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Faridabad News: ऑपरेशन के लिए मरीजों को मिल रही ढाई महीने बाद की तारीख
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बीके अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से प्रभावित हो रही स्वास्थ्य सेवाएं
कई गंभीर मरीज निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर
भारती दुबे
फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का असर अब मरीजों के ऑपरेशन पर भी पड़ रहा है। अस्पताल में ऑपरेशन कराने के लिए मरीजों को दो से ढाई महीने बाद की तारीख मिल रही है। स्थिति यह है कि अस्पताल में होने वाले छोटे-मोटे ऑपरेशन के लिए भी मरीजों को ढाई महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में चार विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बताई जा रही है। वर्तमान में जो चिकित्सक ओपीडी में बैठ रहे हैं, वही अपनी ड्यूटी के साथ ऑपरेशन भी कर रहे हैं। इससे ऑपरेशन की संख्या सीमित हो रही है और मरीजों को लंबी तारीख दी जा रही है। कई मरीजों को ऑपरेशन के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
बीके अस्पताल में पथरी, घुटने और कूल्हे के प्रत्यारोपण, मोतियाबिंद समेत कई तरह के ऑपरेशन किए जाते हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी और जरूरत के अनुसार अन्य ऑपरेशन भी किए जाते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण इन सेवाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है।
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मरीजों का कहना है कि कई जरूरी ऑपरेशन अस्पताल में नहीं हो पा रहे हैं। कुछ ऑपरेशन नहीं होने के कारण मरीजों को दवाइयां देकर वापस भेज दिया जाता है या दूसरे अस्पताल में जाने की सलाह दी जाती है। इससे उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
किडनी-लिवर के गंभीर मरीजों को किया जा रहा रेफर
मरीजों के अनुसार किडनी और लिवर से संबंधित गंभीर मामलों में भी उन्हें रेफर किया जा रहा है। अस्पताल का हार्ट सेंटर भी बंद होने से हृदय रोगियों को उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कई गंभीर मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पताल जाना पड़ता है।
निजी अस्पतालों पर बढ़ी निर्भरता
सरकारी अस्पताल में समय पर ऑपरेशन नहीं होने और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों की निजी अस्पतालों पर निर्भरता बढ़ रही है। निजी अस्पतालों में उपचार और ऑपरेशन का खर्च अधिक होने से इसका सीधा असर मरीजों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आने के बाद भी यदि लंबी तारीख या रेफर किया जाता है तो उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने और बंद पड़ी सेवाओं को जल्द शुरू करने की मांग की है, ताकि उन्हें समय पर उपचार मिल सके।
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मरीजों से बातचीत
जिले का सबसे बड़ा नागरिक अस्पताल है, लेकिन सुविधाएं न के बराबर हैं। सरकार को जरूरतमंद लोगों को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं का विस्तार करना चाहिए। - असलम, डबुआ कॉलोनी
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मरीज बड़ी संख्या में इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन रेफर करने के अलावा अस्पताल की ओर से कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। - श्यामलाल, सेक्टर- 23
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कई गंभीर मरीज निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर
भारती दुबे
फरीदाबाद। बीके नागरिक अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी का असर अब मरीजों के ऑपरेशन पर भी पड़ रहा है। अस्पताल में ऑपरेशन कराने के लिए मरीजों को दो से ढाई महीने बाद की तारीख मिल रही है। स्थिति यह है कि अस्पताल में होने वाले छोटे-मोटे ऑपरेशन के लिए भी मरीजों को ढाई महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल में चार विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बताई जा रही है। वर्तमान में जो चिकित्सक ओपीडी में बैठ रहे हैं, वही अपनी ड्यूटी के साथ ऑपरेशन भी कर रहे हैं। इससे ऑपरेशन की संख्या सीमित हो रही है और मरीजों को लंबी तारीख दी जा रही है। कई मरीजों को ऑपरेशन के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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बीके अस्पताल में पथरी, घुटने और कूल्हे के प्रत्यारोपण, मोतियाबिंद समेत कई तरह के ऑपरेशन किए जाते हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी और जरूरत के अनुसार अन्य ऑपरेशन भी किए जाते हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण इन सेवाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है।
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मरीजों का कहना है कि कई जरूरी ऑपरेशन अस्पताल में नहीं हो पा रहे हैं। कुछ ऑपरेशन नहीं होने के कारण मरीजों को दवाइयां देकर वापस भेज दिया जाता है या दूसरे अस्पताल में जाने की सलाह दी जाती है। इससे उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
किडनी-लिवर के गंभीर मरीजों को किया जा रहा रेफर
मरीजों के अनुसार किडनी और लिवर से संबंधित गंभीर मामलों में भी उन्हें रेफर किया जा रहा है। अस्पताल का हार्ट सेंटर भी बंद होने से हृदय रोगियों को उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कई गंभीर मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पताल जाना पड़ता है।
निजी अस्पतालों पर बढ़ी निर्भरता
सरकारी अस्पताल में समय पर ऑपरेशन नहीं होने और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों की निजी अस्पतालों पर निर्भरता बढ़ रही है। निजी अस्पतालों में उपचार और ऑपरेशन का खर्च अधिक होने से इसका सीधा असर मरीजों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आने के बाद भी यदि लंबी तारीख या रेफर किया जाता है तो उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग से अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर करने और बंद पड़ी सेवाओं को जल्द शुरू करने की मांग की है, ताकि उन्हें समय पर उपचार मिल सके।
मरीजों से बातचीत
जिले का सबसे बड़ा नागरिक अस्पताल है, लेकिन सुविधाएं न के बराबर हैं। सरकार को जरूरतमंद लोगों को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं का विस्तार करना चाहिए। - असलम, डबुआ कॉलोनी
मरीज बड़ी संख्या में इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। लेकिन रेफर करने के अलावा अस्पताल की ओर से कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। - श्यामलाल, सेक्टर- 23