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आशियाना टूटता देख बेबस नजर आए लोग

Thu, 15 Jul 2021 11:21 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 15 Jul 2021 11:21 PM IST
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People were helpless seeing the house being broken
फरीदाबाद। खोरी गांव में अवैध रूप से बने मकानों पर बृहस्पतिवार को एक बार फिर नगर निगम का बुलडोजर चला। तोड़फोड़ दस्ते ने भारी संख्या में मकान ध्वस्त किए गए। इस दौरान महिलाएं व बच्चे बेबस नजर आए। लोगों के चेहरों पर चिंता की लकीरें नजर आईं। वे अपने घर को टूटता देख बिलखते दिखे। लोगों को अब अपने घरों को बचने की कोई उम्मीद नहीं बची। ऐसे में केवल भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने सात जून को नगर निगम को अरावली वन क्षेत्र में बसी खोरी गांव में तोड़फोड़ के आदेश जारी किए गए थे। निगम को छह हफ्तों में कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। आदेश आने के बाद से नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन लगातार गांव में सक्रिय है। शुरुआत में मुनादी करवा कर गांव को खाली करवाया गया। जिसमें कुछ ने स्वेच्छा से अपना अतिक्रमण हटा लिया तो कुछ लोग स्वयं से हटाने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद बुधवार को निगम ने तोड़फोड़ कार्रवाई शुरू की, जो दूसरी दिन भी जारी रही। जेसीबी से अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया।
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गांव खोरी में मकान बनाकर वर्षों रह रहे लोगों के सामने ही जब आशियाना टूटने लगा तो आंखों से आंसू छलक पड़े। सारिका, रमेश गुप्ता, रानी, रेखा और संगीता ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि दुख हो या सुख। अपने परिवार के साथ इसी मकान में रहकर गुजारा किया। आज अपने ही सामने इसे गिरता देख बड़ा कष्ट हो रहा है। मकान तो गिर गया, अब आगे कैसे जीविका चलेगी। यह चिंता सता रही है।
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लोगों से बातचीत
खोरी में करीब 20 वर्षों से रह रहे थे। एक-एक पैसा जोड़कर किसी तरह रहने के लिए घर बनाया। नगर निगम ने उनकी एक न सुनी और पल भर में उनकी आशियाने को ध्वस्त कर दिया। अब वह रहने के लिए कहां जाएं। यह समझ नहीं आ रहा। - सारिका, स्थानीय निवासी
सरकार का नारा था कि वर्ष 2022 तक देश से गरीबी को हटा देगे। लेकिन सरकार गरीबी को नहीं गरीबों को उजाड़ रही है। घर उजड़ने के साथ बच्चों का भविष्य भी अंधकारमय हो गया है। - रानी, स्थानीय निवासी
मजबूरी में अपना आशियाना छोड़कर जाना पड़ रहा है। घर टूटने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ। सरकार को इसकी भरपाई करनी चाहिए। सरकार लोगों को मकान की कीमत दे या पुनर्वास दे। - रमेश गुप्ता, स्थानीय निवासी
सरकार से भरोसा उठ गया है। अब केबल भगवान से ही प्रार्थना है कि उनके मकानों को टूटने से बचा ले। पति ने रिक्शा चलाकर किसी तरह चार लाख रुपये में जमीन खरीद कर मकान बनाया। रोजाना मर-मर कर जी रहे हैं। गर्दन पर तलवार लटकी है पता नहीं कब टूट जाएं। - रेखा

घर में बड़ी बेटी की शादी करनी थी। उनकी शादी के लिए कुछ पैसे जोड़े थे। वह सब अब किराये के मकान में खर्च हो जाएंगे। बच्चों की पढ़ाई चौपट हो गई। - संगीता, स्थानीय निवासी
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