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Faridabad News: कूड़ा घर के विरोध में सेक्टर- 56 में लोगों ने निकाला कैंडल मार्च
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मंत्री और निगम के अधिकारियों ने नहीं लिया संज्ञान तो ग्रामीण खटखटाएंगे हाईकोर्ट का दरवाजा
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। प्रतापगढ़ में बने कूड़ा घर के विरोध में रविवार को सेक्टर- 56 और 56 ए सहित करीब सात गांवों के पांच हजार से अधिक लोग सड़क पर उतरे और शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि गांवों से लोग पलायन कर रहे हैं। कूड़े से निकलने वाली जहरीली गैस और दुर्गंध के कारण लोग बच्चों को रिश्तेदारों के घर भेजने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी जिले के मंत्री और निगम अधिकारी नींद से नहीं जागे तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
सेक्टर- 56 के आरडब्ल्यूए प्रधान सतपाल सिंह और निवासी उत्तम अग्रवाल ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से कूड़ा घर हटाने को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। निगम के अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन देकर एसटीपी के नाम पर गांव की जमीन ली थी। इसके बाद यहां पर एसटीपी न लगाकर कूड़ा निस्तारण प्लांट लगा दिया। जब लोगों ने इसका विरोध किया तो अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों ने केवल 40 टन कूड़ा डालने की बात कहकर मामला रफा दफा कर दिया। इसके अलावा स्थानीय निवासियों ने बताया कि सात गांवों और दो सेक्टरों के बीच कूड़ा घर बना हुआ है। इससे स्कूल और कई खेत भी लगते हैं। हालात अब इतने खराब हो गए हैं कि कूडा घर के आसपास बसे गांवों में सप्लाई होने वाला पानी भी गंदा आ रहा है। स्कूल और घर के अंदर तक बदबू आ रही है। यहां हर रोज 140 टन कूड़ा डाला जा रहा है। बंधवाड़ी की तरह 30 फीट ऊंचा कूड़े का पहाड़ खड़ा हो चुका है। यहां कूड़ा घर बनने से करीब पांच लाख से अधिक लोगों का जीवन खतरे में पड़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में सभी जनप्रतिनिधियों और निगम अधिकारियों से बातचीत कर चुके हैं लेकिन कोई भी कूड़ा घर को दूसरी जगह शिफ्ट करने को लेकर काम नहीं करना चाहता।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। प्रतापगढ़ में बने कूड़ा घर के विरोध में रविवार को सेक्टर- 56 और 56 ए सहित करीब सात गांवों के पांच हजार से अधिक लोग सड़क पर उतरे और शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि गांवों से लोग पलायन कर रहे हैं। कूड़े से निकलने वाली जहरीली गैस और दुर्गंध के कारण लोग बच्चों को रिश्तेदारों के घर भेजने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी जिले के मंत्री और निगम अधिकारी नींद से नहीं जागे तो वह हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
सेक्टर- 56 के आरडब्ल्यूए प्रधान सतपाल सिंह और निवासी उत्तम अग्रवाल ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से कूड़ा घर हटाने को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। निगम के अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन देकर एसटीपी के नाम पर गांव की जमीन ली थी। इसके बाद यहां पर एसटीपी न लगाकर कूड़ा निस्तारण प्लांट लगा दिया। जब लोगों ने इसका विरोध किया तो अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों ने केवल 40 टन कूड़ा डालने की बात कहकर मामला रफा दफा कर दिया। इसके अलावा स्थानीय निवासियों ने बताया कि सात गांवों और दो सेक्टरों के बीच कूड़ा घर बना हुआ है। इससे स्कूल और कई खेत भी लगते हैं। हालात अब इतने खराब हो गए हैं कि कूडा घर के आसपास बसे गांवों में सप्लाई होने वाला पानी भी गंदा आ रहा है। स्कूल और घर के अंदर तक बदबू आ रही है। यहां हर रोज 140 टन कूड़ा डाला जा रहा है। बंधवाड़ी की तरह 30 फीट ऊंचा कूड़े का पहाड़ खड़ा हो चुका है। यहां कूड़ा घर बनने से करीब पांच लाख से अधिक लोगों का जीवन खतरे में पड़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में सभी जनप्रतिनिधियों और निगम अधिकारियों से बातचीत कर चुके हैं लेकिन कोई भी कूड़ा घर को दूसरी जगह शिफ्ट करने को लेकर काम नहीं करना चाहता।
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