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फर्जीवाडे़ में पुलिस कार्रवाई से पहले कई कर्मियों को हटाया
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फरीदाबाद। आयुष्मान भारत योजना के तहत बीके नागरिक अस्पताल के हार्ट सेंटर में इन दिनों 90 फीसदी प्रशासनिक स्टाफ को बदला जा चुका है। ज्यादातर बदलाव दिसंबर से जनवरी के बीच हुआ। वहीं, फरवरी में फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाकर सरकार व मरीजों को नुकसान पहुंचाने वाले चार कर्मचारियों को पुलिस ने रिमांड पर लिया है।
हार्ट सेंटर में कार्यरत प्रशासनिक सहायक व मेडिकल टीम के अन्य कई कर्मचारी पूर्व में ही नौकरी छोड़कर चले गए। वहीं कई कर्मचारियों को कंपनी प्रबंधन ने अपने स्तर पर भी हटाया है। जिले में अब तक 95 हजार आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसमें से सैकड़ों मरीजों ने आयुष्मान भारत के तहत बीके नागरिक अस्पताल में दिल का इलाज कराया है। बीके नागरिक अस्पताल में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत मेडिटीना कंपनी के साथ हार्ट सेंटर का संचालन किया जा रहा है।
मामले में पुलिस को शिकायत देने वाले मेडिटीना कंपनी के उत्तर भारत के सीओओ प्रवीन तिवारी ने बताया कि एक मरीज ने लिखित शिकायत देकर मामले में जांच की मांग की थी। ऐसे में कंपनी ने अपने स्तर पर आंतरिक जांच की। इसमें पता चला कि कार्ड होने के बावजूद मरीज से नकद भुगतान लिया गया। उधर, मरीज को यह जानकारी ही नहीं थी कि इलाज के खर्च का भुगतान सरकारी योजना के तहत हुआ है। मरीज का आरोप था कि उसने नकद भुगतान के बाद इलाज कराया है। ऐसे में पुलिस को इसकी शिकायत दी गई। जांच जारी है।
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हार्ट सेंटर में कार्यरत प्रशासनिक सहायक व मेडिकल टीम के अन्य कई कर्मचारी पूर्व में ही नौकरी छोड़कर चले गए। वहीं कई कर्मचारियों को कंपनी प्रबंधन ने अपने स्तर पर भी हटाया है। जिले में अब तक 95 हजार आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसमें से सैकड़ों मरीजों ने आयुष्मान भारत के तहत बीके नागरिक अस्पताल में दिल का इलाज कराया है। बीके नागरिक अस्पताल में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत मेडिटीना कंपनी के साथ हार्ट सेंटर का संचालन किया जा रहा है।
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मामले में पुलिस को शिकायत देने वाले मेडिटीना कंपनी के उत्तर भारत के सीओओ प्रवीन तिवारी ने बताया कि एक मरीज ने लिखित शिकायत देकर मामले में जांच की मांग की थी। ऐसे में कंपनी ने अपने स्तर पर आंतरिक जांच की। इसमें पता चला कि कार्ड होने के बावजूद मरीज से नकद भुगतान लिया गया। उधर, मरीज को यह जानकारी ही नहीं थी कि इलाज के खर्च का भुगतान सरकारी योजना के तहत हुआ है। मरीज का आरोप था कि उसने नकद भुगतान के बाद इलाज कराया है। ऐसे में पुलिस को इसकी शिकायत दी गई। जांच जारी है।
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