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Faridabad News: रैन बसेरे बदहाल, व्यवस्था पर सवाल
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कही टिन शेड के नीचे बैठकर तो कहीं गंदगी के बीच बिस्तर बिछाकर रात काट रहे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिले में ठंड लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन नगर निगम के रैन बसेरों की हालत बेहाल नजर आ रही है। अमर उजाला की टीम ने बृहस्पतिवार रात जब विभिन्न इलाकों में स्थित रैन बसेरों और रेलवे स्टेशन की जमीनी पड़ताल की तो व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। कहीं यात्रियों को ठंड से बचने के लिए टिन शेड के नीचे बैठना पड़ रहा था तो कहीं अंधेरे और गंदगी के बीच लोग जमीन पर बिस्तर बिछाकर रात गुजारने को मजबूर दिखे।
सबसे चिंताजनक स्थिति ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशन की सामने आई जहां यात्रियों के लिए आज तक कोई स्थायी वेटिंग रूम नहीं है। ठंड के बीच सैकड़ों यात्री प्लेटफार्म पर लगे टिन शेड के नीचे बैठकर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। ठंडी हवा के थपेड़ों के बीच बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं असहज स्थिति में नजर आए। यात्रियों ने बताया कि रात के समय ठंड और कोहरे में इंतजार करना बेहद मुश्किल हो जाता है लेकिन स्टेशन पर बैठने या ठहरने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।
एनआईटी क्षेत्र में बने रैन बसेरे की भी हालत अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। यहां रैन बसेरे के बाहर मलबे का ढेर लगा हुआ मिला जिससे अंदर आने-जाने में लोगों को दिक्कत हो रही है। शौचालय का गेट टूटा हुआ है जिससे स्वच्छता और सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह रही कि रैन बसेरे के अंदर बिस्तर और फोल्डिंग पलंग उपलब्ध हैं। जरूरतमंदों के लिए रजाइयों की व्यवस्था भी की गई है लेकिन बाहरी अव्यवस्था के कारण लोग असहज महसूस कर रहे हैं।
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ओल्ड फरीदाबाद स्थित रैन बसेरे की स्थिति और भी चिंताजनक पाई गई। यहां बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे पूरा भवन अंधेरे में डूबा रहता है। अंदर और बाहर गंदगी फैली हुई है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस रैन बसेरे में शौचालय की व्यवस्था ही नहीं है। मजबूरी में लोग आसपास खुले में लघुशंका कर देते हैं जिससे आस-पास में दुर्गंध फैल रही है और बीमारी का खतरा भी बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि सफाई न होने और रोशनी के अभाव में यहां रुकना किसी जोखिम से कम नहीं है।
रैन बसेरे के अंदर भी हालात संतोषजनक नहीं हैं। अंधेरे और गंदगी के बीच लोग जमीन पर बिस्तर डालकर सोने को मजबूर हैं। कई जगह फर्श पर कचरा फैला हुआ मिला। ठंड में खुले वातावरण में रात बिताने से बेघर और गरीब लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इसपर ध्यान नहीं दे रहा है।
स्थानीय समाजसेवियों का कहना है कि हर साल सर्दी के मौसम में रैन बसेरों की व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही होती है। निगम द्वारा दावा किया जाता है कि रैन बसेरों में पर्याप्त बिस्तर, कंबल और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं लेकिन हकीकत में साफ-सफाई, रोशनी और शौचालय जैसी बुनियादी जरूरतों की भी कमी है।
ओल्ड फरीदाबाद में फुटपाथ पर सोता दिखा व्यक्ति
ओल्ड फरीदाबाद स्थिति रैन बेसेरे की हालत काफी खराब है । यहां सफाई के साथ लाइट भी नहीं है। इसी के चलते मजबूरी में रैन बसेरे के पास एक व्यक्ति फुटपाथ पर सोता हुआ दिखाई दिया। आस-पास मौजूद लोगों ने बताया कि देर रात तक कई लोग यहां पर आकर लेट जाएंगे। सुविधाओं की कमी होने के कारण लोग सड़क पर सो जाते हैं।
रैन बेसेर में लाइट भी व्यवस्था थी लेकिन किसी वाहन की टक्कर के कारण केबल टूट गई है इसे ठीक करवाया जा रहा है। शौचालय के लिए मोबाइल शौचालय की व्यवस्था की जाएगी। - महेंद्र सिंह, नोडल अधिकारी ओल्ड फरीदाबाद रैन बसेरा
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिले में ठंड लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन नगर निगम के रैन बसेरों की हालत बेहाल नजर आ रही है। अमर उजाला की टीम ने बृहस्पतिवार रात जब विभिन्न इलाकों में स्थित रैन बसेरों और रेलवे स्टेशन की जमीनी पड़ताल की तो व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। कहीं यात्रियों को ठंड से बचने के लिए टिन शेड के नीचे बैठना पड़ रहा था तो कहीं अंधेरे और गंदगी के बीच लोग जमीन पर बिस्तर बिछाकर रात गुजारने को मजबूर दिखे।
सबसे चिंताजनक स्थिति ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशन की सामने आई जहां यात्रियों के लिए आज तक कोई स्थायी वेटिंग रूम नहीं है। ठंड के बीच सैकड़ों यात्री प्लेटफार्म पर लगे टिन शेड के नीचे बैठकर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। ठंडी हवा के थपेड़ों के बीच बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं असहज स्थिति में नजर आए। यात्रियों ने बताया कि रात के समय ठंड और कोहरे में इंतजार करना बेहद मुश्किल हो जाता है लेकिन स्टेशन पर बैठने या ठहरने की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।
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एनआईटी क्षेत्र में बने रैन बसेरे की भी हालत अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है। यहां रैन बसेरे के बाहर मलबे का ढेर लगा हुआ मिला जिससे अंदर आने-जाने में लोगों को दिक्कत हो रही है। शौचालय का गेट टूटा हुआ है जिससे स्वच्छता और सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह रही कि रैन बसेरे के अंदर बिस्तर और फोल्डिंग पलंग उपलब्ध हैं। जरूरतमंदों के लिए रजाइयों की व्यवस्था भी की गई है लेकिन बाहरी अव्यवस्था के कारण लोग असहज महसूस कर रहे हैं।
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ओल्ड फरीदाबाद स्थित रैन बसेरे की स्थिति और भी चिंताजनक पाई गई। यहां बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे पूरा भवन अंधेरे में डूबा रहता है। अंदर और बाहर गंदगी फैली हुई है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस रैन बसेरे में शौचालय की व्यवस्था ही नहीं है। मजबूरी में लोग आसपास खुले में लघुशंका कर देते हैं जिससे आस-पास में दुर्गंध फैल रही है और बीमारी का खतरा भी बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि सफाई न होने और रोशनी के अभाव में यहां रुकना किसी जोखिम से कम नहीं है।
रैन बसेरे के अंदर भी हालात संतोषजनक नहीं हैं। अंधेरे और गंदगी के बीच लोग जमीन पर बिस्तर डालकर सोने को मजबूर हैं। कई जगह फर्श पर कचरा फैला हुआ मिला। ठंड में खुले वातावरण में रात बिताने से बेघर और गरीब लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इसपर ध्यान नहीं दे रहा है।
स्थानीय समाजसेवियों का कहना है कि हर साल सर्दी के मौसम में रैन बसेरों की व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही होती है। निगम द्वारा दावा किया जाता है कि रैन बसेरों में पर्याप्त बिस्तर, कंबल और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं लेकिन हकीकत में साफ-सफाई, रोशनी और शौचालय जैसी बुनियादी जरूरतों की भी कमी है।
ओल्ड फरीदाबाद में फुटपाथ पर सोता दिखा व्यक्ति
ओल्ड फरीदाबाद स्थिति रैन बेसेरे की हालत काफी खराब है । यहां सफाई के साथ लाइट भी नहीं है। इसी के चलते मजबूरी में रैन बसेरे के पास एक व्यक्ति फुटपाथ पर सोता हुआ दिखाई दिया। आस-पास मौजूद लोगों ने बताया कि देर रात तक कई लोग यहां पर आकर लेट जाएंगे। सुविधाओं की कमी होने के कारण लोग सड़क पर सो जाते हैं।
रैन बेसेर में लाइट भी व्यवस्था थी लेकिन किसी वाहन की टक्कर के कारण केबल टूट गई है इसे ठीक करवाया जा रहा है। शौचालय के लिए मोबाइल शौचालय की व्यवस्था की जाएगी। - महेंद्र सिंह, नोडल अधिकारी ओल्ड फरीदाबाद रैन बसेरा