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Faridabad News: अतिक्रमण पर स्थायी वार की तैयारी, ग्रीन बेल्ट और सरकारी जमीन की मजबूत होंगी फेंसिंग

Fri, 29 May 2026 12:09 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2026 12:09 AM IST
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Preparations for a permanent attack on encroachment, green belts and government land to be strengthened with fencing.
एफएमडीए ने सेक्टर-88 रोड को पायलट प्रोजेक्ट बना स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया
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1.53 करोड़ रुपये की लागत आएगी



अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। सड़क किनारे सरकारी जमीनों और ग्रीन बेल्ट पर बढ़ते कब्जों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। नगर निगम, एफएमडीए और एचएसवीपी की ओर से लगातार अभियान चलाने के बावजूद शहर में अतिक्रमण पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा। यही वजह है कि अब फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण ने सेक्टर-88 रोड को पायलट प्रोजेक्ट बनाते हुए स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया है। करीब 1.53 करोड़ रुपये की लागत से यहां ग्रीन बेल्ट और सरकारी जमीन की मजबूत फेंसिंग की जाएगी ताकि दोबारा कब्जे की गुंजाइश ही खत्म हो सके।


फरीदाबाद में अतिक्रमण हटाना प्रशासन के लिए सबसे महंगे और चुनौतीपूर्ण अभियानों में शामिल हो चुका है। अधिकारियों के अनुसार शहर में औसतन हर सप्ताह अलग-अलग जोनों में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाना पड़ता है। एक बड़े अभियान में जेसीबी मशीनें, डंपर, पुलिस बल, सफाई कर्मचारी और ट्रैफिक स्टाफ की तैनाती पर लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि संयुक्त अभियान पर एक दिन में 3 से 5 लाख रुपये तक का प्रशासनिक खर्च आ जाता है लेकिन कई जगह कुछ दिनों बाद फिर से कब्जे शुरू हो जाते हैं।
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एक साल में हजारों अतिक्रमण हटाए


नगर निगम और प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार पिछले एक वर्ष में फरीदाबाद के अलग-अलग इलाकों में हजारों अस्थायी और स्थायी अतिक्रमण हटाए गए। एनआईटी, बल्लभगढ़, ओल्ड फरीदाबाद और ग्रेटर फरीदाबाद क्षेत्र में सड़क किनारे बनी अवैध दुकानों, शेड, रेहड़ियों और निर्माण सामग्री के कब्जों पर कार्रवाई की गई। कई बार एक ही स्थान पर बार-बार अभियान चलाना पड़ा। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या नई विकसित हो रही सड़कों और ग्रीन बेल्ट क्षेत्रों में सामने आती है। पहले खाली जमीन पर मलबा डाला जाता है फिर धीरे-धीरे अस्थायी ढांचा खड़ा कर कब्जा शुरू हो जाता है। बाद में इन्हें हटाना कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तर पर मुश्किल हो जाता है।
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ग्रीन बेल्ट खत्म होने से बढ़ रहा जलभराव


सेक्टर-88, 85, 86 और आसपास के क्षेत्रों में स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत दी कि सड़क किनारे ग्रीन बेल्ट पर निर्माण सामग्री और मलबा डालने से बारिश के पानी की निकासी प्रभावित हो रही है। शहर के शहरी योजनाकारों का कहना है कि ग्रीन बेल्ट केवल सौंदर्य के लिए नहीं होती बल्कि यह वर्षा जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। फरीदाबाद जैसे तेजी से कंक्रीट होते शहर में खुली जमीन कम होती जा रही है। ऐसे में यदि ग्रीन बेल्ट पर कब्जे जारी रहे तो भविष्य में जलभराव और प्रदूषण की समस्या और गंभीर हो सकती है। बीते मानसून में ग्रेटर फरीदाबाद की कई सड़कों पर घंटों पानी जमा रहने के पीछे भी अवैध भराव और बाधित ड्रेनेज को एक बड़ा कारण माना गया था।


सरकारी जमीन पर कब्जों से करोड़ों के राजस्व का नुकसान


शहरी विकास विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सड़क किनारे और ग्रीन कॉरिडोर की जमीनें भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। यदि इन जमीनों पर स्थायी कब्जे हो जाते हैं तो बाद में सड़क चौड़ीकरण, पाइपलाइन, सीवर लाइन और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार को भारी मुआवजा और पुनर्वास खर्च उठाना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार फरीदाबाद में सरकारी जमीनों पर धीरे-धीरे बढ़ते कब्जों के कारण अप्रत्यक्ष रूप से करोड़ों रुपये के राजस्व और सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान होता है। कई मामलों में सड़क चौड़ीकरण परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहती हैं क्योंकि कब्जे हटाने में कानूनी विवाद खड़े हो जाते हैं।


सेक्टर-88 में ये होगा खास


एफएमडीए ने सेक्टर-88 रोड के साथ लगते ग्रीन बेल्ट क्षेत्र की सुरक्षा के लिए मजबूत एमएस फेंसिंग, कंक्रीट कॉलम और स्टील संरचना लगाने की योजना बनाई है। परियोजना में करीब 88 हजार किलोग्राम ट्यूबलर स्टील और 33 हजार किलोग्राम से अधिक टीएमटी सरिया इस्तेमाल होगा। इसके अलावा 27 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में झाड़ियों और अवैध मलबे की सफाई भी कराई जाएगी। एफएमडीए अधिकारियों का कहना है कि यदि यह मॉडल सफल रहा तो ग्रेटर फरीदाबाद के अन्य सेक्टरों में भी इसी तरह की स्थायी घेराबंदी लागू की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि बार-बार अतिक्रमण हटाने पर खर्च करने से बेहतर है कि सरकारी जमीनों को पहले ही सुरक्षित कर दिया जाए।



शहर के लिए इसलिए अहम है यह परियोजना


ग्रेटर फरीदाबाद आने वाले वर्षों में शहर का सबसे बड़ा रिहायशी और इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनने जा रहा है। यहां लगातार नई सोसाइटियां, चौड़ी सड़कें और सार्वजनिक परियोजनाएं विकसित हो रही हैं। ऐसे में यदि शुरुआती स्तर पर सरकारी जमीन और ग्रीन बेल्ट को संरक्षित नहीं किया गया तो भविष्य में शहर को भारी शहरी अव्यवस्था का सामना करना पड़ सकता है। सेक्टर-88 की यह परियोजना इसी चुनौती से निपटने की दिशा में पहला बड़ा प्रयोग मानी जा रही है।







हरियाली को बढ़ाने व उसके संरक्षण के लिए लगातार काम किया जा रहा है। इस परियोजना को भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
- देवेंद्र भड़ाना, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए
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