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आशियाना बचाने के लिए कानूनी विकल्प तलाश रहे लोग

Mon, 28 Jun 2021 10:52 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 28 Jun 2021 10:52 PM IST
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People looking for legal options to save the house
फरीदाबाद। एक तरफ अरावली वन क्षेत्र में अवैध रूप से बसे खोरी गांव में तोड़फोड़ को लेकर नगर निगम और जिला प्रशासन कार्रवाई की तैयारी में हैं। वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग अपना घर बचाने के लिए फिर से कानूनी विकल्प तलाशने में जुट गए हैं। कुछ स्थानीय लोग इस संबंध में सक्रियता दिखा रहे हैं, हालांकि तोड़फोड़ की कार्रवाई रद्द करने की मांग को लेकर लगाई गई याचिका सुप्रीम कोर्ट में पहले ही खारिज हो चुकी है। फिर भी लोगों को उम्मीद है कि कहीं न कहीं कोई न कोई विकल्प होगा, जो उनके सर पर छत बनाए रखने में मददगार साबित होगा।
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दिल्ली और हरियाणा के फरीदाबाद बॉर्डर पर वन क्षेत्र और नगर निगम की जमीन पर खोरी गांव बसा है। नगर निगम की रिपोर्ट के अनुसार गांव में 125 एकड़ जमीन है। जिसमें से 80 एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कब्जा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस कब्जे को खाली कराया जाएगा। कोर्ट का नगर निगम और हरियाणा सरकार को आदेश है कि खोरी में तोड़फोड़ करके फिर से जंगल बनाया जाए। ऐसे में तोड़फोड़ से पहले खोरी गांव के लोगों में खौफ का माहौल बन गया है।
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नोटिस और मुनादी का काम जारी
नगर निगम प्रशासन ने गांव में मुनादी करवाकर लोगों को अपने मकान खुद हटाने के आदेश दिए हैं। इसके लिए बकायदा नोटिस भी चस्पा किए गए हैं। इसके साथ ही लगातार मुनादी कराई जा रही है। काफी लोगों ने अब तक अपने घरों को खाली कर दिया है, वहीं कई लोग अभी भी ऐसे हैं जो यहां से जाने को तैयार नहीं है। लोगों का कहना है कि अपना आशियाना बचाने के लिए सरक ार और प्रशासन से लड़ेंगे। अपनी बात कोर्ट में रखेंगे।
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कोर्ट की एक बार फिर लेंगे शरण
गांववासियों का कहना है कि सरकार तोड़फोड़ से पहले उनके लिए वैकल्पिक जगह की व्यवस्था करे। पिछले दिनों संघर्ष समिति ने तोड़फोड़ को रोकने की मांग की थी। जिसको सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है। अब एक बार फिर हिंदूवादी संगठन ने गांव को बचाने का प्रयास शुरू किया है। लोगों के बीच सक्रिय रिजवान अली ने बताया कि वह इसके लिए कानूनी राय ले रहे हैं। फरवरी में उन्होंने स्थानीय लोगों की 35 हजार सालाना आय के आधार पर लीगल सर्विस प्राधिकरण में एफिडेविट जमा किया था। इसी के आधार पर वह जल्द एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में डालेंगे। उधर, बंधुआ मजदूर मुक्ति संगठन के निर्मल गोराना का कहना है कि स्थानीय लोग अधिक पढ़े-लिखे नहीं हैं। ऐसे में कई लोग उन्हें भ्रम में डालकर कानूनी मदद के नाम पर पैसे ठगने में लगे हैं। उन्होंने अपील की कि गांव वासी इस तरह के झांसे में न आएं।

भूमाफिया पर कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने कहा कि नगर निगम और जिला प्रशासन उनके आशियाने का उजाड़ने की तैयारी कर रहा है, लेकिन उन भूमाफिया पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिन्होंने भोले-भाले लोगों को फंसा दिया। तोड़फोड़ से पहले भूमाफिया पर भी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि जब बात जंगल बहाल करने की है, तो खोरी गांव के अलावा भी अरावली में कई जगह वन क्षेत्र में भूमाफिया ने प्लाटिंग की हुई है। वहां भी कार्रवाई की जाए।
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