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Faridabad News: रामजन्म व ताड़का वध से शुरू हुई धार्मिक रामलीला
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संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। जिले में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव के दौरान मंगलवार रात को रामजन्म और ताड़का वध से रामलीला की शुरुआत की गई। कहीं सीता स्वयंवर और राम वनवास का मंचन हुआ।
एनआईटी 5 नंबर स्थित श्री धार्मिक लीला कमेटी ने मंगलवार की रात को रामजन्म और ताड़का वध से रामलीला की शुरुआत की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व मंत्री एसी चौधरी मौजूद रहे। उसके बाद रामलीला के मंच पर दशरथ का किरदार निभा रहे पंकज खरबंदा के गुरु वशिष्ठ बने संचित के कहने पर पुत्रश्रेष्ठ यज्ञ करवाया। तब प्रभु राम का जन्म हुआ तथा राम के साथ-साथ भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न का भी जन्म हुआ। इस खुशी में मंच पर अनिल नागपाल व गुलशन नागपाल ने कव्वाली गाकर राम जन्म की बधाई दी।
मंच की यह प्रथा रही है कि जब ऋंगी ऋषि पुत्र श्रेष्ठ यज्ञ करते हैं तो जो प्रसाद के रूप में फल बांटे जाते हैं, वह फल कुछ दर्शक भी मांगते हैं। क्योंकि उनका विश्वास बन गया है कि इससे उनके यहां भी संतान होगी और ऐसा कई बार हुआ भी है। रामलीला में पहली बार दिखाया गया कि ताड़का की शवयात्रा दर्शकों के बीच में से निकाली गई।
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जग की रचना करने वाले क्या-क्या खेल रचाते हैं
शहर की सबसे पुरानी विजय रामलीला कमेटी के ऐतिहासिक और पौराणिक मंच पर मंगलवार रात सीता स्वयंवर दर्शाया गया। माता जानकी (जितेश आहूजा) और भगवान राम (सौरभ कुमार) जनक नगरी की पुष्प वाटिका में एक दूसरे को प्रथम बार मिले और कमेटी के पूर्व निदेशक स्वर्गीय श्री विश्वबंधु शर्मा द्वारा रचित गीत जग की रचना करने वाले क्या-क्या खेल रचाते हैं, सिया राम हो जाते हैं और राम सिया हो जाती हैं, गाया गया। गीत ने युगल जोड़े के दिव्य मिलन में चार चांद लगा दिए और सभी दर्शक इस भव्य मिलन को देख भाव विभोर हुए। उसके बाद देश विदेश से पधारे राजाओं ने शिव धनुष पर अपना जोर लगाया। अंत में राम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई और सीता ने वरमाला डाल स्वयंवर को स्वीकृति दी, तभी दरबार में परशुराम बने निशांत नागपाल का प्रवेश हुआ और फिर लक्ष्मण परशुराम संवाद ने मंच पर माहौल गर्म कर दिया। तालियों की गड़गड़ाहट से मैदान गूंज उठा कर लक्ष्मण बने प्रिंस मनोचा के अभिनय खूब सराहा गया।
राम गए वनवास मंचन पर दर्शक हुए भावुक
एनआईटी एक नंबर स्थित विजय रामलीला कमेटी में पांचवें दिन कलाकारों ने श्रीराम वनवास का मंचन किया। मंचन के तहत दिखाया गया कि राजा दशरथ (प्रीतम सिंह) से कैकेयी (अर्जुन) ने दो वर मांगे, जिसमें एक में राम (गगन) को चौदह वर्षों का वनवास और दूसरे में भरत (भविष्य) को सिंहासन। इसके बाद राम, सीता (गर्व) और लक्ष्मण (राकेश) वन के लिए निकल पकड़ते हैं, जिसे देख दर्शक भावुक हो गए। इस दौरान जय श्रीराम के जयघोष गूंज उठे। दिखाया गया कि सीता स्वयंवर के बाद जब श्री राम-लक्ष्मण अयोध्या पहुंचते हैं, तो पूरे राज्य में खुशियां मनाई जाती हैं। राजा दशरथ श्रीराम को अयोध्या का राजकाज देने का निर्णय करते हैं। अंतिम समय पर कैकेयी अपनी दासी मंथरा के कहने पर पूर्व में दिए गए राजा दशरथ को दो वर मांग लेती हैं। राजा दशरथ कैकेयी को बहुत मनाते हैं, मगर कैकेयी नहीं मानतीं। जब श्रीराम को पता चलता है कि माता कैकई ने भरत के लिए राज्य अभिषेक और उनके लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा है, तो वह सहर्ष तैयार हो जाते हैं। इसके बाद तीनों सन्यासी की वेशभूषा में राजा दशरथ एवं तीनों रानियों से आज्ञा लेकर वन के लिए प्रस्थान करते हैं।
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बल्लभगढ़। जिले में चल रहे श्री रामलीला महोत्सव के दौरान मंगलवार रात को रामजन्म और ताड़का वध से रामलीला की शुरुआत की गई। कहीं सीता स्वयंवर और राम वनवास का मंचन हुआ।
एनआईटी 5 नंबर स्थित श्री धार्मिक लीला कमेटी ने मंगलवार की रात को रामजन्म और ताड़का वध से रामलीला की शुरुआत की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व मंत्री एसी चौधरी मौजूद रहे। उसके बाद रामलीला के मंच पर दशरथ का किरदार निभा रहे पंकज खरबंदा के गुरु वशिष्ठ बने संचित के कहने पर पुत्रश्रेष्ठ यज्ञ करवाया। तब प्रभु राम का जन्म हुआ तथा राम के साथ-साथ भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न का भी जन्म हुआ। इस खुशी में मंच पर अनिल नागपाल व गुलशन नागपाल ने कव्वाली गाकर राम जन्म की बधाई दी।
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मंच की यह प्रथा रही है कि जब ऋंगी ऋषि पुत्र श्रेष्ठ यज्ञ करते हैं तो जो प्रसाद के रूप में फल बांटे जाते हैं, वह फल कुछ दर्शक भी मांगते हैं। क्योंकि उनका विश्वास बन गया है कि इससे उनके यहां भी संतान होगी और ऐसा कई बार हुआ भी है। रामलीला में पहली बार दिखाया गया कि ताड़का की शवयात्रा दर्शकों के बीच में से निकाली गई।
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जग की रचना करने वाले क्या-क्या खेल रचाते हैं
शहर की सबसे पुरानी विजय रामलीला कमेटी के ऐतिहासिक और पौराणिक मंच पर मंगलवार रात सीता स्वयंवर दर्शाया गया। माता जानकी (जितेश आहूजा) और भगवान राम (सौरभ कुमार) जनक नगरी की पुष्प वाटिका में एक दूसरे को प्रथम बार मिले और कमेटी के पूर्व निदेशक स्वर्गीय श्री विश्वबंधु शर्मा द्वारा रचित गीत जग की रचना करने वाले क्या-क्या खेल रचाते हैं, सिया राम हो जाते हैं और राम सिया हो जाती हैं, गाया गया। गीत ने युगल जोड़े के दिव्य मिलन में चार चांद लगा दिए और सभी दर्शक इस भव्य मिलन को देख भाव विभोर हुए। उसके बाद देश विदेश से पधारे राजाओं ने शिव धनुष पर अपना जोर लगाया। अंत में राम ने धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाई और सीता ने वरमाला डाल स्वयंवर को स्वीकृति दी, तभी दरबार में परशुराम बने निशांत नागपाल का प्रवेश हुआ और फिर लक्ष्मण परशुराम संवाद ने मंच पर माहौल गर्म कर दिया। तालियों की गड़गड़ाहट से मैदान गूंज उठा कर लक्ष्मण बने प्रिंस मनोचा के अभिनय खूब सराहा गया।
राम गए वनवास मंचन पर दर्शक हुए भावुक
एनआईटी एक नंबर स्थित विजय रामलीला कमेटी में पांचवें दिन कलाकारों ने श्रीराम वनवास का मंचन किया। मंचन के तहत दिखाया गया कि राजा दशरथ (प्रीतम सिंह) से कैकेयी (अर्जुन) ने दो वर मांगे, जिसमें एक में राम (गगन) को चौदह वर्षों का वनवास और दूसरे में भरत (भविष्य) को सिंहासन। इसके बाद राम, सीता (गर्व) और लक्ष्मण (राकेश) वन के लिए निकल पकड़ते हैं, जिसे देख दर्शक भावुक हो गए। इस दौरान जय श्रीराम के जयघोष गूंज उठे। दिखाया गया कि सीता स्वयंवर के बाद जब श्री राम-लक्ष्मण अयोध्या पहुंचते हैं, तो पूरे राज्य में खुशियां मनाई जाती हैं। राजा दशरथ श्रीराम को अयोध्या का राजकाज देने का निर्णय करते हैं। अंतिम समय पर कैकेयी अपनी दासी मंथरा के कहने पर पूर्व में दिए गए राजा दशरथ को दो वर मांग लेती हैं। राजा दशरथ कैकेयी को बहुत मनाते हैं, मगर कैकेयी नहीं मानतीं। जब श्रीराम को पता चलता है कि माता कैकई ने भरत के लिए राज्य अभिषेक और उनके लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा है, तो वह सहर्ष तैयार हो जाते हैं। इसके बाद तीनों सन्यासी की वेशभूषा में राजा दशरथ एवं तीनों रानियों से आज्ञा लेकर वन के लिए प्रस्थान करते हैं।