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Faridabad News: अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को डेढ़ माह का इंतजार
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अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को डेढ़ माह का इंतजार
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मरीजों को हो रही परेशानी, रोजाना करीब 4500 मरीज आते हैं इलाज के लिए
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। उन्हें एक से डेढ़ माह की वेटिंग मिल रही है। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एनआईटी-तीन स्थित ईएसआईसी अस्पताल से करीब साढ़े छह लाख कार्ड धारक (आईपी) जुड़े हुए है। फरीदाबाद के अलावा, गुरुग्राम, पलवल, होडल, हथीन, मेवात, सोनीपत, पानीपत, रेवाड़ी आदि जिलों से रोजाना करीब 4500 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। निजी अस्पतालों की तर्ज पर अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं जैसे कैंसर मरीजों का इलाज, हृदय रोगियों का इलाज, एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी समेत इलाज की कई अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू कर दी गई हैं। इससे दूसरे राज्यों के मरीज भी यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। जिससे अल्ट्रासाउंड केंद्र पर मरीजों की भीड़ काफी बढ़ गई है। रोजाना करीब 70 से 80 मरीजों के अल्ट्रासाउंड होते है। स्त्री विभाग में महिलाओं के लिए अलग से अल्ट्रासाउंड मशीन लगी हुई है। इसके बावजूद मरीजों को राहत नहीं मिल रही है।
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मजबूरी में निजी सेंटर से करवाने पड़ते अल्ट्रासाउंड
अस्पताल के अल्ट्रासाउंड केंद्र में पेट संबंधी बीमारियों और स्त्री रोग से संबंधित अनेक प्रकार के मरीज पहुंचते हैं। इनमें कई मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें तुरंत अल्ट्रासाउंड की जरूरत नहीं होती है। उन्हें एक से डेढ़ माह की डेट दे दी जाती है। ऐसे में मरीजों को निजी सेंटरों पर पैसे देकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। जिससे उन्हें काफी दिक्कत होती है।
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मरीजों से बातचीत
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के एक से डेढ़ माह की तारीख मिलती है, जबकि डॉक्टर कहते हैं दो दिन में रिपोर्ट दिखाओ। ऐसे में निजी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। - दिनेश नागर, निवासी, इंद्रा कॉम्प्लेक्स
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अस्पताल में मशीनों की संख्या बढ़नी चाहिए। जिससे मरीजों को राहत मिल सके। उन्हें बाहर निजी सेंटरों के धक्के न खाने पड़े। - गोविंद गर्ग, निवासी, ओल्ड फरीदाबाद
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मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास जारी है। मरीजों की सहायता के लिए गायनी विभाग में एक अलग मशीन लगाई गई। जरूरत पड़ने पर मशीनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। - डॉ. अनिल पांडे, चिकित्सा अधीक्षक, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल
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ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में मरीजों को हो रही परेशानी, रोजाना करीब 4500 मरीज आते हैं इलाज के लिए
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। उन्हें एक से डेढ़ माह की वेटिंग मिल रही है। इससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एनआईटी-तीन स्थित ईएसआईसी अस्पताल से करीब साढ़े छह लाख कार्ड धारक (आईपी) जुड़े हुए है। फरीदाबाद के अलावा, गुरुग्राम, पलवल, होडल, हथीन, मेवात, सोनीपत, पानीपत, रेवाड़ी आदि जिलों से रोजाना करीब 4500 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। निजी अस्पतालों की तर्ज पर अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं जैसे कैंसर मरीजों का इलाज, हृदय रोगियों का इलाज, एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी समेत इलाज की कई अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू कर दी गई हैं। इससे दूसरे राज्यों के मरीज भी यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं। जिससे अल्ट्रासाउंड केंद्र पर मरीजों की भीड़ काफी बढ़ गई है। रोजाना करीब 70 से 80 मरीजों के अल्ट्रासाउंड होते है। स्त्री विभाग में महिलाओं के लिए अलग से अल्ट्रासाउंड मशीन लगी हुई है। इसके बावजूद मरीजों को राहत नहीं मिल रही है।
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मजबूरी में निजी सेंटर से करवाने पड़ते अल्ट्रासाउंड
अस्पताल के अल्ट्रासाउंड केंद्र में पेट संबंधी बीमारियों और स्त्री रोग से संबंधित अनेक प्रकार के मरीज पहुंचते हैं। इनमें कई मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें तुरंत अल्ट्रासाउंड की जरूरत नहीं होती है। उन्हें एक से डेढ़ माह की डेट दे दी जाती है। ऐसे में मरीजों को निजी सेंटरों पर पैसे देकर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। जिससे उन्हें काफी दिक्कत होती है।
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मरीजों से बातचीत
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के एक से डेढ़ माह की तारीख मिलती है, जबकि डॉक्टर कहते हैं दो दिन में रिपोर्ट दिखाओ। ऐसे में निजी सेंटर पर अल्ट्रासाउंड करवाना पड़ता है। - दिनेश नागर, निवासी, इंद्रा कॉम्प्लेक्स
अस्पताल में मशीनों की संख्या बढ़नी चाहिए। जिससे मरीजों को राहत मिल सके। उन्हें बाहर निजी सेंटरों के धक्के न खाने पड़े। - गोविंद गर्ग, निवासी, ओल्ड फरीदाबाद
मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास जारी है। मरीजों की सहायता के लिए गायनी विभाग में एक अलग मशीन लगाई गई। जरूरत पड़ने पर मशीनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। - डॉ. अनिल पांडे, चिकित्सा अधीक्षक, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल