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Faridabad News: निरीक्षण के बाद भी शुरू नहीं हो पाया आईवीएफ सेंटर
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आठ महीने बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंजूरी पत्र नहीं दिया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में डेढ़ साल से बने आईवीएफ सेंटर का टीम की ओर से निरीक्षण किया जा चुका है। लेकिन आठ महीने बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंजूरी पत्र नहीं दिया गया। जिसकी वजह से आईवीएफ सेंटर शुरू नहीं हो पाया है। अभी महिलाओं को आईवीएफ के लिए दिल्ली एनसीआर में दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जाता है।
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के डीन डॉ. अनिल कुमार पांडे ने बताया कि आईवीएफ सेंटर को बने हुए करीब डेढ़ साल से ऊपर हो गया है। इस सेंटर में महिला व पुरुष दोनों का उपचार होगा। इसमें आधुनिक तकनीक के उपकरणों का उपयोग कर उपचार किया जाएगा। इसमें लेजर तकनीक से महिलाओं का उपचार किया जाएगा। जिसके लिए मरीजों को बाहर लाखों रुपये देने होते हैं। वहीं बीमाकृत व्यक्तियों को यह सुविधा अस्पताल में फ्री में मिलेगी। डॉ. ए के पांडे ने बताया कि अक्तूबर में चेयरपर्सन एडीसी के साथ सीएमओ वाइस चेयरपर्सन, पीएनडीटी के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी सचिव, महिला एवं बाल विकास अधिकारी, महिला रोग विशेषज्ञ तथा जिला न्यायवादी बतौर सदस्य ने निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कोई भी कमी नहीं पाई गई। टीम की ओर से उनको पॉजिटिव रिपोर्ट दी गई थी। जिससे उनको उम्मीद थी कि उनको मंजूरी पत्र जल्द मिल जाएगा। लेकिन आठ महीने बीत जाने के बावजूद भी अभी तक उनको स्वास्थ्य विभाग की ओर से पत्र नहीं मिला है। जिसकी वजह से मरीजों को अभी और इंतजार करना होगा।
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टीम निरीक्षण करके जा चुकी है लेकिन अभी तक उनको कोई मंजूरी का पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र को लेकर कई बार वह उच्च अधिकारियों से भी बात कर चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है। - डॉ. ए के पांडे, डीन, मेडिकल कॉलेज
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में डेढ़ साल से बने आईवीएफ सेंटर का टीम की ओर से निरीक्षण किया जा चुका है। लेकिन आठ महीने बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से मंजूरी पत्र नहीं दिया गया। जिसकी वजह से आईवीएफ सेंटर शुरू नहीं हो पाया है। अभी महिलाओं को आईवीएफ के लिए दिल्ली एनसीआर में दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जाता है।
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के डीन डॉ. अनिल कुमार पांडे ने बताया कि आईवीएफ सेंटर को बने हुए करीब डेढ़ साल से ऊपर हो गया है। इस सेंटर में महिला व पुरुष दोनों का उपचार होगा। इसमें आधुनिक तकनीक के उपकरणों का उपयोग कर उपचार किया जाएगा। इसमें लेजर तकनीक से महिलाओं का उपचार किया जाएगा। जिसके लिए मरीजों को बाहर लाखों रुपये देने होते हैं। वहीं बीमाकृत व्यक्तियों को यह सुविधा अस्पताल में फ्री में मिलेगी। डॉ. ए के पांडे ने बताया कि अक्तूबर में चेयरपर्सन एडीसी के साथ सीएमओ वाइस चेयरपर्सन, पीएनडीटी के उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी सचिव, महिला एवं बाल विकास अधिकारी, महिला रोग विशेषज्ञ तथा जिला न्यायवादी बतौर सदस्य ने निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कोई भी कमी नहीं पाई गई। टीम की ओर से उनको पॉजिटिव रिपोर्ट दी गई थी। जिससे उनको उम्मीद थी कि उनको मंजूरी पत्र जल्द मिल जाएगा। लेकिन आठ महीने बीत जाने के बावजूद भी अभी तक उनको स्वास्थ्य विभाग की ओर से पत्र नहीं मिला है। जिसकी वजह से मरीजों को अभी और इंतजार करना होगा।
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टीम निरीक्षण करके जा चुकी है लेकिन अभी तक उनको कोई मंजूरी का पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र को लेकर कई बार वह उच्च अधिकारियों से भी बात कर चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है। - डॉ. ए के पांडे, डीन, मेडिकल कॉलेज
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