{"_id":"6acb8a87177fd80ce50217f6","slug":"in-the-ramlilas-one-finds-the-joy-of-rams-birth-in-some-places-and-the-pain-of-his-exile-in-others-faridabad-news-c-26-1-fbd1023-82450-2026-10-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: रामलीलाओं में कहीं राम जन्म की खुशी, कहीं वनवास का दर्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: रामलीलाओं में कहीं राम जन्म की खुशी, कहीं वनवास का दर्द
विज्ञापन
- श्रीराम बरात से सीता-राम विवाह तक सजे मंच, श्रवण कुमार और ताड़का वध के प्रसंगों ने दर्शकों को किया भावविभोर
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर में चल रही रामलीलाओं के मंच इन दिनों रामायण के प्रसंगों से जीवंत हो उठे हैं। कहीं भगवान राम के जन्म के साथ अयोध्या में खुशियां छाईं तो कहीं कैकेयी के दो वरदानों ने राजा दशरथ को दुख में डुबो दिया। कहीं श्रीराम बरात की धूम रही तो कहीं सीता-राम विवाह को पारंपरिक रस्मों और मंगल गीतों के साथ शगनों की रात के रूप में मनाया गया। शहर की विभिन्न रामलीलाओं में कलाकारों ने अभिनय, संगीत और संवादों के जरिए दर्शकों को रामायण की कथा से जोड़ा।
श्री धार्मिक लीला कमेटी के मंच पर भगवान राम के जन्म और ताड़का वध का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। निर्देशक हरीश चंद्र आजाद ने बताया कि राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे पंकज खरबंदा ने गुरु वशिष्ठ के सामने संतान न होने का दुख व्यक्त किया। गुरु की सलाह पर पुत्रेष्टि यज्ञ कराया गया, जिसके बाद राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म का दृश्य दिखाया गया। इसके बाद ताड़का वध के प्रसंग ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
कैकेयी के वरदानों ने बदली अयोध्या की खुशियां: जागृति रामलीला कमेटी के मंच पर राम वनवास का भावुक प्रसंग दिखाया गया। कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगकर राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और भरत के लिए अयोध्या का राज मांगा। राम के किरदार में अनिल गांधी, दशरथ की भूमिका में प्रीतम सिंह और कैकेयी के रूप में प्रीत भाटिया ने अभिनय किया। इस प्रसंग ने दर्शकों को रामायण के उस मोड़ से रूबरू कराया, जहां राजमहल की खुशियां गहरे दुख में बदल जाती हैं।
विज्ञापन
ढोल-नगाड़ों के बीच निकली श्रीराम बरात :
विजय रामलीला कमेटी की श्रीराम बरात आकर्षण का केंद्र रही। सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर, एक बी ब्लॉक से शाम छह बजे शुरू हुई बरात में भगवान राम सहित चारों भाई घोड़ों पर सवार होकर निकले। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और जय श्रीराम के जयघोष के बीच जगह-जगह पुष्पवर्षा कर बरात का स्वागत किया गया।
देर रात कमेटी के ऐतिहासिक मंच पर सीता-राम विवाह को शगनों की रात के रूप में मनाया गया। राम की भूमिका निभा रहे निशांत नागपाल और सीता के रूप में दीपांशी अरोड़ा मंच पर पहुंचे। मंगल गीतों और गायक मनोज कुमार मोंटी के शगुन गीतों ने माहौल को उत्सवी बना दिया। दर्शकों ने भी माथा टेककर अरदास की।
श्रवण कुमार की कथा ने दिया सेवा का संदेश : कुमाऊं सांस्कृतिक मंडल की रामलीला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। पहले बच्चों ने सखियों का नृत्य प्रस्तुत किया, फिर श्रवण कुमार की नाटिका का मंचन किया गया। गोपाल सिंह बांगरी ने श्रवण कुमार की भूमिका निभाई। वहीं, सेक्टर-31 की स्प्रिंगफील्ड कॉलोनी में सनातन धर्म जागृति ट्रस्ट की रामलीला में गणेश वंदना के बाद श्रवण वध और रावण द्वारा कैलाश पर्वत उठाने के प्रसंग दिखाए गए।
सेक्टर-37 की श्री रामलीला सेवा समिति की ओर से राम जन्म और ताड़का वध का मंचन किया जाना है। आयोजन में 20 फुट ऊंचे ताड़का के पुतले का दहन भी प्रस्तावित है। इस तरह शहर की रामलीलाएं धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और मर्यादा के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचा रही हैं।
.
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर में चल रही रामलीलाओं के मंच इन दिनों रामायण के प्रसंगों से जीवंत हो उठे हैं। कहीं भगवान राम के जन्म के साथ अयोध्या में खुशियां छाईं तो कहीं कैकेयी के दो वरदानों ने राजा दशरथ को दुख में डुबो दिया। कहीं श्रीराम बरात की धूम रही तो कहीं सीता-राम विवाह को पारंपरिक रस्मों और मंगल गीतों के साथ शगनों की रात के रूप में मनाया गया। शहर की विभिन्न रामलीलाओं में कलाकारों ने अभिनय, संगीत और संवादों के जरिए दर्शकों को रामायण की कथा से जोड़ा।
श्री धार्मिक लीला कमेटी के मंच पर भगवान राम के जन्म और ताड़का वध का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। निर्देशक हरीश चंद्र आजाद ने बताया कि राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे पंकज खरबंदा ने गुरु वशिष्ठ के सामने संतान न होने का दुख व्यक्त किया। गुरु की सलाह पर पुत्रेष्टि यज्ञ कराया गया, जिसके बाद राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के जन्म का दृश्य दिखाया गया। इसके बाद ताड़का वध के प्रसंग ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
विज्ञापन
कैकेयी के वरदानों ने बदली अयोध्या की खुशियां: जागृति रामलीला कमेटी के मंच पर राम वनवास का भावुक प्रसंग दिखाया गया। कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांगकर राम के लिए 14 वर्ष का वनवास और भरत के लिए अयोध्या का राज मांगा। राम के किरदार में अनिल गांधी, दशरथ की भूमिका में प्रीतम सिंह और कैकेयी के रूप में प्रीत भाटिया ने अभिनय किया। इस प्रसंग ने दर्शकों को रामायण के उस मोड़ से रूबरू कराया, जहां राजमहल की खुशियां गहरे दुख में बदल जाती हैं।
विज्ञापन
ढोल-नगाड़ों के बीच निकली श्रीराम बरात :
विजय रामलीला कमेटी की श्रीराम बरात आकर्षण का केंद्र रही। सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर, एक बी ब्लॉक से शाम छह बजे शुरू हुई बरात में भगवान राम सहित चारों भाई घोड़ों पर सवार होकर निकले। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और जय श्रीराम के जयघोष के बीच जगह-जगह पुष्पवर्षा कर बरात का स्वागत किया गया।
देर रात कमेटी के ऐतिहासिक मंच पर सीता-राम विवाह को शगनों की रात के रूप में मनाया गया। राम की भूमिका निभा रहे निशांत नागपाल और सीता के रूप में दीपांशी अरोड़ा मंच पर पहुंचे। मंगल गीतों और गायक मनोज कुमार मोंटी के शगुन गीतों ने माहौल को उत्सवी बना दिया। दर्शकों ने भी माथा टेककर अरदास की।
श्रवण कुमार की कथा ने दिया सेवा का संदेश : कुमाऊं सांस्कृतिक मंडल की रामलीला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ। पहले बच्चों ने सखियों का नृत्य प्रस्तुत किया, फिर श्रवण कुमार की नाटिका का मंचन किया गया। गोपाल सिंह बांगरी ने श्रवण कुमार की भूमिका निभाई। वहीं, सेक्टर-31 की स्प्रिंगफील्ड कॉलोनी में सनातन धर्म जागृति ट्रस्ट की रामलीला में गणेश वंदना के बाद श्रवण वध और रावण द्वारा कैलाश पर्वत उठाने के प्रसंग दिखाए गए।
सेक्टर-37 की श्री रामलीला सेवा समिति की ओर से राम जन्म और ताड़का वध का मंचन किया जाना है। आयोजन में 20 फुट ऊंचे ताड़का के पुतले का दहन भी प्रस्तावित है। इस तरह शहर की रामलीलाएं धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और मर्यादा के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचा रही हैं।
.