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Faridabad News: एनआई पांच राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक 700 बच्चों के लिए मात्र 12 कमरे
Fri, 11 Aug 2023 11:24 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
Updated Fri, 11 Aug 2023 11:24 PM IST
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अमर उजाला अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। एनआई पांच राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में पढ़ने वालों विद्यार्थियों को सर्दी, गर्मी और बरसात प्रत्येक मौसम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्कूलों में कमरों की कमी के चलते विद्यार्थी कक्षाएं बाहर खुले मैदानों में पढ़ाई करते है। स्कूल में करीब 700 बच्चों के लिए मात्र 12 कमरे हैं। यहां पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है। वहीं, स्कूल प्रबंधन ने यहां 72 कमरे बनाने का प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेजा है।
पीडब्ल्यूडी ने वर्ष 2022 मार्च में यहां पहले से बना करीब 27 कमरे को कंडम घोषित कर दिया था। जिसे बाद उसे अक्तूबर में तोड़ दिया गया। इसके बाद स्कूल परिसर में नए कमरे बनाने का प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है, लेकिन स्कूल प्रबंधन को अभी तक भवन के निर्माण का इंतजार है। सूत्रों की माने तो इसका प्रस्ताव तैयार कर फंड स्वीकृति के लिए भेजा जा चुका है। मुख्यालय से हरी झंडी के बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने राजकीय स्कूलों में दाखिले बढ़ाने को लेकर अभियान चलाया था। जिससे प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या कई गुणा अधिक बढ़ गई थी। निदेशालय द्वारा विद्यार्थियों के अनुपात में अभी तक स्कूलों में कमरों की संख्या बढ़ाने को लेकर स्वीकृति नहीं दी जा रही।
स्कूल की प्रधानाचार्य ज्योति का कहना है कि स्कूल परिसर में पहली से पांचवीं और 6ठी से 12वीं कक्षा चलती है। कुछ क्लास को छोड़कर प्रत्येक कक्षा में दो सेक्शन है प्रत्येक सेक्शन में 50-50 बच्चें है। ऐसे में कई बार कक्षा लगाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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शिक्षा नीतियों को लग रहा पलीता
सरकार की शिक्षा का अधिकार और सर्व शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं को पलीता लगाया जा रहा है। प्रशासन आंख-कान मूंदकर बैठा है। स्कूल में बेंच तक नहीं है और पांच से छह भवन जर्जर हालत में है। बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल की हालत देखकर बच्चों के अभिवावक भी अब अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं। शिक्षा विभाग इस ओर ध्यान देना उचित नहीं समझ रहा है जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ आश्वासन देकर ही खानापूर्ति कर रहे हैं।
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कई स्कूलों का ऐसा ही हाल
सेक्टर 22, सेक्टर सात, आठ, सारण, अजरौंदा और ओल्ड फरीदाबाद समेत कुल 12 ऐसे स्कूल हैं, जहां पर बच्चों की संख्या के अनुसार कमरे नहीं है। इससे बच्चों के साथ टीचरों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। विभाग का कहना हैं कि इस बारे में निदेशालय को पत्राचार किया गया है।
वर्जन
इस संबंध में मुझे अभी जानकारी नहीं है। स्कूल का निरीक्षण कर उनकी समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।
- अशोक बधेल, जिला शिक्षा अधिकारी
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फरीदाबाद। एनआई पांच राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में पढ़ने वालों विद्यार्थियों को सर्दी, गर्मी और बरसात प्रत्येक मौसम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्कूलों में कमरों की कमी के चलते विद्यार्थी कक्षाएं बाहर खुले मैदानों में पढ़ाई करते है। स्कूल में करीब 700 बच्चों के लिए मात्र 12 कमरे हैं। यहां पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई होती है। वहीं, स्कूल प्रबंधन ने यहां 72 कमरे बनाने का प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेजा है।
पीडब्ल्यूडी ने वर्ष 2022 मार्च में यहां पहले से बना करीब 27 कमरे को कंडम घोषित कर दिया था। जिसे बाद उसे अक्तूबर में तोड़ दिया गया। इसके बाद स्कूल परिसर में नए कमरे बनाने का प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है, लेकिन स्कूल प्रबंधन को अभी तक भवन के निर्माण का इंतजार है। सूत्रों की माने तो इसका प्रस्ताव तैयार कर फंड स्वीकृति के लिए भेजा जा चुका है। मुख्यालय से हरी झंडी के बाद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने राजकीय स्कूलों में दाखिले बढ़ाने को लेकर अभियान चलाया था। जिससे प्रत्येक स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या कई गुणा अधिक बढ़ गई थी। निदेशालय द्वारा विद्यार्थियों के अनुपात में अभी तक स्कूलों में कमरों की संख्या बढ़ाने को लेकर स्वीकृति नहीं दी जा रही।
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स्कूल की प्रधानाचार्य ज्योति का कहना है कि स्कूल परिसर में पहली से पांचवीं और 6ठी से 12वीं कक्षा चलती है। कुछ क्लास को छोड़कर प्रत्येक कक्षा में दो सेक्शन है प्रत्येक सेक्शन में 50-50 बच्चें है। ऐसे में कई बार कक्षा लगाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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शिक्षा नीतियों को लग रहा पलीता
सरकार की शिक्षा का अधिकार और सर्व शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं को पलीता लगाया जा रहा है। प्रशासन आंख-कान मूंदकर बैठा है। स्कूल में बेंच तक नहीं है और पांच से छह भवन जर्जर हालत में है। बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल की हालत देखकर बच्चों के अभिवावक भी अब अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं। शिक्षा विभाग इस ओर ध्यान देना उचित नहीं समझ रहा है जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ आश्वासन देकर ही खानापूर्ति कर रहे हैं।
कई स्कूलों का ऐसा ही हाल
सेक्टर 22, सेक्टर सात, आठ, सारण, अजरौंदा और ओल्ड फरीदाबाद समेत कुल 12 ऐसे स्कूल हैं, जहां पर बच्चों की संख्या के अनुसार कमरे नहीं है। इससे बच्चों के साथ टीचरों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। विभाग का कहना हैं कि इस बारे में निदेशालय को पत्राचार किया गया है।
वर्जन
इस संबंध में मुझे अभी जानकारी नहीं है। स्कूल का निरीक्षण कर उनकी समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।
- अशोक बधेल, जिला शिक्षा अधिकारी