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Faridabad News: गरीब का बीपीएल से काटा नाम, बेटी की जान पर बनी

Thu, 19 Feb 2026 01:04 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 19 Feb 2026 01:04 AM IST
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Poor man's name struck off from BPL list, daughter's life at risk
गंभीर बीमारी से जूझ रही है बेटी, बीपीएल राशन कार्ड के तहत फ्री में हो सकता था इलाज
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5 लाख रुपये के इंजेक्शन सहित करीब 8 लाख रुपये इलाज में होंगे खर्च
सचिन कुमार
फरीदाबाद। बीपीएल राशन कार्ड से नाम कट जाने का खामियाजा अब गरीब परिवारों को सीधे तौर पर इलाज के मोर्चे पर भुगतना पड़ रहा है। सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने से मरीजों का उपचार बीच में अटक रहा है। परिजन डीसी, एडीसी कार्यालय व सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) के चक्कर काटने को मजबूर हैं। ऐसा ही एक मामला गुड्डी का है, जिसकी 16 वर्षीय बेटी गंभीर बीमारी से जूझ रही है। करीब एक साल पहले बच्ची की जांच में अमोनिया बढ़ने की समस्या सामने आई। शुरुआत में उसका उपचार बल्लभगढ़ के नागरिक अस्पताल से हुआ, फिर उसे बीके अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर उसे दिल्ली एम्स रेफर कर दिया गया।

प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने बोन मैरो सर्जरी की सलाह दी, लेकिन परिवार में बोन मैरो मैच नहीं हुआ। इसके बाद डॉक्टरों ने एक विशेष इंजेक्शन लगाने की सलाह दी, जिसकी लागत करीब पांच लाख रुपये बताई गई। इसके साथ अन्य उपचार खर्च मिलाकर लगभग आठ लाख रुपये तक आने का अनुमान है।
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परिवार के पास पहले से ही बीपीएल राशन कार्ड था, जिसके तहत यह इलाज और इंजेक्शन मुफ्त मिल सकता था। लेकिन कार्ड से नाम कट जाने के कारण अब यह सुविधा नहीं मिल पा रही है। गुड्डी जब दोबारा बीपीएल में नाम जुड़वाने के लिए सीएससी पहुंचीं तो उन्हें जवाब मिला कि यह प्रक्रिया उनके स्तर पर संभव नहीं है। इसके बाद वह सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। मामले में डीसी ने संज्ञान लेते हुए एक कर्मचारी को गुड्डी के घर भेजा। कर्मचारी ने कागजों और आर्थिक स्थिति का जायजा लिया, इसके बावजूद अब तक परिवार का नाम बीपीएल सूची में दोबारा शामिल नहीं किया गया। गुड्डी ने एडीसी को भी लिखित शिकायत दी है।
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आय अधिक दिखाकर बुजुर्ग का भी काटा नाम
इसी तरह राम दिनेश शर्मा नामक एक बुजुर्ग का भी नाम बीपीएल सूची से हटा दिया गया है। 60 वर्ष से अधिक आयु के राम दिनेश कोई काम नहीं करते, लेकिन अधिक आय दर्शाने के आधार पर उनका नाम काट दिया गया। नाम कटने से वह राशन नहीं ले पा रहे हैं। एक अन्य पीड़ित सुभाष ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान उनकी नौकरी चली गई थी और तब से वह बेरोजगार हैं। बावजूद इसके आय अधिक दिखाकर उनका नाम भी बीपीएल सूची से हटा दिया गया। ऐसे कई परिवार हैं जो आय के गलत आकलन या तकनीकी कारणों से बीपीएल सूची से बाहर हो गए हैं। परिणामस्वरूप न केवल राशन, बल्कि स्वास्थ्य योजनाओं और मुफ्त उपचार का लाभ भी उनसे दूर हो गया है। जरूरतमंद परिवारों का कहना है कि समय पर नाम बहाल न होने से मरीजों की जान पर बन आई है।

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मेरी बेटी की जान इलाज पर टिकी है, लेकिन बीपीएल से नाम कटने के बाद हर दरवाजे पर सिर्फ निराशा मिल रही है। - गुड्डी
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न काम करता हूं, न कमाई है, फिर भी आय ज्यादा दिखाकर राशन और हक दोनों छीन लिए गए।-राम दिनेश शर्मा
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मामला मेरे संज्ञान में है और पीड़ित परिवार का लिखित आवेदन प्राप्त हो चुका है। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं और प्रभावी तरीके से जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है ताकि पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके। - एडीसी सतबीर
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