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Faridabad News: पोषण की कमी से बच्चों की लंबाई-वजन पर पड़ रहा असर
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बीके अस्पताल की ओपीडी में रोजाना पहुंच रहे करीब 15 बच्चे, नौ को भर्ती की सलाह
भारती दुबे
फरीदाबाद। खानपान में पोषक तत्वों की कमी और जंक फूड की बढ़ती आदत बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है। इसका असर बच्चों के वजन और लंबाई पर भी दिखाई दे रहा है। बीके अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में रोजाना करीब 15 ऐसे बच्चे पहुंच रहे हैं, जिनमें पोषण की कमी के कारण वजन कम, कमजोरी और लंबाई अपेक्षाकृत कम बढ़ने की समस्या सामने आ रही है।
ऐसे में इनमें से करीब नौ बच्चों को चिकित्सक पोषित पुनर्वास केंद्र में भर्ती होने की सलाह देते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशांत ने बताया कि छह माह से करीब छह साल तक की उम्र के बच्चों में पोषण की कमी की समस्या अधिक देखने को मिल रही है। बच्चों के भोजन में पौष्टिक आहार की कमी इसका प्रमुख कारण है। कई बच्चे घर में बनी हरी सब्जियों और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों से दूरी बना रहे हैं और बाहर का जंक फूड अधिक पसंद कर रहे हैं। इससे शरीर को उम्र के अनुसार जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते।
बच्चों को किया जाता है भर्ती
बीके अस्पताल के पहले तल पर बने पोषित पुनर्वास केंद्र की योगिता ने बताया कि कम वजन, कम लंबाई और अधिक कमजोरी वाले बच्चों को केंद्र में भर्ती किया जाता है। रोजाना औसतन करीब पांच बच्चे पोषण संबंधी समस्या के कारण भर्ती होते हैं। अस्पताल में महीने में करीब 50 बच्चे भर्ती किए जाते हैं। कई बार यह संख्या इससे भी अधिक हो जाती है। हालांकि, कुछ बच्चों की स्थिति और जरूरत को देखते हुए काउंसलिंग के बाद अभिभावकों को घर पर ही पोषण संबंधी देखभाल के लिए समझाकर वापस भेज दिया जाता है।
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एफ-75 और 100 से दिया जाता है पोषण
पोषित पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चों को उनकी स्थिति के अनुसार विशेष फॉर्मूला आहार एफ-75 और एफ-100 दिया जाता है। बच्चों को सामान्य तौर पर करीब तीन दिन निगरानी में रखा जाता है। यदि निर्धारित अवधि में स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं होता तो जरूरत के अनुसार भर्ती की अवधि बढ़ा दी जाती है। इस दौरान बच्चे के वजन और स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाती है।
अभिभावकों को मिलती है प्रोत्साहन राशि
केंद्र में बच्चे को भर्ती कराने वाले अभिभावक को एक दिन के लिए 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। इसके साथ ही चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी अभिभावकों को बच्चों के भोजन, साफ-सफाई और नियमित देखभाल के बारे में जानकारी देते हैं, ताकि अस्पताल से छुट्टी के बाद भी बच्चे के पोषण में सुधार जारी रहे। चिकित्सकों के अनुसार बच्चों को जंक फूड से दूर रखकर घर का ताजा और संतुलित भोजन देना जरूरी है। भोजन में हरी सब्जियां, दाल, दूध एवं अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करने से बच्चों के शारीरिक विकास में मदद मिलती है।
ये हैं कुपोषण के प्रमुख लक्षण
उम्र के अनुसार वजन कम होना।
लंबाई का अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ना।
शरीर में कमजोरी और सुस्ती।
एनीमिया की समस्या।
बार-बार बीमार पड़ना ।
भूख कम लगना।
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भारती दुबे
फरीदाबाद। खानपान में पोषक तत्वों की कमी और जंक फूड की बढ़ती आदत बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रही है। इसका असर बच्चों के वजन और लंबाई पर भी दिखाई दे रहा है। बीके अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में रोजाना करीब 15 ऐसे बच्चे पहुंच रहे हैं, जिनमें पोषण की कमी के कारण वजन कम, कमजोरी और लंबाई अपेक्षाकृत कम बढ़ने की समस्या सामने आ रही है।
ऐसे में इनमें से करीब नौ बच्चों को चिकित्सक पोषित पुनर्वास केंद्र में भर्ती होने की सलाह देते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुशांत ने बताया कि छह माह से करीब छह साल तक की उम्र के बच्चों में पोषण की कमी की समस्या अधिक देखने को मिल रही है। बच्चों के भोजन में पौष्टिक आहार की कमी इसका प्रमुख कारण है। कई बच्चे घर में बनी हरी सब्जियों और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों से दूरी बना रहे हैं और बाहर का जंक फूड अधिक पसंद कर रहे हैं। इससे शरीर को उम्र के अनुसार जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते।
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बच्चों को किया जाता है भर्ती
बीके अस्पताल के पहले तल पर बने पोषित पुनर्वास केंद्र की योगिता ने बताया कि कम वजन, कम लंबाई और अधिक कमजोरी वाले बच्चों को केंद्र में भर्ती किया जाता है। रोजाना औसतन करीब पांच बच्चे पोषण संबंधी समस्या के कारण भर्ती होते हैं। अस्पताल में महीने में करीब 50 बच्चे भर्ती किए जाते हैं। कई बार यह संख्या इससे भी अधिक हो जाती है। हालांकि, कुछ बच्चों की स्थिति और जरूरत को देखते हुए काउंसलिंग के बाद अभिभावकों को घर पर ही पोषण संबंधी देखभाल के लिए समझाकर वापस भेज दिया जाता है।
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एफ-75 और 100 से दिया जाता है पोषण
पोषित पुनर्वास केंद्र में भर्ती बच्चों को उनकी स्थिति के अनुसार विशेष फॉर्मूला आहार एफ-75 और एफ-100 दिया जाता है। बच्चों को सामान्य तौर पर करीब तीन दिन निगरानी में रखा जाता है। यदि निर्धारित अवधि में स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं होता तो जरूरत के अनुसार भर्ती की अवधि बढ़ा दी जाती है। इस दौरान बच्चे के वजन और स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाती है।
अभिभावकों को मिलती है प्रोत्साहन राशि
केंद्र में बच्चे को भर्ती कराने वाले अभिभावक को एक दिन के लिए 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। इसके साथ ही चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी अभिभावकों को बच्चों के भोजन, साफ-सफाई और नियमित देखभाल के बारे में जानकारी देते हैं, ताकि अस्पताल से छुट्टी के बाद भी बच्चे के पोषण में सुधार जारी रहे। चिकित्सकों के अनुसार बच्चों को जंक फूड से दूर रखकर घर का ताजा और संतुलित भोजन देना जरूरी है। भोजन में हरी सब्जियां, दाल, दूध एवं अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करने से बच्चों के शारीरिक विकास में मदद मिलती है।
ये हैं कुपोषण के प्रमुख लक्षण
उम्र के अनुसार वजन कम होना।
लंबाई का अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ना।
शरीर में कमजोरी और सुस्ती।
एनीमिया की समस्या।
बार-बार बीमार पड़ना ।
भूख कम लगना।