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Faridabad News: संगठित साइबर ठगी निजी विवाद नहीं, समझौते के बावजूद जमानत से इन्कार

Mon, 24 Aug 2026 10:59 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2026 10:59 PM IST
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Organized cyber fraud is not a private dispute; bail denied despite a settlement.
अदालत ने कहा- ऐसे अपराध का असर समाज और डिजिटल व्यवस्था पर पड़ता है
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय शर्मा की अदालत ने कहा कि संगठित साइबर ठगी निजी विवाद नहीं है और शिकायतकर्ता से समझौता होने के बावजूद आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने फ्लोरोन गैस के नाम पर 5.40 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में आरोपी विनीत की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने कहा कि ऐसे अपराध का असर केवल पीड़ित तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज के साथ डिजिटल और वित्तीय व्यवस्था पर भी पड़ता है। आरोपी विनीत हाथरस जिले के गांव झग्रार का निवासी है और वर्तमान में ग्रेटर नोएडा में रह रहा था। उसके खिलाफ थाना साइबर अपराध बल्लभगढ़ में 10 अप्रैल को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता मोहन लाल ऑटोमोबाइल कारोबार करते हैं। 26 मार्च को उन्होंने इंडिया मार्ट के कस्टमर केयर नंबर पर फ्लोरोन गैस के संबंध में जानकारी ली थी। इसके बाद कथित विक्रेता ने संपर्क कर 50 बॉक्स का सौदा 5.40 लाख रुपये में किया। शिकायतकर्ता ने पूरी रकम 11 लेन-देन में पेटीएम के माध्यम से भेज दी। सामान नहीं पहुंचा और कथित विक्रेता व चालक के मोबाइल बंद हो गए।
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जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता को दी गई चालक और वाहन की जानकारी के साथ कथित चालान भी फर्जी था। फ्लोरोन गैस कंपनी ने संबंधित फर्म को अधिकृत विक्रेता नहीं बताया। इसके बाद शिकायतकर्ता को ठगी का पता चला। पुलिस ने विनीत को 24 जुलाई को गिरफ्तार किया था। अदालत के आदेश के अनुसार, आरोपी से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन और सिम बरामद हुए हैं। जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और अन्य आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए हैं। सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने बताया कि आरोपियों के परिजनों से समझौता हो चुका है और उसे 5.40 लाख रुपये वापस मिल गए हैं। उसने जमानत पर आपत्ति नहीं जताई।
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