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Faridabad News: जिले में अब रोवर्स तकनीक से होगा भूमि का सीमांकन
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कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के सामने खेड़ीकला में किया गया तकनीक का डेमो
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, शहरी स्थानीय निकाय और नागरिक आपूर्ति मामलों के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के सामने शनिवार को खेड़ीकला में भूमि सीमांकन के लिए अत्याधुनिक तकनीक रोवर्स का डेमो किया गया। इस दौरान भूमि सीमांकन के लिए सेटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्वेक्षण और सीओआरएस-आधारित भू-संदर्भन प्रणाली को शामिल किया है। अभी तक जमीन की पैमाइश चेन सर्वे के माध्यम से की जाती थी । इस मौके पर जिला उपायुक्त विक्रम सिंह व कई अधिकारी मौजूद रहे। सर्वे ऑफ इंडिया के सहयोग से अब भूमि सीमांकन को पारंपरिक तरीकों से हटकर आधुनिक डिजिटल तकनीक पर आधारित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश में 300 रोवर्स मशीनों की खरीद को मंजूरी दी गई है।
क्या है रोवर्स तकनीक
रोवर्स एक आधुनिक उपकरण है जो उपग्रह आधारित डिजिटल मैपिंग के माध्यम से अत्यंत सटीक और तेज भूमि सीमांकन करता है। इससे पारंपरिक जरीब विधि की तुलना में अधिक पारदर्शी, विवाद मुक्त और भरोसेमंद परिणाम मिलते हैं। इस तकनीक से संपत्ति से जुड़े विवादों, म्यूटेशन, बैंक ऋण एवं सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। रोवर्स तकनीक के माध्यम से अब सीमांकन वैज्ञानिक व पारदर्शी ढंग से होगा, जिससे राज्य में भूमि विवादों का स्थायी समाधान संभव होगा। इस तकनीक से राज्य की शामलात भूमि की भी सटीक पैमाइश संभव होगी। इससे राजस्व की हानि रोकी जा सकेगी और संपत्ति के रिकॉर्ड सुव्यवस्थित होंगे। राज्य के पटवारियों और कानूनगो को इस तकनीक के उपयोग हेतु प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। जिससे वे आधुनिक तकनीक के साथ कार्य कुशलता से कर सकें।
डिजिटल मैपिंग से होगा राजस्व विभाग का आधुनिकरण
इस तकनीक के उपयोग से न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी आएगी। वहीं, राज्य सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान के अनुरूप भूमि प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। पूर्व में भूमि का डिमार्केशन करने के लिए पटवारी चेन का इस्तेमाल कर सीमा निर्धारित करते थे। अब हरियाणा में जमीन के सीमांकन के लिए सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्वे सहित आधुनिक तकनीक अपनाई जा रही है। रोवर्स आधारित डिजिटल मैपिंग से प्रॉपर्टी के लेन-देन और जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया आसान होगी। इसके साथ ही बैंक लोन और आमजन को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, शहरी स्थानीय निकाय और नागरिक आपूर्ति मामलों के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के सामने शनिवार को खेड़ीकला में भूमि सीमांकन के लिए अत्याधुनिक तकनीक रोवर्स का डेमो किया गया। इस दौरान भूमि सीमांकन के लिए सेटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्वेक्षण और सीओआरएस-आधारित भू-संदर्भन प्रणाली को शामिल किया है। अभी तक जमीन की पैमाइश चेन सर्वे के माध्यम से की जाती थी । इस मौके पर जिला उपायुक्त विक्रम सिंह व कई अधिकारी मौजूद रहे। सर्वे ऑफ इंडिया के सहयोग से अब भूमि सीमांकन को पारंपरिक तरीकों से हटकर आधुनिक डिजिटल तकनीक पर आधारित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश में 300 रोवर्स मशीनों की खरीद को मंजूरी दी गई है।
क्या है रोवर्स तकनीक
रोवर्स एक आधुनिक उपकरण है जो उपग्रह आधारित डिजिटल मैपिंग के माध्यम से अत्यंत सटीक और तेज भूमि सीमांकन करता है। इससे पारंपरिक जरीब विधि की तुलना में अधिक पारदर्शी, विवाद मुक्त और भरोसेमंद परिणाम मिलते हैं। इस तकनीक से संपत्ति से जुड़े विवादों, म्यूटेशन, बैंक ऋण एवं सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। रोवर्स तकनीक के माध्यम से अब सीमांकन वैज्ञानिक व पारदर्शी ढंग से होगा, जिससे राज्य में भूमि विवादों का स्थायी समाधान संभव होगा। इस तकनीक से राज्य की शामलात भूमि की भी सटीक पैमाइश संभव होगी। इससे राजस्व की हानि रोकी जा सकेगी और संपत्ति के रिकॉर्ड सुव्यवस्थित होंगे। राज्य के पटवारियों और कानूनगो को इस तकनीक के उपयोग हेतु प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। जिससे वे आधुनिक तकनीक के साथ कार्य कुशलता से कर सकें।
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डिजिटल मैपिंग से होगा राजस्व विभाग का आधुनिकरण
इस तकनीक के उपयोग से न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी आएगी। वहीं, राज्य सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान के अनुरूप भूमि प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। पूर्व में भूमि का डिमार्केशन करने के लिए पटवारी चेन का इस्तेमाल कर सीमा निर्धारित करते थे। अब हरियाणा में जमीन के सीमांकन के लिए सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन सर्वे सहित आधुनिक तकनीक अपनाई जा रही है। रोवर्स आधारित डिजिटल मैपिंग से प्रॉपर्टी के लेन-देन और जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया आसान होगी। इसके साथ ही बैंक लोन और आमजन को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा।
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