{"_id":"68c1b6426689bf51600af57d","slug":"on-september-14-we-will-protest-at-the-district-headquarters-regarding-our-demands-faridabad-news-c-353-1-fb21001-100090-2025-09-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: 14 सितंबर को जिला मुख्यालय पर मांगों को लेकर करेंगे प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: 14 सितंबर को जिला मुख्यालय पर मांगों को लेकर करेंगे प्रदर्शन
विज्ञापन
बल्लभगढ़। श्रम कानून में किए गए संशोधनों को रद्द करने, सभी फैक्ट्रियों में कार्यरत श्रमिकों को आवास की सुविधा प्रदान करने, कैजुअल और ठेका श्रमिकों को इएसआई और प्रोविडेंट फंड की सुविधा प्रदान करने आदि मांगों को लेकर सेंटर आफ ट्रेड यूनियन जिला कमेटी ने बैठक ली। बैठक में उन्होंने कहा कि आगामी 14 सितंबर को जिला मुख्यालय पर होने वाले प्रदर्शन में भारत गियर लिमिटेड के सभी कर्मचारी भाग लेंगे। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधान रवि ने की।
इस अवसर पर सीटू के जिला प्रधान निरंतर पराशर और जिला सचिव वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने बताया कि इस सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में न्यूनतम वेतन में संशोधन नहीं किया। यदि भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश सरकार 2015 में श्रमिकों के वेतन में संशोधन कर देती, तो आज हरियाणा के मजदूरों का वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह होता। सरकार ने श्रमिकों का वेतन बढ़ाने के बजाय श्रमिकों के काम करने के घंटे बढ़ा दिए, लेकिन मजदूरी में इजाफा नहीं किया।
मजदूर चाहे कारखाने का हो, रोज कमाकर खाने वाला दिहाड़ीदार मजदूर हो, सभी के श्रम की मालिक लूट कर रहे हैं। कैजुअल और ठेका प्रथा में कार्यरत मजदूरों को केवल 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी मिलती है। महिला कुली को तो कहीं पर 400 कहीं पर साढ़े चार सौ ही रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जा रहे हैं। सीटू के नेताओं को आश्वासन दिया कि 14 सितंबर को सेक्टर 12 में होने वाली विरोध सभा में बड़ी संख्या में श्रमिक भी भाग लेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस अवसर पर सीटू के जिला प्रधान निरंतर पराशर और जिला सचिव वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने बताया कि इस सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में न्यूनतम वेतन में संशोधन नहीं किया। यदि भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश सरकार 2015 में श्रमिकों के वेतन में संशोधन कर देती, तो आज हरियाणा के मजदूरों का वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह होता। सरकार ने श्रमिकों का वेतन बढ़ाने के बजाय श्रमिकों के काम करने के घंटे बढ़ा दिए, लेकिन मजदूरी में इजाफा नहीं किया।
विज्ञापन
मजदूर चाहे कारखाने का हो, रोज कमाकर खाने वाला दिहाड़ीदार मजदूर हो, सभी के श्रम की मालिक लूट कर रहे हैं। कैजुअल और ठेका प्रथा में कार्यरत मजदूरों को केवल 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी मिलती है। महिला कुली को तो कहीं पर 400 कहीं पर साढ़े चार सौ ही रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जा रहे हैं। सीटू के नेताओं को आश्वासन दिया कि 14 सितंबर को सेक्टर 12 में होने वाली विरोध सभा में बड़ी संख्या में श्रमिक भी भाग लेंगे।
विज्ञापन