानना है कि बच्चों की दिनचर्या, मित्र मंडली और व्यवहार पर नजर रखकर नशे की शुरुआत को रोका जा सकता है। अपने अभियानों में वह माता-पिता को यह संदेश देती हैं कि संवाद और विश्वास ही बच्चों को गलत रास्ते से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। उनके प्रयासों से कई परिवारों में जागरूकता बढ़ी है और बच्चों के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत हुई है।
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