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नगर निगम स्कूलों में चलाएगा प्लास्टिक मुक्त फरीदाबाद अभियान
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फरीदाबाद। स्वच्छ फरीदाबाद अभियान की शुरुआत निगमायुक्त यशपाल यादव ने रविवार को की। इस मौके पर एक पोस्टर भी रिलीज किया गया। इस मौके पर अतिरिक्त निगम आयुक्त इंदरजीत कुलडिया ने कहा कि अभियान का मकसद बच्चों में रिसाइकिल किए जाने वाले प्लास्टिक को कूड़े में न पहुंचने देने की आदत डालना है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी स्कूलों का सहयोग लिया जाएगा। बच्चों को जागरूक किया जाएगा।
अतिरिक्त निगमायुक्त ने बताया कि जब हम सड़कों पर चलते हैं तो, जगह-जगह कूड़ा दिखाई देता है। ये सब ऐसा कूड़ा होता है जिसकी बहुत ही कम या कोई भी कीमत नहीं मिलती है। जैसे कि दूध की खाली थैली, शहर में लाखों दूध की थैली प्रतिदिन कूड़े में या सड़कों पर फेंक दी जाती हैं। ऐसे ही चिप्स और चॉकलेट के पैकेट पाउच, पानी की बोतल इत्यादि। यह कचरे को बढ़ाने का काम करती है। सीवर लाइन को जाम करती है। साथ ही मिट्टी में दबने से बारिश के पानी को भी जमीन में जाने से रोकती है। यदि इन सब को अलग से रखा जाए तो सब मिल कर रिसाइकिल किया जा सकता है।
यही नगर निगम की पहल है। इस अभियान के अंतर्गत बच्चों को मास्टर ट्रेनर्स के द्वारा स्कूलों के सहयोग से समझाया जाएगा कि आप सबके परिवारों से ये कूड़ा आगे सड़कों पर न जाए। दस दिनों तक ये बच्चे सभी तरह का प्लास्टिक वेस्ट (कूड़ा) घर से बाहर न फेंक कर अपने अपने स्कूलों में ले कर आएंगे। जो भी बच्चा इसमें सबसे ज्यादा प्लास्टिक लेकर आएगा और निरंतर लाएगा, उसे 21 हजार, दूसरे बच्चे को 11 हजार और तीसरे को 5100 रुपये का पुरस्कार और प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। इसके साथ ही अभियान में सहयोग करने वाले अध्यापकों को भी सम्मानित किया जाएगा।
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अतिरिक्त निगमायुक्त ने बताया कि जब हम सड़कों पर चलते हैं तो, जगह-जगह कूड़ा दिखाई देता है। ये सब ऐसा कूड़ा होता है जिसकी बहुत ही कम या कोई भी कीमत नहीं मिलती है। जैसे कि दूध की खाली थैली, शहर में लाखों दूध की थैली प्रतिदिन कूड़े में या सड़कों पर फेंक दी जाती हैं। ऐसे ही चिप्स और चॉकलेट के पैकेट पाउच, पानी की बोतल इत्यादि। यह कचरे को बढ़ाने का काम करती है। सीवर लाइन को जाम करती है। साथ ही मिट्टी में दबने से बारिश के पानी को भी जमीन में जाने से रोकती है। यदि इन सब को अलग से रखा जाए तो सब मिल कर रिसाइकिल किया जा सकता है।
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यही नगर निगम की पहल है। इस अभियान के अंतर्गत बच्चों को मास्टर ट्रेनर्स के द्वारा स्कूलों के सहयोग से समझाया जाएगा कि आप सबके परिवारों से ये कूड़ा आगे सड़कों पर न जाए। दस दिनों तक ये बच्चे सभी तरह का प्लास्टिक वेस्ट (कूड़ा) घर से बाहर न फेंक कर अपने अपने स्कूलों में ले कर आएंगे। जो भी बच्चा इसमें सबसे ज्यादा प्लास्टिक लेकर आएगा और निरंतर लाएगा, उसे 21 हजार, दूसरे बच्चे को 11 हजार और तीसरे को 5100 रुपये का पुरस्कार और प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। इसके साथ ही अभियान में सहयोग करने वाले अध्यापकों को भी सम्मानित किया जाएगा।
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