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Faridabad News: बीके अस्पताल में डेढ़ साल से बंद है ऑक्सीजन प्लांट
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प्लांट शुरू करने में करीब 10 लाख रुपये का आएगा खर्च
प्रशांत चौहान
फरीदाबाद। बीके अस्पताल में कोरोना काल में बना एक हजार लीटर प्रति मिनट (एलपीएम) का ऑक्सीजन प्लांट डेढ़ साल से बंद पड़ा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को मरीजों के लिए पैसे खर्च कर ऑक्सीजन खरीदनी पड़ रही है। जिससे एक तरफ मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है वहीं सरकार के राजस्व को भी नुकसान पहुंच रहा है। इसके साथ ही प्लांट बंद होने पर निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि ऑक्सीजन प्लांट को दोबारा से शुरू करने के लिए करीब 10 लाख रुपये का खर्च आएगा।
बीके अस्पताल में दो ऑक्सीजन प्लांट मौजूद हैं जिनमें से एक 200 एलपीएम और दूसरा एक हजार एलपीएम का है। इन दोनों प्लांटों से अस्पताल में ऑक्सीजन की पूर्ति हो जाती थी। लेकिन एक हजार एलपीएम वाले ऑक्सीजन प्लांट में खराबी आने के कारण उसे बंद कर दिया गया है। वहीं, अस्पताल में मौजूद 200 एलपीएम के प्लांट की ऑक्सीजन बनाने की खपत कम है। जिस वजह से अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी नहीं हो पाती है। इसके लिए अस्पताल को निजी कंपनियों से ऑक्सीजन खरीदनी पड़ रही है। इन सभी कारणों से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीजों को अस्पताल में सुविधाओं की कमी के कारण दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है। इसके साथ ही ऑक्सीजन बाहर से खरीदने पर सरकार को भी नुकसान हो रहा है। वहीं, प्लांट को सही कराने के लिए करीब 10 लाख रुपये के सामान की जरूरत है। जिसके लिए सरकार से फंड की मांग की गई है।
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हर महीने 25 से 30 हजार रुपये की खरीदनी पड़ रही ऑक्सीजन
अस्पताल में कोरोना काल में बने प्लांट में खराबी आने से ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी नहीं हो पा रही है। इस दौरान अस्पताल हर महीने करीब 25 से 30 हजार रुपये की ऑक्सीजन खरीद रहा है। इससे सरकार को काफी नुकसान हो रहा है।
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वर्जन
इस मामले में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक को जानकारी दे दी गई है। उनसे प्लांट को सही करने के लिए फंड की मांग की गई है। फंड मिलते ही इसे दोबारा से शुरू करा दिया जाएगा। - सविता यादव, प्रधान चिकित्सा अधिकारी
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प्रशांत चौहान
फरीदाबाद। बीके अस्पताल में कोरोना काल में बना एक हजार लीटर प्रति मिनट (एलपीएम) का ऑक्सीजन प्लांट डेढ़ साल से बंद पड़ा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को मरीजों के लिए पैसे खर्च कर ऑक्सीजन खरीदनी पड़ रही है। जिससे एक तरफ मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है वहीं सरकार के राजस्व को भी नुकसान पहुंच रहा है। इसके साथ ही प्लांट बंद होने पर निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि ऑक्सीजन प्लांट को दोबारा से शुरू करने के लिए करीब 10 लाख रुपये का खर्च आएगा।
बीके अस्पताल में दो ऑक्सीजन प्लांट मौजूद हैं जिनमें से एक 200 एलपीएम और दूसरा एक हजार एलपीएम का है। इन दोनों प्लांटों से अस्पताल में ऑक्सीजन की पूर्ति हो जाती थी। लेकिन एक हजार एलपीएम वाले ऑक्सीजन प्लांट में खराबी आने के कारण उसे बंद कर दिया गया है। वहीं, अस्पताल में मौजूद 200 एलपीएम के प्लांट की ऑक्सीजन बनाने की खपत कम है। जिस वजह से अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी नहीं हो पाती है। इसके लिए अस्पताल को निजी कंपनियों से ऑक्सीजन खरीदनी पड़ रही है। इन सभी कारणों से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीजों को अस्पताल में सुविधाओं की कमी के कारण दिल्ली के लिए रेफर कर दिया जाता है। इसके साथ ही ऑक्सीजन बाहर से खरीदने पर सरकार को भी नुकसान हो रहा है। वहीं, प्लांट को सही कराने के लिए करीब 10 लाख रुपये के सामान की जरूरत है। जिसके लिए सरकार से फंड की मांग की गई है।
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हर महीने 25 से 30 हजार रुपये की खरीदनी पड़ रही ऑक्सीजन
अस्पताल में कोरोना काल में बने प्लांट में खराबी आने से ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी नहीं हो पा रही है। इस दौरान अस्पताल हर महीने करीब 25 से 30 हजार रुपये की ऑक्सीजन खरीद रहा है। इससे सरकार को काफी नुकसान हो रहा है।
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वर्जन
इस मामले में स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक को जानकारी दे दी गई है। उनसे प्लांट को सही करने के लिए फंड की मांग की गई है। फंड मिलते ही इसे दोबारा से शुरू करा दिया जाएगा। - सविता यादव, प्रधान चिकित्सा अधिकारी