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Faridabad News: फरीदाबाद में जमीन की पैमाइश होगी हाईटेक, सैटेलाइट से तय होगी हदबंदी
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जिले की तीनों तहसीलों के साथ उप-तहसीलों में होगा सर्वेक्षण
प्रशासन की तरफ से शुरू किए गए ऑनलाइन आवेदन, अब तक मिले 29 आवेदन
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। फरीदाबाद में जमीन की पैमाइश को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब तक जरीब और फीते से होने वाली पारंपरिक नापतोल की जगह सैटेलाइट आधारित जीएनएसएस रोवर मशीन से पैमाइश की जाएगी। राजस्व विभाग ने इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारियां पूरी कर ली हैं और जिले में इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। अब प्रशासन की तरफ से ई-जीआरएस पोर्टल पर आवेदन लिए जा रहे हैं अब तक करीब 29 आवेदन प्रशासन को प्राप्त हो चुके हैं।
जिले के तेजी से शहरीकरण और जमीन की बढ़ती कीमतों के बीच सीमा विवाद लंबे समय से बड़ी समस्या बने हुए हैं। खासकर ग्रेटर फरीदाबाद (नहरपार) और आसपास के गांवों में एक-एक इंच जमीन को लेकर झगड़े आम हैं जो कई बार अदालतों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में प्रशासन अब डिजिटल पैमाइश के जरिये इन विवादों का स्थायी समाधान करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक करीब 29 लोगों ने ई-जीआरएएस पोर्टल के माध्यम से अपनी जमीन की पैमाइश के लिए आवेदन कर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह संख्या तेजी से बढ़ेगी क्योंकि लोगों में इस नई तकनीक को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।
तीनों तहसीलों के साथ उपतहसीलों में होगी मशीन की तैनाती
जिले की प्रशासनिक संरचना को देखते हुए राजस्व विभाग ने सभी प्रमुख तहसीलों में जीएनएसएस रोवर मशीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और बड़खल तहसील में एक-एक मशीन तैनात की जा रही है। वहीं तिगांव, धौज मोहना और गौंछी उप-तहसीलों में जरूरत के अनुसार मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार सबसे ज्यादा प्राथमिकता ग्रेटर फरीदाबाद और उससे सटे गांवों को दी जा रही है जहां जमीन के विवादों की संख्या सबसे अधिक है।
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सेंटीमीटर लेवल की सटीकता, छेड़छाड़ की गुंजाइश खत्म
नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीकता है। जीएनएसएस रोवर मशीन सैटेलाइट से सीधे जुड़कर जमीन के अक्षांश और देशांतर को सेंटीमीटर स्तर तक मापती है। पैमाइश के दौरान जो डेटा तैयार होगा वह सीधे सरकारी सर्वर पर अपलोड हो जाएगा जिससे स्थानीय स्तर पर किसी भी प्रकार की हेरफेर की संभावना खत्म हो जाएगी। इससे पहले पारंपरिक तरीके में पटवारी और कानूनगो के स्तर पर विवाद और आरोप लगते रहे हैं। कई मामलों में नापतोल को लेकर शिकायतें भी सामने आती थीं लेकिन डिजिटल सिस्टम लागू होने के बाद पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
भूमि की उपयोगिता के अनुसार देना होगा शुल्क
राजस्व विभाग ने पैमाइश के लिए शुल्क भी तय कर दिया है जिससे प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। कृषि भूमि के लिए पहले एक एकड़ तक एक हजार रुपये और उसके बाद प्रति अतिरिक्त एकड़ 500 रुपये देने होंगे। शहरी क्षेत्र में 500 वर्ग गज तक दो हजार रुपये का शुल्क तय किया गया है जबकि इससे अधिक क्षेत्र पर 3 हजार रुपये देने होंगे। इसके अलावा हर आवेदन पर 500 रुपये का अतिरिक्त स्थानीय शुल्क भी लिया जाएगा।
ऑनलाइन आवेदन से आसान हुई प्रक्रिया
नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब लोगों को तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ई-जीआरएएस पोर्टल के माध्यम से घर बैठे आवेदन किया जा सकता है और शुल्क भी ऑनलाइन जमा होगा। इसके बाद राजस्व विभाग की टीम तय समय पर मौके पर पहुंचकर पैमाइश करेगी। फरीदाबाद में रियल एस्टेट तेजी से विकसित हो रहा है। नहरपार के सेक्टरों, गांवों और शहरी कॉलोनियों में जमीन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में छोटी-सी माप की गलती भी बड़े विवाद का कारण बन जाती है। नई तकनीक लागू होने से न केवल जमीन विवादों में कमी आएगी बल्कि प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त भी अधिक पारदर्शी होगी। साथ ही अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होने की उम्मीद है।
पैमाइश के लिए ई-जीआरएस पोर्टल पर आवेदन लिए जा रहे हैं। लोग इस पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।- विकास सिंह, डीआरओ,फरीदाबाद
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प्रशासन की तरफ से शुरू किए गए ऑनलाइन आवेदन, अब तक मिले 29 आवेदन
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। फरीदाबाद में जमीन की पैमाइश को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब तक जरीब और फीते से होने वाली पारंपरिक नापतोल की जगह सैटेलाइट आधारित जीएनएसएस रोवर मशीन से पैमाइश की जाएगी। राजस्व विभाग ने इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारियां पूरी कर ली हैं और जिले में इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। अब प्रशासन की तरफ से ई-जीआरएस पोर्टल पर आवेदन लिए जा रहे हैं अब तक करीब 29 आवेदन प्रशासन को प्राप्त हो चुके हैं।
जिले के तेजी से शहरीकरण और जमीन की बढ़ती कीमतों के बीच सीमा विवाद लंबे समय से बड़ी समस्या बने हुए हैं। खासकर ग्रेटर फरीदाबाद (नहरपार) और आसपास के गांवों में एक-एक इंच जमीन को लेकर झगड़े आम हैं जो कई बार अदालतों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में प्रशासन अब डिजिटल पैमाइश के जरिये इन विवादों का स्थायी समाधान करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में अब तक करीब 29 लोगों ने ई-जीआरएएस पोर्टल के माध्यम से अपनी जमीन की पैमाइश के लिए आवेदन कर दिया है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह संख्या तेजी से बढ़ेगी क्योंकि लोगों में इस नई तकनीक को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।
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तीनों तहसीलों के साथ उपतहसीलों में होगी मशीन की तैनाती
जिले की प्रशासनिक संरचना को देखते हुए राजस्व विभाग ने सभी प्रमुख तहसीलों में जीएनएसएस रोवर मशीन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और बड़खल तहसील में एक-एक मशीन तैनात की जा रही है। वहीं तिगांव, धौज मोहना और गौंछी उप-तहसीलों में जरूरत के अनुसार मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार सबसे ज्यादा प्राथमिकता ग्रेटर फरीदाबाद और उससे सटे गांवों को दी जा रही है जहां जमीन के विवादों की संख्या सबसे अधिक है।
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नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीकता है। जीएनएसएस रोवर मशीन सैटेलाइट से सीधे जुड़कर जमीन के अक्षांश और देशांतर को सेंटीमीटर स्तर तक मापती है। पैमाइश के दौरान जो डेटा तैयार होगा वह सीधे सरकारी सर्वर पर अपलोड हो जाएगा जिससे स्थानीय स्तर पर किसी भी प्रकार की हेरफेर की संभावना खत्म हो जाएगी। इससे पहले पारंपरिक तरीके में पटवारी और कानूनगो के स्तर पर विवाद और आरोप लगते रहे हैं। कई मामलों में नापतोल को लेकर शिकायतें भी सामने आती थीं लेकिन डिजिटल सिस्टम लागू होने के बाद पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
भूमि की उपयोगिता के अनुसार देना होगा शुल्क
राजस्व विभाग ने पैमाइश के लिए शुल्क भी तय कर दिया है जिससे प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। कृषि भूमि के लिए पहले एक एकड़ तक एक हजार रुपये और उसके बाद प्रति अतिरिक्त एकड़ 500 रुपये देने होंगे। शहरी क्षेत्र में 500 वर्ग गज तक दो हजार रुपये का शुल्क तय किया गया है जबकि इससे अधिक क्षेत्र पर 3 हजार रुपये देने होंगे। इसके अलावा हर आवेदन पर 500 रुपये का अतिरिक्त स्थानीय शुल्क भी लिया जाएगा।
ऑनलाइन आवेदन से आसान हुई प्रक्रिया
नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब लोगों को तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ई-जीआरएएस पोर्टल के माध्यम से घर बैठे आवेदन किया जा सकता है और शुल्क भी ऑनलाइन जमा होगा। इसके बाद राजस्व विभाग की टीम तय समय पर मौके पर पहुंचकर पैमाइश करेगी। फरीदाबाद में रियल एस्टेट तेजी से विकसित हो रहा है। नहरपार के सेक्टरों, गांवों और शहरी कॉलोनियों में जमीन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में छोटी-सी माप की गलती भी बड़े विवाद का कारण बन जाती है। नई तकनीक लागू होने से न केवल जमीन विवादों में कमी आएगी बल्कि प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त भी अधिक पारदर्शी होगी। साथ ही अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होने की उम्मीद है।
पैमाइश के लिए ई-जीआरएस पोर्टल पर आवेदन लिए जा रहे हैं। लोग इस पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।- विकास सिंह, डीआरओ,फरीदाबाद